एक्शन में चिकित्सा मंत्री… स्वाइन फ्लू और मौसमी बीमारियों को लेकर दिए सख्त निर्देश
राजस्थान में बारिश के साथ बढ़ने वाली मौसमी बीमारियों को लेकर स्वास्थ्य विभाग ने निगरानी तेज करने के निर्देश दिए हैं। चिकित्सा मंत्री गजेन्द्र सिंह खींवसर ने डेंगू, मलेरिया, चिकनगुनिया, स्क्रबटाइफस और स्वाइन फ्लू की रोकथाम की समीक्षा की। हाई रिस्क क्षेत्रों में टीमें सक्रिय रखने, जांच-दवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करने और मरीजों के भार के अनुसार स्टाफ तैनात करने पर जोर दिया।
- स्वाइन फ्लू की रोकथाम के लिए हाई रिस्क क्षेत्रों में सघन निगरानी के निर्देश।
- अस्पतालों में ओपीडी भार के अनुसार चिकित्सक और स्टाफ तैनात करने पर जोर।
- मौसमी बीमारियों की जांच, दवाइयों और जरूरी उपकरणों की उपलब्धता सुनिश्चित होगी।
Strict instructions issued regarding swine flu and seasonal diseases : बारिश के मौसम में मौसमी बीमारियों की बढ़ती आशंका को देखते हुए राजस्थान स्वास्थ्य विभाग ने निगरानी और रोकथाम की गतिविधियों को तेज करने के निर्देश दिए हैं। चिकित्सा एवं स्वास्थ्य मंत्री गजेन्द्र सिंह खींवसर ने मंगलवार को स्वास्थ्य भवन में समीक्षा बैठक कर डेंगू, मलेरिया, चिकनगुनिया, स्क्रबटाइफस और स्वाइन फ्लू सहित अन्य बीमारियों की स्थिति पर अधिकारियों से फीडबैक लिया।
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मंत्री ने विशेष रूप से स्वाइन फ्लू को लेकर सतर्कता बढ़ाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि संवेदनशील और हाई रिस्क क्षेत्रों में टीमें बनाकर नियमित निगरानी की जाए तथा बीमारी की पहचान, जांच और उपचार की सुविधाओं में किसी तरह की कमी नहीं रहनी चाहिए। सभी संयुक्त निदेशकों और मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारियों को प्रो-एक्टिव तरीके से काम करने के निर्देश दिए गए।
बैठक में संभागवार अधिकारियों से मौसमी बीमारियों की स्थिति और स्वास्थ्य सेवाओं की तैयारियों की जानकारी ली गई। खींवसर ने चिकित्सा संस्थानों में आवश्यक दवाइयों और जांच सुविधाओं की उपलब्धता के साथ उपकरणों की कार्यशील स्थिति की भी समीक्षा की।
उन्होंने कहा कि प्रदेश में संचालित फर्स्ट रेफरल यूनिट और ट्रॉमा सेंटर में आवश्यक तीन चिकित्सकों की टीम यानी ट्रायो पूरी होनी चाहिए। मरीजों की संख्या को देखते हुए अस्पतालों में डॉक्टरों और अन्य स्वास्थ्यकर्मियों की तैनाती की जाए, ताकि ओपीडी और उपचार सेवाओं पर अनावश्यक दबाव न बने।
स्वास्थ्य संस्थानों में जांच सुविधाओं को मजबूत करने पर भी बैठक में जोर दिया गया। मंत्री ने बताया कि अधिकांश उच्च चिकित्सा संस्थानों में सीटी और एमआरआई जांच की सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है। जिन संस्थानों में अभी ये सेवाएं नहीं हैं, वहां इन्हें पीपीपी मॉडल के जरिए शुरू करने की दिशा में काम किया जाएगा।
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मानव संसाधन की व्यवस्था को लेकर भी मंत्री ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि किसी भी स्थिति में एक पद पर एक से अधिक व्यक्ति की तैनाती नहीं होनी चाहिए। जिन चिकित्सा संस्थानों में निर्धारित मानकों के अनुसार मानव संसाधन उपलब्ध नहीं है, उनकी जानकारी संयुक्त निदेशकों को अगले तीन दिनों में उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए।
बैठक में जिलों में हब एंड स्पोक मॉडल के तहत उपलब्ध कराई जा रही जांच सेवाओं की भी समीक्षा हुई। अधिकारियों से इन सेवाओं की स्थिति और प्रभावी संचालन को लेकर फीडबैक मांगा गया।
जैसलमेर में आयोजित होने वाले रामदेवरा मेले को लेकर भी स्वास्थ्य सेवाओं की तैयारी पर चर्चा हुई। मंत्री ने मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी की मांग के अनुसार मेले में आवश्यक चिकित्सा स्टाफ और अन्य सुविधाएं उपलब्ध कराने के निर्देश दिए, ताकि बड़ी संख्या में आने वाले श्रद्धालुओं को समय पर स्वास्थ्य सेवाएं मिल सकें।
समीक्षा बैठक में विभिन्न स्वास्थ्य योजनाओं और अभियानों की प्रगति भी देखी गई। संबंधित नोडल अधिकारियों ने रेफरल प्रबंधन में सेतु ऐप, टीबी मुक्त भारत अभियान, एचपीवी टीकाकरण, शहरी आयुष्मान आरोग्य मंदिर, पीसीटीएस प्रसव वॉच कार्यक्रम और आयुष्मान भारत डिजिटल हेल्थ मिशन को लेकर प्रस्तुतियां दीं।
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बैठक में अतिरिक्त मिशन निदेशक एनएचएम डॉ. टी. शुभमंगला, निदेशक आरसीएच डॉ. मधु रतेश्वर, अतिरिक्त निदेशक अस्पताल प्रशासन डॉ. नरोत्तम शर्मा सहित स्वास्थ्य विभाग के अन्य अधिकारी मौजूद रहे।



