मानसिक स्वास्थ्य पर बड़ा कदम, नशा मुक्ति केंद्रों का होगा रजिस्ट्रेशन

राजस्थान में मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने की दिशा में सरकार ने कई अहम फैसलों पर चर्चा की है। नशा मुक्ति केंद्रों के पंजीकरण की प्रक्रिया शुरू होगी, जबकि संभाग स्तर पर मानसिक स्वास्थ्य रिव्यू बोर्ड बनाने का प्रस्ताव भी सामने आया। टेली-मानस हेल्पलाइन पर अब तक 1.11 लाख से अधिक कॉल आ चुकी हैं और 10 अक्टूबर तक जागरूकता अभियान चलेगा।

  • मानसिक स्वास्थ्य सेवाएं मजबूत करने पर सरकार का फोकस
  • नशा मुक्ति केंद्रों के पंजीकरण की प्रक्रिया होगी शुरू
  • टेली-मानस हेल्पलाइन 14416 पर 1.11 लाख से ज्यादा कॉल

A major step for mental health : राजस्थान में मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर सरकार ने निगरानी, उपचार और जागरूकता व्यवस्था को और मजबूत करने की तैयारी शुरू कर दी है। राज्य मानसिक स्वास्थ्य प्राधिकरण (एसएमएचए) की दूसरी समीक्षा बैठक में नशा मुक्ति केंद्रों के पंजीकरण से लेकर मानसिक स्वास्थ्य संस्थानों की निगरानी और आत्महत्या रोकथाम जैसे मुद्दों पर विस्तार से चर्चा हुई।

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स्वास्थ्य भवन में हुई बैठक की अध्यक्षता प्रमुख शासन सचिव चिकित्सा एवं स्वास्थ्य तथा एसएमएचए की अध्यक्ष गायत्री राठौड़ ने की। उन्होंने कहा कि मानसिक स्वास्थ्य को सामान्य स्वास्थ्य सेवाओं का अहम हिस्सा मानते हुए जरूरतमंद लोगों तक समय पर परामर्श, उपचार और सहयोग पहुंचाना जरूरी है। इसके लिए स्वास्थ्य विभाग के साथ विशेषज्ञों, शैक्षणिक संस्थानों और स्वयंसेवी संगठनों को साथ लेकर काम करने पर जोर दिया गया।

बैठक में संभाग स्तर पर डिस्ट्रिक्ट मेंटल हेल्थ रिव्यू बोर्ड्स (डीएमएचआरबी) के गठन के प्रस्ताव पर भी विचार हुआ। प्रस्ताव के अनुसार इन बोर्ड्स में न्यायिक अधिकारी, जिला प्रशासन के प्रतिनिधि, मनोचिकित्सक और अन्य चिकित्सा विशेषज्ञों के साथ मानसिक बीमारी से प्रभावित लोगों, उनके देखभालकर्ताओं या एनजीओ प्रतिनिधियों को शामिल किया जा सकता है। इससे मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं की निगरानी और मामलों के समाधान की व्यवस्था को बेहतर बनाने में मदद मिलेगी।

नशा मुक्ति केंद्रों को लेकर भी अहम पहल की तैयारी है। एसएमएचए के तहत प्रदेश के नशा मुक्ति केंद्रों के पंजीकरण की प्रक्रिया शुरू करने के प्रस्ताव पर चर्चा की गई। केंद्रीय मानसिक स्वास्थ्य प्राधिकरण की अधिसूचना के तहत इन केंद्रों को मानसिक स्वास्थ्य संस्थानों की श्रेणी में शामिल किया गया है।

इसके साथ ही मानसिक स्वास्थ्य संस्थानों के प्रोविजनल रजिस्ट्रेशन के नवीनीकरण और तय मानकों को पूरा करने वाले संस्थानों के स्थायी पंजीकरण की प्रक्रिया आगे बढ़ाने पर भी चर्चा हुई। अधिकारियों के मुताबिक एसएमएचए की पहली बैठक के बाद प्रदेश में 29 मानसिक स्वास्थ्य संस्थानों का प्रोविजनल रजिस्ट्रेशन पूरा हो चुका है। संस्थानों की निगरानी के लिए जिला स्तर पर निरीक्षण समितियां गठित करने को लेकर सभी जिला कलेक्टरों को पत्र भी भेजे जा चुके हैं।

मानसिक स्वास्थ्य सहायता के लिए संचालित टेली-मानस हेल्पलाइन 14416 का इस्तेमाल भी लगातार हो रहा है। प्रदेश में अब तक इस हेल्पलाइन पर 1,11,377 कॉल दर्ज की गई हैं। इनमें 95,305 कॉल लोगों ने खुद कीं, जबकि 16,072 कॉल टेली-मानस की ओर से शुरू की गईं।

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बच्चों और युवाओं के मानसिक स्वास्थ्य पर भी विशेष ध्यान देने की योजना है। राज-ममता और मनदर्पण कार्यक्रमों के जरिए बच्चों, किशोरों और युवाओं में तनाव प्रबंधन, मानसिक स्वास्थ्य और भावनात्मक मजबूती को लेकर काम किया जा रहा है। वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालयों में हर महीने कम से कम एक बार मानसिक स्वास्थ्य और तनाव से जुड़े काउंसलिंग एवं जागरूकता सत्र आयोजित करने की योजना है।

इन कार्यक्रमों और मेंटल वेल-बिइंग मॉड्यूल को लेकर 9 सितंबर को राज्य स्तरीय तथा 10 से 20 सितंबर के बीच जिला स्तरीय प्रशिक्षण और ओरिएंटेशन कार्यक्रम आयोजित करने पर भी चर्चा हुई।

विश्व आत्महत्या रोकथाम दिवस से विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस तक विशेष अभियान चलाया जाएगा। 10 सितंबर से 10 अक्टूबर के बीच होने वाले इस अभियान में रैलियां, कार्यशालाएं, क्विज, पोस्टर और निबंध प्रतियोगिताओं के साथ सोशल मीडिया गतिविधियां भी आयोजित की जाएंगी। बैठक में मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं के लिए जरूरी मानव संसाधन की उपलब्धता की भी समीक्षा की गई।

राठौड़ ने कहा कि मानसिक स्वास्थ्य व्यवस्था को प्रभावी बनाने के लिए सिर्फ उपचार ही नहीं, बल्कि प्रशिक्षित मानव संसाधन, तकनीकी सहयोग, संस्थागत निगरानी और जागरूकता पर एक साथ काम करना होगा। वरिष्ठ मनोरोग विशेषज्ञ डॉ. शिव गौतम ने भी मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य को समान महत्व देने की जरूरत बताई। उन्होंने कहा कि मानसिक बीमारियों को लेकर मौजूद झिझक और सामाजिक भ्रांतियों को कम करना जरूरी है, खासकर युवाओं में जागरूकता बढ़ाने पर ध्यान दिया जाना चाहिए।

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बैठक में चिकित्सा शिक्षा आयुक्त बाबूलाल गोयल, निदेशक जनस्वास्थ्य डॉ. रवि प्रकाश शर्मा, ओएसडी एनएचएम संतोष गोयल, स्टेट नोडल अधिकारी एनएमएचपी डॉ. सांवरमल स्वामी सहित मनोरोग विशेषज्ञ, विभिन्न विभागों के अधिकारी और संबंधित सदस्य मौजूद रहे।

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