लंपी रोग पर सरकार सख्त, रोकथाम के लिए बढ़ी निगरानी
मुख्यमंत्री के निर्देश पर राजस्थान में लंपी स्किन डिजीज की रोकथाम और नियंत्रण को लेकर शुक्रवार को उच्चस्तरीय बैठक हुई। प्रमुख शासन सचिव विकास सीतारामजी भाले ने प्रभावित जिलों में सर्वेक्षण, टीकाकरण और उपचार व्यवस्था की समीक्षा की। उन्होंने घर-घर पशु सर्वे, जागरूकता अभियान, निगरानी और विभागों के बीच बेहतर समन्वय के साथ समयबद्ध कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
- लंपी रोग की रोकथाम के लिए सरकार ने बढ़ाई निगरानी
- प्रभावित जिलों में घर-घर बीमार पशुओं का होगा सर्वे
- पशु मेले और हाट पर रोक, नियंत्रण कक्ष और त्वरित प्रतिक्रिया टीमें गठित
Government gets tough on Lumpy disease : राजस्थान में लंपी स्किन डिजीज की रोकथाम और नियंत्रण को लेकर राज्य सरकार ने निगरानी और कार्रवाई तेज कर दी है। मुख्यमंत्री के निर्देश पर शुक्रवार को पशुपालन विभाग के प्रमुख शासन सचिव विकास सीतारामजी भाले की अध्यक्षता में समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक पशुधन भवन स्थित राजस्थान राज्य पशुधन विकास बोर्ड के सभागार में हुई।
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बैठक में प्रदेश में लंपी रोग की मौजूदा स्थिति के साथ प्रभावित इलाकों में चल रहे सर्वेक्षण, टीकाकरण और उपचार व्यवस्था की विस्तार से समीक्षा की गई। प्रमुख शासन सचिव ने अधिकारियों से कहा कि बीमारी की रोकथाम के लिए जरूरी सभी कदम प्रभावी तरीके से और तय समय सीमा में पूरे किए जाएं।
उन्होंने खासतौर पर उन जिलों पर ध्यान देने के निर्देश दिए, जहां अभी तक लंपी रोग के मामले सामने नहीं आए हैं। अधिकारियों को ऐसी प्रभावी व्यवस्था विकसित करने को कहा गया, जिससे संक्रमण इन क्षेत्रों तक न पहुंच सके। इसके साथ ही जिलों में पशुपालकों को बीमारी के लक्षण, बचाव और उपचार के तरीकों की जानकारी देने के लिए व्यापक जागरूकता अभियान चलाने पर जोर दिया गया।
प्रमुख शासन सचिव भाले ने चिकित्साधिकारियों को घर-घर जाकर बीमार पशुओं का सर्वेक्षण करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि जिला स्तर पर लगातार निगरानी रखी जाए और विभागीय अधिकारी अन्य संबंधित विभागों के साथ समन्वय बनाकर काम करें, ताकि किसी भी संभावित संक्रमण की सूचना मिलने पर तुरंत कार्रवाई की जा सके।
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बैठक में पशुपालन विभाग के अधिकारियों ने प्रदेश में लंपी रोग की स्थिति और अब तक किए गए नियंत्रणात्मक उपायों की जानकारी दी। पशुपालन निदेशक डॉ. सुरेश चंद मीना ने बताया कि वर्तमान में प्रदेश के 10 जिले लंपी रोग से प्रभावित हैं। इनमें अधिकतर जिले पूर्वी राजस्थान के हैं।
उन्होंने बताया कि सक्रिय गौवंशों की संख्या में लगातार कमी आ रही है, हालांकि अब तक बीमारी के कारण 16 पशुओं की मौत हुई है। संक्रमण की स्थिति पर विभाग लगातार नजर बनाए हुए है और प्रभावित क्षेत्रों में आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं।
अधिकारियों के अनुसार संक्रमण को फैलने से रोकने के लिए पशुओं के आवागमन को नियंत्रित किया जा रहा है। इसके तहत पशु मेलों और पशु हाट पर प्रतिबंध लगाया गया है। साथ ही राज्य और जिला स्तर पर नियंत्रण कक्ष स्थापित किए गए हैं। किसी भी स्थिति में तेजी से प्रतिक्रिया देने के लिए त्वरित प्रतिक्रिया टीमों का भी गठन किया गया है।
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विभाग की ओर से पशुपालकों को जागरूक करने के लिए विभिन्न माध्यमों से प्रचार-प्रसार सामग्री का इस्तेमाल किया जा रहा है। सरकार का फोकस प्रभावित क्षेत्रों में उपचार और निगरानी के साथ-साथ गैर-प्रभावित जिलों को संक्रमण से सुरक्षित रखने पर भी है।



