राजस्थान के स्कूलों पर बड़ा फैसला, 12,335 करोड़ की योजना
राजस्थान में विद्यार्थियों की सुरक्षा को लेकर सरकार ने स्कूलों की आधारभूत सुविधाओं को मजबूत करने की बड़ी योजना तैयार की है। 2026-27 से 2030-31 तक 12,335.90 करोड़ रुपये खर्च करने का प्रस्ताव है। जर्जर भवनों पर रोक, नए कक्षा-कक्ष, शौचालय, पेयजल और मरम्मत कार्यों की नियमित निगरानी के साथ तकनीकी सुरक्षा जांच पर भी जोर दिया गया है।
- विद्यार्थियों की सुरक्षा के लिए जर्जर स्कूल भवनों के इस्तेमाल पर रोक लगाई गई।
- स्कूल आधारभूत संरचना पर 12,335.90 करोड़ रुपये की कार्ययोजना प्रस्तावित।
- सुरक्षित विद्यालय भवन के साथ स्वच्छ शौचालय और पेयजल व्यवस्था पर जोर।
Rajasthan School Infrastructure Plan : राजस्थान में विद्यार्थियों की सुरक्षा को लेकर सरकार ने स्कूलों की आधारभूत सुविधाओं को लेकर सख्त रुख अपनाया है। मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास ने मंगलवार को शासन सचिवालय में हुई उच्चस्तरीय बैठक में स्पष्ट किया कि किसी भी जर्जर या असुरक्षित स्कूल भवन और कक्षा-कक्ष का इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए।
यह बैठक राजस्थान हाईकोर्ट की जयपुर पीठ के 11 अगस्त 2026 के निर्देशों की अनुपालना की समीक्षा के लिए आयोजित की गई थी। इसमें सरकारी और अन्य शिक्षण संस्थानों में भवन सुरक्षा, स्वच्छता, शौचालय और पेयजल जैसी बुनियादी सुविधाओं की विभागवार स्थिति पर चर्चा हुई।
मुख्य सचिव ने अधिकारियों से कहा कि विद्यार्थियों की सुरक्षा में किसी तरह की लापरवाही नहीं होनी चाहिए। स्कूल भवनों की मरम्मत, पुनर्निर्माण और सुरक्षा से जुड़े कामों की लगातार निगरानी की जाए और जहां जरूरत हो, वहां समयबद्ध तरीके से कार्रवाई पूरी की जाए।
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स्कूलों की आधारभूत संरचना को मजबूत करने के लिए वर्ष 2026-27 से 2030-31 तक कुल 12,335.90 करोड़ रुपये की कार्ययोजना प्रस्तावित की गई है। इसके तहत 3,587 नए विद्यालय भवन बनाने के लिए 2,487.75 करोड़ रुपये रखे जाने का प्रस्ताव है।
वहीं 22,589 स्कूलों में बड़े स्तर की मरम्मत के लिए 1,129.45 करोड़ रुपये, 83,783 जर्जर कक्षा-कक्षों की जगह नए कमरे बनाने के लिए 8,378.30 करोड़ रुपये और 13,616 खराब शौचालयों के पुनर्निर्माण के लिए 340.40 करोड़ रुपये प्रस्तावित किए गए हैं।
सरकार के अनुसार, मौजूदा वित्तीय वर्ष में ही स्कूलों की आधारभूत सुविधाओं को बेहतर बनाने पर करीब 3,000 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे।
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अतिरिक्त मुख्य सचिव, स्कूल शिक्षा राजेश यादव ने बैठक में बताया कि राज्य के 65,308 सरकारी स्कूलों का तकनीकी सर्वे कराया जा चुका है। इसमें 3,768 जर्जर स्कूल भवन और 83,783 ऐसे कक्षा-कक्ष चिन्हित हुए हैं जिन्हें असुरक्षित माना गया है।
विद्यार्थियों की सुरक्षा को देखते हुए इन जर्जर भवनों के उपयोग पर रोक लगा दी गई है। ऐसे स्कूलों में पढ़ाई प्रभावित न हो, इसके लिए सुरक्षित वैकल्पिक व्यवस्थाएं करने की बात भी कही गई है।
स्कूल भवनों की स्वतंत्र तकनीकी जांच के लिए आईआईटी जोधपुर और एमएनआईटी जयपुर के सिविल इंजीनियरिंग विशेषज्ञों की समिति बनाई गई है। आईआईटी जोधपुर की रिपोर्ट और सिफारिशें मिल चुकी हैं, जबकि एमएनआईटी जयपुर की रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है।
मुख्य सचिव ने कहा कि राज्य का कोई भी विद्यालय पेयजल जैसी बुनियादी सुविधा से वंचित नहीं रहना चाहिए। सभी स्कूलों में नल कनेक्शन या उपयुक्त वैकल्पिक व्यवस्था सुनिश्चित करने के साथ पानी की गुणवत्ता की समय-समय पर जांच कराने के निर्देश दिए गए हैं।
स्कूलों में पर्याप्त संख्या में साफ शौचालय, नियमित सफाई, रखरखाव और उचित जल निकासी व्यवस्था पर भी विशेष ध्यान देने को कहा गया है। यह व्यवस्था केवल सरकारी स्कूलों तक सीमित नहीं रहेगी। चिकित्सा, तकनीकी और उच्च शिक्षा संस्थानों के साथ निजी और मेडिकल कॉलेजों में भी पेयजल, शौचालय और स्वच्छता सुविधाओं की स्थिति सुधारने के निर्देश दिए गए हैं।



