राजस्थान टेक्सटाइल को ग्लोबल मार्केट से जोड़ने की तैयारी

राजस्थान सरकार ने टेक्सटाइल और अपैरल सेक्टर को वैश्विक बाजार से जोड़ने, निर्यात बढ़ाने और नए निवेश को आकर्षित करने पर जोर दिया है। जयपुर में हुई राउंड टेबल बैठक में उद्योग प्रतिनिधियों ने मूल्य संवर्धन, ब्रांडिंग, नवाचार, तकनीकी टेक्सटाइल, डिजाइन सहयोग और फ्री ट्रेड एग्रीमेंट्स के संभावित लाभों पर सुझाव दिए। सरकार ने उद्योग की जरूरतों के अनुसार नीतिगत सहयोग का भरोसा भी दिया।

  • टेक्सटाइल सेक्टर के निर्यात और उत्पादन क्षमता पर फोकस
  • ग्लोबल मार्केट में राजस्थान की हिस्सेदारी बढ़ाने पर चर्चा
  • नए निवेश और नवाचार को बढ़ावा देने के लिए सुझाव

Preparations underway to connect Rajasthan’s textile sector to the global market : राजस्थान के टेक्सटाइल और अपैरल उद्योग को अंतरराष्ट्रीय बाजार में मजबूत पहचान दिलाने की दिशा में राज्य सरकार ने उद्योग जगत के साथ मंथन शुरू किया है। उद्योग भवन, जयपुर में अतिरिक्त मुख्य सचिव उद्योग एवं वाणिज्य शिखर अग्रवाल की अध्यक्षता में राउंड टेबल के तीन विशेष सत्र आयोजित किए गए। इनमें उद्यमियों, डिजाइन हाउस, डिजाइन स्टूडियो, टेक्निकल टेक्सटाइल कंपनियों और विभिन्न औद्योगिक संगठनों के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया।

राजस्थान टेक्सटाइल को ग्लोबल मार्केट से जोड़ने की तैयारी
Image Source : Via DIPR

बैठक में सबसे ज्यादा जोर निर्यात बढ़ाने, उत्पादन क्षमता मजबूत करने और वैश्विक बाजारों तक राजस्थान के उत्पादों की पहुंच बढ़ाने पर रहा। उद्योग प्रतिनिधियों ने कच्चे माल के आयात पर निर्भरता कम करने और राज्य में ही उत्पादन तथा वैल्यू एडिशन को बढ़ावा देने के उपाय भी सुझाए।

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अतिरिक्त मुख्य सचिव ने बताया कि राजस्थान का कुल वस्तु निर्यात एक लाख करोड़ रुपये से अधिक है। इसमें टेक्सटाइल और रेडीमेड गारमेंट्स की हिस्सेदारी करीब 12.9 प्रतिशत है। उन्होंने कहा कि राज्य में इस क्षेत्र को गति देने के लिए राजस्थान टेक्सटाइल एवं अपैरल नीति-2025 और राजस्थान एक्सपोर्ट प्रमोशन पॉलिसी-2024 लागू की गई हैं। इसके साथ ही एमएसएमई पॉलिसी-2024, वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट पॉलिसी-2024 और विश्वकर्मा युवा उद्यमी प्रोत्साहन पॉलिसी के जरिए भी कारोबारियों को सहयोग दिया जा रहा है।

बैठक में वैश्विक मांग के अनुरूप नए उत्पाद तैयार करने और राजस्थान के पारंपरिक हुनर को आधुनिक बाजार से जोड़ने पर भी चर्चा हुई। प्रतिभागियों ने नवाचार, ब्रांडिंग, बाजार विस्तार और डिजाइन संस्थानों तथा उद्योगों के बीच बेहतर तालमेल की जरूरत बताई।

उद्योग प्रतिनिधियों ने हाल में लागू हुए फ्री ट्रेड एग्रीमेंट्स से टेक्सटाइल क्षेत्र को मिलने वाले संभावित अवसरों पर भी चर्चा की। इसके अलावा पारंपरिक कारीगरों की क्षमता बढ़ाने, नए निवेश को आकर्षित करने और घरेलू तथा विदेशी बाजारों तक पहुंच आसान बनाने से जुड़े सुझाव रखे गए।

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सरकार ने उद्योग की जरूरतों को समझने और जरूरी हस्तक्षेप तय करने के लिए टेक्सटाइल टास्क फोर्स का गठन किया है। इसका उद्देश्य राजस्थान के टेक्सटाइल उद्योग को मजबूत करने के साथ भारत के वर्ष 2030 तक 100 बिलियन अमेरिकी डॉलर के टेक्सटाइल निर्यात लक्ष्य में राज्य की प्रभावी भागीदारी सुनिश्चित करना है।

शिखर अग्रवाल ने कहा कि राज्य सरकार उद्योगों की आवश्यकताओं के अनुरूप सुविधाएं उपलब्ध कराने और अनुकूल नीतिगत माहौल तैयार करने के लिए प्रतिबद्ध है। राउंड टेबल में मिले सुझावों की समीक्षा कर उन्हें नीति और सरकारी कार्यक्रमों के जरिए आगे बढ़ाने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएंगे।

बैठक में राजस्थान टेक्सटाइल मिल्स एसोसिएशन के चेयरमैन डॉ. एस.एन. मोडानी, बायर एजेंट एसोसिएशन से मनोज राणा, डिजाइनर आशना वासवानी, हिम्मत सिंह, अनुज मूंदड़ा, फैशन डिजाइनिंग काउंसिल ऑफ राजस्थान से पुनीत खत्री, मैनमेड एंड टेक्निकल टेक्सटाइल्स एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल के चेयरमैन एवं मेटेक्सिल के एमडी शालीन तोषनीवाल और बीएमडी प्राइवेट लिमिटेड के प्रेसिडेंट संजय शर्मा सहित अन्य प्रतिनिधियों ने विचार रखे।

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यह पहल राजस्थान के टेक्सटाइल और अपैरल उद्योग को उत्पादन से आगे बढ़ाकर ब्रांडिंग, वैल्यू एडिशन और वैश्विक बाजार से जोड़ने की दिशा में केंद्रित है।

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