डी-रेगुलेशन का असर, राजस्थान में निवेश को मिली रफ्तार

राजस्थान में डी-रेगुलेशन फेज-I के सुधारों का असर अब निवेश और कारोबार के आंकड़ों में दिखने लगा है। अप्रैल से जुलाई के बीच 2.37 लाख करोड़ रुपये के निवेश आशय मिले। राज निवेश पोर्टल पर आवेदन करीब तीन गुना बढ़े। भू-उपयोग परिवर्तन की निर्णय अवधि 810 दिन से घटकर 65 दिन रह गई, जिससे निवेशकों को बड़ी सीधी राहत मिली।

  • डी-रेगुलेशन फेज-I से निवेश प्रक्रियाएं हुईं आसान।
  • राज निवेश पोर्टल पर आवेदन करीब तीन गुना बढ़े।
  • भू-उपयोग परिवर्तन की अवधि 810 से घटकर 65 दिन हुई।

Investment in Rajasthan gains momentum : राजस्थान में कारोबार और निवेश से जुड़ी प्रक्रियाओं को आसान बनाने के लिए किए जा रहे डी-रेगुलेशन सुधार अब जमीन पर असर दिखाने लगे हैं। जुलाई की इम्पैक्ट असेसमेंट रिपोर्ट में निवेश, ऑनलाइन आवेदन और विभिन्न मंजूरियों के निस्तारण को लेकर सकारात्मक तस्वीर सामने आई है।

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अप्रैल से जुलाई 2026 के बीच प्रदेश को 2 लाख 36 हजार 771.68 करोड़ रुपये के निवेश आशय प्राप्त हुए। अकेले जुलाई में 93 हजार 315.46 करोड़ रुपये के निवेश आशय आए। इनमें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, आईटी एवं आईटीईएस क्षेत्र सबसे आगे रहा, जिसमें करीब 40 हजार 442 करोड़ रुपये के निवेश आशय मिले। शिक्षा क्षेत्र में 16 हजार 873 करोड़ और ऊर्जा क्षेत्र में 13 हजार 280 करोड़ रुपये के निवेश आशय दर्ज हुए।

मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास ने बताया कि सरकार का फोकस कारोबार से जुड़े नियमों और अनुपालन की जटिलताओं को कम करने के साथ निवेश स्वीकृतियों को तेज करने पर है। इन बदलावों का उद्देश्य राजस्थान को निवेश के लिए अधिक सुविधाजनक और प्रतिस्पर्धी गंतव्य बनाना है।

राज निवेश पोर्टल पर भी गतिविधियां तेजी से बढ़ी हैं। अप्रैल से जुलाई के दौरान 40,692 आवेदन प्राप्त हुए, जिनमें 21,899 को मंजूरी दी गई। सिर्फ जुलाई में 10,675 आवेदन आए। पोर्टल पर उपलब्ध ऑनलाइन सेवाओं की संख्या भी 181 से बढ़कर 190 हो गई है। ‘नो योर अप्रूवल्स’, एआई चैटबॉट, लैंड बैंक, सार्वजनिक डैशबोर्ड और शिकायत निगरानी जैसी सुविधाओं से निवेशकों को जरूरी जानकारी एक ही मंच पर मिल रही है।

व्यावसायिक सेवाओं के निस्तारण में लगने वाला समय भी घटा है। ई-तुलामान सेवाओं का औसत समय 12 से घटकर 7 दिन हो गया। जेवीवीएनएल के स्थायी बिजली कनेक्शन में यह अवधि 10 से 5 दिन और एवीवीएनएल में 9 से 4 दिन रह गई। पर्यटन इकाई अनुमोदन का समय भी 16 से घटकर 10 दिन हुआ है। वहीं कारखाना लाइसेंस का स्वतः नवीनीकरण अब वास्तविक समय में किया जा रहा है।

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जिला स्तर पर जयपुर सबसे आगे रहा। अप्रैल से जुलाई के बीच यहां 4,026 स्वीकृतियां जारी हुईं। जोधपुर में 1,560 और अजमेर में 1,071 स्वीकृतियां दी गईं। जुलाई में सीकर, टोंक, झुंझुनूं और हनुमानगढ़ में भी स्वीकृतियों में महीने-दर-महीने बढ़ोतरी देखने को मिली।

डी-रेगुलेशन का सबसे बड़ा असर शहरी विकास से जुड़ी प्रक्रियाओं में नजर आया है। उदयपुर, बीकानेर और कोटा विकास प्राधिकरणों के नमूना मामलों में भू-उपयोग परिवर्तन का औसत निर्णय समय 810 दिन से घटकर सिर्फ 65 दिन रह गया। यानी प्रक्रिया में करीब 92 प्रतिशत की कमी आई है।

एमएसएमई के लिए नियम 90-ए के तहत भू-उपयोग परिवर्तन की समयसीमा 45 दिन से घटाकर 30 कार्य दिवस कर दी गई है। देरी होने पर डीम्ड अप्रूवल का प्रावधान भी जोड़ा गया है। पात्र परियोजनाओं में भवन मानचित्र स्वीकृति, जिसमें पहले 60 से 120 दिन तक लगते थे, अब करीब 10 से 15 दिन में पूरी की जा रही है।

फायर सेफ्टी और श्रम अनुपालन में भी बदलाव किए गए हैं। पात्र औद्योगिक और चिकित्सा संस्थानों के फायर एनओसी की वैधता अब जोखिम के आधार पर दो से पांच वर्ष तक कर दी गई है। कुछ इकाइयों के लिए तृतीय-पक्ष निरीक्षण की सुविधा भी उपलब्ध कराई गई है।

श्रम क्षेत्र में महिलाओं को सुरक्षा और कल्याण संबंधी निर्धारित व्यवस्थाओं के साथ दुकानों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों में रात्रि पाली में काम करने की अनुमति दी गई है। एकमुश्त पंजीकरण, 24 घंटे में ऑनलाइन मंजूरी और 10 तक श्रमिकों वाले प्रतिष्ठानों को पंजीकरण से छूट जैसे कदमों ने अनुपालन का बोझ कम किया है।

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सरकार के मुताबिक, ये सुधार विकसित राजस्थान@2047 और विकसित भारत@2047 के विजन के अनुरूप प्रदेश में निवेश का माहौल मजबूत करने की दिशा में आगे बढ़ाए जा रहे हैं।

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