स्कूलों में पढ़ाई पर सरकार का बड़ा फोकस
राजस्थान सरकार ने स्कूलों में शिक्षण व्यवस्था को मजबूत करने और विद्यार्थियों की पढ़ाई बिना रुकावट जारी रखने के लिए भर्ती के साथ वैकल्पिक व्यवस्था पर भी जोर दिया है। शिक्षा विभाग में 48,465 नियुक्तियां हो चुकी हैं, जबकि 59,587 पदों पर भर्ती प्रक्रिया चल रही है। रिक्त पदों पर विद्या संबल योजना से विषय विशेषज्ञों को गेस्ट फैकल्टी लगाया जाएगा।
- स्कूल शिक्षा में 48,465 नियुक्तियां पूरी हुईं।
- शिक्षण व्यवस्था के लिए 59,587 पदों पर भर्ती जारी।
- विद्या संबल योजना से रिक्त पदों पर गेस्ट फैकल्टी लगेगी।
Government’s major focus on education in schools : राजस्थान में सरकारी स्कूलों में विद्यार्थियों की पढ़ाई को बेहतर बनाने और शिक्षण व्यवस्था को मजबूत करने के लिए राज्य सरकार भर्ती प्रक्रिया के साथ वैकल्पिक इंतजाम भी कर रही है। सरकार का जोर इस बात पर है कि शिक्षकों की नियुक्ति में लगने वाले समय का असर बच्चों की पढ़ाई पर न पड़े।
शिक्षा विभाग में अब तक 48,465 नियुक्तियां दी जा चुकी हैं। वहीं विभाग से जुड़े 59,587 पदों पर भर्ती प्रक्रिया आगे बढ़ रही है। राज्य सरकार के मुताबिक, प्रदेश में रोजगार सृजन की दिशा में अब तक कुल 1 लाख 89 हजार से अधिक पदों पर नियुक्तियां प्रदान की गई हैं।
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भर्ती प्रक्रिया पूरी होने में समय लगने वाले रिक्त पदों को देखते हुए विद्या संबल योजना का सहारा लिया जाएगा। इसके तहत जरूरत के आधार पर विषय विशेषज्ञों और अनुभवी लोगों को गेस्ट फैकल्टी के रूप में लगाया जाएगा। इससे स्कूलों में जरूरी विषयों की पढ़ाई प्रभावित होने से बचाने की कोशिश की जा रही है।
मुख्य सचिव की ओर से जारी नए दिशा-निर्देशों के तहत जिला कलेक्टरों और जिला शिक्षा अधिकारियों को इस व्यवस्था के लिए अधिकृत किया गया है। स्थानीय स्तर पर जरूरत का आकलन कर शिक्षण व्यवस्था को सुचारू बनाए रखने के लिए आवश्यक कदम उठाए जा सकेंगे।
सरकार का मानना है कि नियमित भर्ती प्रक्रिया पूरी होने तक स्कूलों में शिक्षकों की उपलब्धता बनाए रखना जरूरी है। खासकर ऐसे विषयों में जहां शिक्षक पद खाली हैं, वहां अनुभवी गेस्ट फैकल्टी की नियुक्ति से विद्यार्थियों को लगातार पढ़ाई का अवसर मिल सकेगा।
स्कूलों के बुनियादी ढांचे पर भी खर्च
शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के साथ सरकार ने स्कूलों के आधारभूत ढांचे पर भी खर्च बढ़ाया है। वर्तमान सरकार के करीब ढाई साल के कार्यकाल में स्कूलों की मरम्मत, नए भवनों और कक्षा-कक्षों के निर्माण पर 2,723 करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं।
तुलना करें तो पिछली सरकार के पांच साल के कार्यकाल में इन कामों पर 2,227 करोड़ रुपये खर्च किए गए थे। सरकार का दावा है कि स्कूल भवनों और कक्षाओं से जुड़े कार्यों में बढ़ा निवेश विद्यार्थियों के लिए बेहतर शैक्षणिक वातावरण तैयार करने में मदद करेगा।
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राज्य सरकार की योजना में एक तरफ शिक्षकों की नियमित भर्ती को आगे बढ़ाना और दूसरी ओर तब तक वैकल्पिक शिक्षण व्यवस्था बनाए रखना शामिल है। इससे सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले विद्यार्थियों की पढ़ाई लगातार जारी रखने और शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने पर फोकस किया जा रहा है।



