चंबल में खनन माफियाओं की अब खैर नहीं! ड्रोन और AI कैमरों से होगी 24×7 निगरानी
राष्ट्रीय चंबल अभयारण्य में अवैध बालू-बजरी खनन रोकने के लिए राजस्थान सरकार ने निगरानी और सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत करने का फैसला किया है। 40 संवेदनशील स्थलों पर एआई कैमरे, ड्रोन और अन्य तकनीकी संसाधनों से निगरानी होगी। इन स्थानों पर पांच-पांच सशस्त्र होमगार्ड भी तैनात किए जाएंगे। सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों की अनुपालना की समीक्षा लगातार जारी है।
- चंबल अभयारण्य में खनन माफियाओं का नेटवर्क तोड़ने के लिए चंबल के 40 अति-संवेदनशील इलाकों में तैनात होंगे सशस्त्र गार्ड।
- अब रात के अंधेरे में भी ड्रोन और AI कैमरों से होगी 24×7 निगरानी, सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर राजस्थान सरकार का सख्त एक्शन।
- अवैध खनन रोकने के लिए मुख्य सचिव की अध्यक्षता में उच्चस्तरीय समिति गठित, आम जनता भी गुप्त रूप से कर सकेगी शिकायत।
The mining mafia in Chambal is in for trouble now : राष्ट्रीय चंबल अभयारण्य में अवैध बालू-बजरी खनन पर रोक लगाने और वन्यजीवों के संरक्षण के लिए राजस्थान सरकार ने निगरानी तंत्र को और मजबूत करने की तैयारी की है। अभयारण्य के 40 अत्यधिक संवेदनशील स्थलों पर हाईटेक सर्विलांस सिस्टम के साथ मानवीय सुरक्षा व्यवस्था भी बढ़ाई जाएगी।

इस संबंध में बुधवार को शासन सचिवालय में मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास की अध्यक्षता में समीक्षा बैठक हुई। बैठक में सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों और केंद्रीय अधिकार प्राप्त समिति (CEC) की सिफारिशों की अनुपालना के साथ आगामी सुनवाई की तैयारियों पर विभागवार चर्चा की गई।
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मुख्य सचिव ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि न्यायालय के निर्देशों की पालना में किसी स्तर पर लापरवाही नहीं होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने 9 अगस्त को विस्तृत शपथ-पत्र प्रस्तुत कर दिया है और अधिकांश महत्वपूर्ण बिंदुओं पर कार्रवाई पूरी की जा चुकी है।
40 संवेदनशील स्थानों पर मजबूत होगा सुरक्षा घेरा
चंबल अभयारण्य के धौलपुर, सवाई माधोपुर, बूंदी, करौली और कोटा जिलों में 40 अत्यधिक संवेदनशील स्थान चिह्नित किए गए हैं। इन जगहों पर फ्रंटलाइन वनकर्मियों की सुरक्षा और अवैध गतिविधियों पर तत्काल कार्रवाई के लिए पांच-पांच सशस्त्र होमगार्ड जवानों की तैनाती हेतु बजट स्वीकृत और आवंटित किया जा चुका है।
इसके साथ ही संबंधित जिला कलेक्टरों को नोडल अधिकारी की जिम्मेदारी दी गई है। उपखंड स्तर पर राजस्व, पुलिस, वन और खनन विभाग की संयुक्त टीमें सप्ताह में दो बार आकस्मिक निरीक्षण कर रही हैं। इन निरीक्षणों में जीपीएस लोकेशन और बॉडी-वॉर्न कैमरों का इस्तेमाल किया जा रहा है।
एआई कैमरे और ड्रोन रखेंगे नजर
अवैध खनन और खनन सामग्री के अवैध परिवहन पर चौबीसों घंटे नजर रखने के लिए हाई-मास्ट टावर, ऑप्टिकल फाइबर तथा एआई और थर्मल नाइट-विजन तकनीक से लैस कैमरे लगाए जा रहे हैं। वहीं नदी के बदलते स्वरूप और मानसून के बाद बनने वाले नए रास्तों की पहचान के लिए जिला कलेक्टरों की निगरानी में ड्रोन सर्वे भी कराया जा रहा है।
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सरकार का मानना है कि तकनीकी निगरानी के साथ मौके पर मौजूद सुरक्षा बलों की व्यवस्था से अवैध खनन और परिवहन पर प्रभावी नियंत्रण किया जा सकेगा।
कर्मचारियों को कानूनी सुरक्षा, ज्वाइंट SOP लागू
अभयारण्य में तैनात वन अधिकारियों और कर्मचारियों को कार्यस्थल पर आवश्यक वैधानिक सुरक्षा देने के लिए भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS), 2023 के तहत अधिसूचना 13 अगस्त को जारी की जा चुकी है। इसके अलावा मध्य प्रदेश के मुरैना मॉडल की तर्ज पर जिला स्तर पर विभिन्न विभागों के बीच समन्वय के लिए संयुक्त SOP भी लागू की गई है।
सरकार अब इस व्यवस्था को जमीनी स्तर पर और प्रभावी बनाने पर जोर दे रही है, ताकि अवैध खनन से जुड़े मामलों में विभागों के बीच कार्रवाई और सूचना साझा करने में देरी न हो।
एम-सैंड और ऑनलाइन शिकायत व्यवस्था पर भी काम
अवैध बालू खनन पर दीर्घकालिक रोक के लिए वैध विकल्पों को बढ़ावा देने की योजना भी बनाई जा रही है। इसके तहत एम-सैंड यूनिट स्थापित करने की व्यवहार्यता रिपोर्ट तैयार की गई है। वहीं अभयारण्य सीमा से जुड़े राजस्व क्षेत्रों को वन क्षेत्र के रूप में अधिसूचित करने की संभावनाओं की जांच के लिए जिला स्तरीय समितियां गठित की गई हैं।
आम लोगों की भागीदारी बढ़ाने के लिए ऑनलाइन पब्लिक डैशबोर्ड और राजस्थान संपर्क (181) पोर्टल पर क्यूआर कोड आधारित शिकायत प्रणाली को अंतिम रूप दिया जा रहा है। प्रस्तावित व्यवस्था में लोग जियो-टैग्ड फोटो और वीडियो के साथ शिकायत दर्ज करा सकेंगे।
राज्य स्तरीय निगरानी समिति करेगी समीक्षा
सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों की समयबद्ध अनुपालना और विभिन्न विभागों के बीच बेहतर तालमेल के लिए मुख्य सचिव की अध्यक्षता में राज्य स्तरीय समन्वय एवं निगरानी समिति गठित की गई है। इसमें खान, वन, गृह, राजस्व, वित्त, परिवहन और आईटी विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ संबंधित पांच जिलों के जिला कलेक्टरों को भी शामिल किया गया है। मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक समिति के सदस्य सचिव होंगे।
यह समिति अवैध खनन के खिलाफ कार्रवाई, सर्विलांस सिस्टम, प्रवर्तन गतिविधियों और मासिक प्रगति रिपोर्ट की समीक्षा करेगी तथा आवश्यकता के अनुसार नीतिगत दिशा-निर्देश जारी करेगी।
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मुख्य सचिव ने अधिकारियों को 31 अगस्त तक की कार्रवाई का अद्यतन डाटा, जब्त वाहनों एवं मशीनरी का विवरण और विशेष लोक अभियोजकों की नियुक्ति की स्थिति जल्द उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि चंबल अभयारण्य की जैव विविधता, घड़ियालों और अन्य जलीय जीवों के प्राकृतिक आवास की सुरक्षा के मामले में सरकार की नीति जीरो टॉलरेंस की है।
बैठक में खान, वन एवं पर्यावरण, गृह, वित्त, राजस्व, परिवहन, कानून, कार्मिक तथा सूचना एवं प्रौद्योगिकी विभाग के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। संबंधित जिलों के कलेक्टर, पुलिस अधीक्षक, मुख्य वन संरक्षक और उप वन संरक्षक वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए बैठक से जुड़े।



