राजस्थान में 20 खानों को दिसंबर तक शुरू करने की तैयारी

राजस्थान में माइनिंग सेक्टर को गति देने के लिए खान विभाग ने दिसंबर तक मेजर मिनरल की करीब 20 ऑक्शन खानों को परिचालन में लाने का लक्ष्य तय किया है। सरकार को उम्मीद है कि इससे राज्य में निवेश और रोजगार के नए अवसर बढ़ेंगे, राजस्व में इजाफा होगा और अवैध खनन पर भी प्रभावी नियंत्रण स्थापित करने में मदद मिलेगी।

  • 20 खानों को दिसंबर तक परिचालन में लाने का लक्ष्य।
  • माइनिंग सेक्टर में निवेश और रोजगार बढ़ाने पर जोर।
  • राजस्थान में ऑक्शन खानों को शुरू करने का नया रिकॉर्ड बनाने की तैयारी।

Preparations underway to start 20 mines in Rajasthan by December : राजस्थान में माइनिंग सेक्टर को और रफ्तार देने की तैयारी शुरू हो गई है। खान विभाग ने दिसंबर तक मेजर मिनरल की करीब 20 ऑक्शन खानों को परिचालन में लाने का लक्ष्य रखा है। विभाग का मानना है कि खदानों के संचालन में आने से राज्य में आर्थिक गतिविधियां बढ़ेंगी और रोजगार के साथ सरकार के राजस्व में भी इजाफा होगा।

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अतिरिक्त मुख्य सचिव खान, भूविज्ञान एवं पेट्रोलियम अपर्णा अरोरा ने सोमवार को सचिवालय के मंथन कक्ष में संबंधित विभागों और संस्थाओं के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बैठक में यह दिशा तय की। उन्होंने कहा कि राजस्थान मेजर मिनरल ब्लॉकों की नीलामी के मामले में देश में आगे रहा है, अब नीलाम किए गए ब्लॉकों को जमीन पर उतारकर उनका संचालन शुरू करना विभाग की प्राथमिकता है।

अरोरा ने कहा कि ऑक्शन खानों को समय पर चालू करने से केवल निवेश और रोजगार ही नहीं बढ़ेंगे, बल्कि राज्य में अवैध खनन पर अंकुश लगाने में भी मदद मिलेगी। सरकार का फोकस खनन क्षेत्र को व्यवस्थित और अधिक प्रभावी बनाने पर है। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा भी राजस्थान को माइनिंग सेक्टर में अग्रणी राज्य बनाने पर लगातार जोर देते रहे हैं।

बैठक में पर्यावरण स्वीकृति की प्रक्रिया को तेज करने पर भी विशेष चर्चा हुई। अरोरा ने निर्देश दिए कि पर्यावरण स्वीकृति सहित अन्य जरूरी अनुमतियों के लिए आवेदन से जुड़ी स्पष्ट चेकलिस्ट जारी की जाए। इससे आवेदकों को पहले से पता रहेगा कि किन दस्तावेजों और औपचारिकताओं की जरूरत है और आवेदन में कमियां रहने से प्रक्रिया के दौरान होने वाली देरी को घटाया जा सकेगा।

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उन्होंने स्टेकहोल्डर्स से भी अपील की कि किसी परियोजना के लिए अनुमति मांगते समय सभी जरूरी दस्तावेज और औपचारिकताएं पहले ही पूरी कर ली जाएं। विभाग का मानना है कि आवेदन के स्तर पर तैयारी बेहतर होने से आपत्तियों के समाधान में लगने वाला अतिरिक्त समय और संसाधन बचाया जा सकता है।

अरोरा ने मेजर और माइनर मिनरल के तैयार ब्लॉकों और प्लॉटों की नीलामी तय समयसीमा के अनुसार करने के निर्देश भी दिए। साथ ही विभागीय मॉनिटरिंग सिस्टम को मजबूत बनाने पर जोर दिया गया। बैठक में माइनर मिनरल के नीलाम किए गए ब्लॉकों को भी जल्द परिचालन में लाने के लिए आवश्यक कदम उठाने को कहा गया।

पर्यावरण स्वीकृति प्रक्रिया को आसान बनाने के लिए सीया की ओर से भी नई व्यवस्था तैयार की जा रही है। सीया की सदस्य सचिव शैलजा देवल ने बताया कि जल्द ही एसएमएस और वाट्सऐप अलर्ट सिस्टम विकसित किया जाएगा। इसके जरिए पर्यावरण स्वीकृति के लिए आवेदन करने वालों को समय पर जरूरी जानकारी और अलर्ट मिल सकेंगे।

उन्होंने बताया कि ईसी यानी पर्यावरण स्वीकृति की प्रक्रिया को अधिक सरल और सहज बनाने की दिशा में काम जारी है। डिजिटल अलर्ट व्यवस्था लागू होने के बाद आवेदकों को प्रक्रिया के विभिन्न चरणों की जानकारी समय पर मिल सकेगी।

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बैठक में विशिष्ट सचिव खान नम्रता वृष्णि, खान निदेशक एमपी मीणा, अतिरिक्त निदेशक भूविज्ञान आलोक प्रकाश जैन सहित खान विभाग, सीया, चारों सेक, पीडीकोर और संबंधित विभागों के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।

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