लम्पी रोग पर सरकार अलर्ट, 87% से ज्यादा टीकाकरण
राजस्थान में लम्पी स्किन डिजीज की स्थिति फिलहाल नियंत्रण में है। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने अधिकारियों को प्रभावित क्षेत्रों में निगरानी बढ़ाने, टीकाकरण अभियान तेज करने और संक्रमित पशुओं को अलग रखने के निर्देश दिए। प्रदेश में अब तक 10,403 संक्रमित पशु मिले हैं, जिनमें 6,905 स्वस्थ हो चुके हैं। पशुओं में 87 प्रतिशत से अधिक टीकाकरण भी पूरा किया जा चुका है।
- लम्पी रोग की स्थिति प्रदेश में नियंत्रण में बताई गई।
- 87 प्रतिशत से अधिक टीकाकरण प्रदेशभर में पूरा हुआ।
- लम्पी रोग को लेकर प्रभावित इलाकों में जागरूकता और निगरानी बढ़ेगी।
Government on alert regarding Lumpy disease : राजस्थान में लम्पी स्किन डिजीज को लेकर राज्य सरकार ने निगरानी और रोकथाम के प्रयास तेज करने के निर्देश दिए हैं। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने गुरुवार को मुख्यमंत्री निवास पर आयोजित उच्चस्तरीय बैठक में कहा कि प्रदेश में संक्रमण की स्थिति फिलहाल नियंत्रण में है। उन्होंने पशुपालकों से घबराने के बजाय सावधानी बरतने और रोग के लक्षण दिखाई देने पर समय पर जरूरी कदम उठाने की अपील की।

मुख्यमंत्री ने कहा कि लम्पी रोग से बचाव में सतर्कता सबसे अहम है। प्रभावित इलाकों में पशुपालकों को बीमारी के लक्षण, बचाव और उपचार से जुड़ी जानकारी आसानी से मिले, इसके लिए व्यापक जन-जागरूकता अभियान चलाया जाए। उनका कहना था कि सही जानकारी और समय पर सावधानी से पशुओं को संक्रमण से बचाने में मदद मिल सकती है।

बैठक में अधिकारियों ने बताया कि राजस्थान में अब तक लम्पी रोग से 10,403 पशु संक्रमित पाए गए हैं। इनमें से 6,905 पशु रिकवर हो चुके हैं और स्वस्थ होने वाले पशुओं की संख्या लगातार बढ़ रही है। प्रदेश में अब तक 87 प्रतिशत से अधिक पशुओं का टीकाकरण किया जा चुका है।
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मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि प्रदेश में टीकाकरण की रफ्तार और बढ़ाई जाए। प्रभावित क्षेत्रों में रोग प्रतिरोधक दवाइयों की पर्याप्त उपलब्धता बनाए रखने के साथ गोशालाओं और अन्य स्थानों पर संक्रमित पशुओं को अलग रखने की व्यवस्था भी सुनिश्चित की जाए। उन्होंने मैदानी स्तर पर लगातार निगरानी और विभागीय मॉनिटरिंग बनाए रखने पर जोर दिया।
राज्य सरकार के अनुसार, लम्पी रोग की रोकथाम के लिए पहले से कई स्तरों पर व्यवस्थाएं की गई हैं। राज्य और जिला स्तर पर नियंत्रण कक्ष बनाए गए हैं, जबकि जिला एवं ब्लॉक स्तर पर रैपिड रेस्पांस टीमें गठित की गई हैं। पशुपालकों को साइपरमेथ्रिन और सोडियम हाइपोक्लोराइट जैसी आवश्यक सामग्री भी उपलब्ध कराई जा रही है।
मुख्यमंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि अभी लम्पी रोग के मामले पूरे राजस्थान में नहीं हैं, बल्कि मुख्य रूप से पूर्वी क्षेत्र के कुछ जिलों से सामने आए हैं। उन्होंने गोवंश संरक्षण और संवर्धन के लिए किए जा रहे प्रयासों को आगे भी प्रभावी ढंग से जारी रखने के निर्देश दिए।
बैठक में मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से कहा कि पशुपालकों को बीमारी से जुड़ी जरूरी सावधानियां अपनाने के लिए लगातार जागरूक किया जाए। उन्होंने कहा कि किसी भी संक्रमण की स्थिति में समय पर पहचान, उपचार और संक्रमित पशुओं को अलग रखना बेहद जरूरी है। सरकार का प्रयास है कि बीमारी को फैलने से पहले ही प्रभावी ढंग से नियंत्रित किया जा सके।
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बैठक में पशुपालन मंत्री जोराराम कुमावत वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए जुड़े। मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास, अतिरिक्त मुख्य सचिव अखिल अरोड़ा, प्रमुख शासन सचिव वित्त वैभव गालरिया, प्रमुख शासन सचिव पशुपालन एवं गोपालन विकास सीतारामजी भाले सहित कई वरिष्ठ अधिकारी बैठक में मौजूद रहे।



