लंपी को लेकर सरकार अलर्ट, गौवंश की निगरानी बढ़ी
राजस्थान में लंपी रोग के मामलों को लेकर पशुपालन विभाग पूरी तरह सतर्क है। पशुपालन मंत्री जोराराम कुमावत ने कहा कि प्रदेश में स्थिति नियंत्रण में है और प्रभावित गौवंश का तत्काल उपचार किया जा रहा है। भरतपुर और डीग में अब तक 16 गौवंश की मौत हुई है, जबकि करीब 4500 गौवंश का इलाज जारी है। टीकाकरण और जागरूकता अभियान भी तेज किए गए हैं।
- लंपी रोग को लेकर राजस्थान सरकार ने निगरानी बढ़ाई।
- गौवंश का टीकाकरण और प्रभावित पशुओं का उपचार जारी।
- पशुपालन विभाग ने दवाओं और आइसोलेशन की व्यवस्था की।
Government on alert over Lumpy disease, surveillance of cattle stepped up : राजस्थान में लंपी रोग को लेकर पशुपालन विभाग ने मोर्चा संभाल लिया है। पशुपालन, गोपालन एवं देवस्थान मंत्री जोराराम कुमावत ने कहा कि प्रदेश में बीमारी की स्थिति नियंत्रण में है और पशुपालकों को घबराने की जरूरत नहीं है। जहां भी लंपी के मामले सामने आ रहे हैं, वहां विभाग की टीमें तत्काल जरूरी कदम उठा रही हैं।
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मंत्री ने बताया कि इस वर्ष पूर्वी राजस्थान के कुछ हिस्सों में लंपी रोग के मामले अधिक सामने आए हैं। भरतपुर और डीग जिलों में अब तक लंपी के कारण 16 गौवंश की मृत्यु हुई है। वहीं, अधिकांश संक्रमित पशुओं को उपचार के बाद रोगमुक्त किया जा चुका है और करीब 4500 गौवंश का इलाज अभी जारी है। विभाग का प्रयास है कि शेष पशुओं को भी जल्द स्वस्थ किया जाए।
जोराराम कुमावत ने कहा कि प्रभावित गौवंश को दूसरे पशुओं से अलग रखने यानी आइसोलेशन की व्यवस्था की गई है। विभाग के पास आवश्यक दवाएं पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध हैं और पशु चिकित्सकों के माध्यम से उपचार कराया जा रहा है। उन्होंने कहा कि बीमारी के किसी भी मामले में तत्काल कार्रवाई सुनिश्चित की जा रही है, ताकि संक्रमण को आगे फैलने से रोका जा सके।
लंपी रोग की रोकथाम के लिए सरकार ने टीकाकरण और जागरूकता को प्रमुख हथियार बनाया है। मंत्री के अनुसार वित्तीय वर्ष 2026-27 में अब तक करीब 90 प्रतिशत गौवंश का टीकाकरण किया जा चुका है। इसके साथ ही ग्रामीण क्षेत्रों में जागरूकता अभियान चलाकर पशुपालकों को बीमारी के लक्षण, बचाव और समय पर उपचार के बारे में जानकारी दी जा रही है।
पशुपालन मंत्री ने कहा कि लंपी एक संक्रामक बीमारी है, जिसका असर मुख्य रूप से गौवंश पर पड़ता है। इसके चलते पशुपालकों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है। राजस्थान पहले भी इस बीमारी का प्रभाव देख चुका है, इसलिए इस बार विभाग ने सर्वेक्षण, बीमारी की पहचान और नियंत्रण के लिए पहले से तैयारियां कर रखी हैं।
उन्होंने पिछले वर्ष चलाए गए टीकाकरण अभियान का भी उल्लेख किया। कुमावत के अनुसार पिछले साल दो महीने तक चले विशेष अभियान में प्रदेश के करीब 95 प्रतिशत गौवंश का टीकाकरण किया गया था। इसके परिणामस्वरूप बीमारी को समय रहते नियंत्रित करने में मदद मिली और गौवंश की हानि काफी कम रही।
मंत्री ने विभागीय तैयारियों की सराहना करते हुए कहा कि सरकार पशुओं के कल्याण के लिए लगातार काम कर रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन और मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में पशुधन की सुरक्षा को प्राथमिकता दी जा रही है। उन्होंने अधिकारियों को बीमारी की स्थिति पर लगातार नजर रखने और जरूरत के अनुसार तत्काल कदम उठाने के निर्देश दिए।
कुमावत ने पशुपालकों से भी अपील की कि वे अपने गौवंश की नियमित निगरानी करें। यदि किसी पशु में लंपी के लक्षण दिखाई दें तो उसे तुरंत अन्य पशुओं से अलग करें और नजदीकी पशु चिकित्सा केंद्र या पशु चिकित्सक से संपर्क करें। उन्होंने प्रभावित क्षेत्रों से नए पशुओं को लाने-ले जाने से भी बचने की सलाह दी, ताकि संक्रमण फैलने की आशंका कम हो सके।
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सरकार का फोकस फिलहाल बीमारी के प्रसार को रोकने के साथ-साथ प्रभावित पशुओं को समय पर उपचार उपलब्ध कराने पर है। विभागीय निगरानी, टीकाकरण और ग्रामीण स्तर पर जागरूकता के जरिए लंपी रोग पर नियंत्रण बनाए रखने की कोशिश की जा रही है।



