राजस्थान के 10 जिलों में लम्पी वायरस की दस्तक, घर-घर पहुंचकर जांच रही टीम
राजस्थान में लम्पी स्किन डिजीज के खिलाफ अभियान जारी है। पूर्वी हिस्से के दस जिलों में संक्रमण मिलने के बाद पशुपालन विभाग ने निगरानी और उपचार तेज किया है। पशु परिचर घर-घर पहुंचकर पशुओं की जानकारी जुटा रहे हैं। प्रभावित पशुओं को क्वारेंटाइन कर उपचार दिया जा रहा है, जबकि पशुपालकों को बचाव के लिए जागरूक किया जा रहा है।
- लम्पी स्किन डिजीज को लेकर पूर्वी राजस्थान के 10 जिलों में निगरानी बढ़ाई गई।
- घर-घर अभियान के तहत पशु परिचर बीमार पशुओं की जानकारी जुटा रहे हैं।
- पशुपालकों से संक्रमित पशुओं को अलग रखने और स्वच्छता का ध्यान रखने की अपील।
Lumpy virus reaches 10 districts of Rajasthan : राजस्थान में गौवंश में फैलने वाली लम्पी स्किन डिजीज को लेकर पशुपालन विभाग ने निगरानी और रोकथाम का अभियान तेज कर दिया है। पूर्वी राजस्थान के 10 जिलों में संक्रमण सामने आने के बाद विभाग की टीमें लगातार फील्ड में सक्रिय हैं। बड़े स्तर पर टीकाकरण और समय पर की गई कार्रवाई से स्थिति फिलहाल नियंत्रण में बताई जा रही है, लेकिन विभाग किसी तरह की ढिलाई के मूड में नहीं है।
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पशुपालन विभाग के निदेशक डॉ. सुरेश चंद मीना के मुताबिक, प्रभावित इलाकों में संक्रमित पशुओं की पहचान और उपचार पर लगातार नजर रखी जा रही है। साथ ही कोशिश है कि संक्रमण उन जिलों तक न पहुंचे, जहां अभी इसका असर नहीं है।
क्वारेंटाइन सेंटर में संक्रमित पशुओं का इलाज
विभाग ने प्रभावित जिलों में क्वारेंटाइन सेंटर बनाए हैं। यहां संक्रमित गौवंश को दूसरे पशुओं से अलग रखकर उपचार दिया जा रहा है। विभाग का मानना है कि संक्रमित पशुओं को अलग रखने से बीमारी के फैलाव को रोकने में मदद मिल रही है और उपचार के बाद मामलों में कमी भी देखी जा रही है।
डॉ. मीना ने बताया कि हाल के दिनों में डीग और भरतपुर में कुछ नए मामले सामने आए हैं। इनके अलावा फिलहाल अन्य स्थानों से नए मामलों की जानकारी नहीं मिली है। इसके बावजूद विभाग की टीमें गांवों में लगातार निगरानी कर रही हैं।
पशु परिचर घर-घर पहुंचकर जुटा रहे जानकारी
लम्पी के खिलाफ अभियान में पशु परिचरों और विभागीय टीमों की भूमिका अहम है। टीमें गांव-गांव पहुंचकर पशुपालकों से संपर्क कर रही हैं और पशुओं में बीमारी से जुड़े लक्षणों की जानकारी ले रही हैं। इसके साथ ही जरूरत के अनुसार उपचार और जागरूकता का काम भी किया जा रहा है।
विभाग का कहना है कि बीमारी पर नियंत्रण के लिए केवल सरकारी निगरानी पर्याप्त नहीं है। पशुपालकों की सतर्कता भी उतनी ही जरूरी है। शुरुआती लक्षणों की समय पर पहचान होने पर संक्रमित पशु को अलग करके उपचार शुरू किया जा सकता है।
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गांठ या बुखार दिखे तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें
पशुपालन विभाग ने पशुपालकों से अपील की है कि अगर किसी पशु के शरीर पर गांठ, बुखार, सुस्ती या त्वचा पर असामान्य लक्षण नजर आएं तो तुरंत नजदीकी पशु चिकित्सा केंद्र से संपर्क करें। संक्रमित पशु को स्वस्थ पशुओं के साथ रखने से बचना चाहिए।
डॉ. मीना के अनुसार, लम्पी स्किन डिजीज के लिए कोई एक निश्चित उपचार नहीं है। संक्रमित पशु में दिखाई देने वाले लक्षणों के आधार पर सहायक और आवश्यक उपचार दिया जाता है। ऐसे में बीमारी की शुरुआत में ही पशु चिकित्सक से सलाह लेना बेहद जरूरी है।
साफ-सफाई और कीट नियंत्रण पर जोर
विभाग ने पशुपालकों को पशुओं के आसपास स्वच्छता बनाए रखने की सलाह दी है। संक्रमित पशुओं को खुले में या दूसरे पशुओं के बीच रखने से बचने को कहा गया है। साथ ही मक्खी और मच्छर जैसे वाहक कीटों की रोकथाम के लिए नियमित सफाई, दवा के छिड़काव और फॉगिंग पर जोर दिया गया है।
पशुओं को पर्याप्त साफ पानी, पौष्टिक आहार और आराम देना भी देखभाल का अहम हिस्सा है। विभाग का मानना है कि समय पर पहचान, संक्रमित पशु को अलग रखना, चिकित्सकीय उपचार और स्वच्छता जैसे कदम बीमारी के प्रसार को रोकने में प्रभावी साबित हो सकते हैं।
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पशुपालन विभाग की टीमें फिलहाल प्रभावित जिलों के साथ-साथ आसपास के क्षेत्रों पर भी नजर बनाए हुए हैं। उद्देश्य यही है कि संक्रमण को सीमित रखा जाए और बीमार पशुओं को जल्द उपचार देकर स्वस्थ किया जा सके।



