साइबर ठगी के शिकार लोगों को तुरंत मिले राहत : मुख्य सचिव बड़ा आदेश, हॉटस्पॉट इलाकों पर कसेगा शिकंजा

जयपुर में साइबर अपराध, डिजिटल न्याय व्यवस्था और नए आपराधिक कानूनों की समीक्षा बैठक में मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास ने पीड़ितों को जल्द राहत देने के निर्देश दिए। उन्होंने साइबर फ्रॉड में रोकी गई रकम वापस कराने, हॉटस्पॉट पर फोकस बढ़ाने और पुलिस, बैंक व अन्य एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय के साथ तकनीकी व्यवस्थाओं को मजबूत करने पर जोर दिया।

  • साइबर ठगी में पीड़ितों की रोकी गई रकम जल्द लौटाने के निर्देश।
  • साइबर अपराध हॉटस्पॉट पर फोकस्ड कार्रवाई के लिए अलग समीक्षा बैठक होगी।
  • डिजिटल न्याय व्यवस्था और नए आपराधिक कानूनों के प्रभावी अमल पर जोर।

Victims of cyber fraud should get immediate relief : साइबर ठगी के बढ़ते मामलों के बीच राजस्थान सरकार ने पीड़ितों को जल्द राहत दिलाने और साइबर अपराध पर कार्रवाई मजबूत करने के निर्देश दिए हैं। मंगलवार को शासन सचिवालय में मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास ने इंटर-ऑपरेबल क्रिमिनल जस्टिस सिस्टम (ICJS), साइबर सुरक्षा और नए आपराधिक कानूनों के क्रियान्वयन की समीक्षा की।

साइबर ठगी के शिकार लोगों को तुरंत मिले राहत : मुख्य सचिव बड़ा आदेश, हॉटस्पॉट इलाकों पर कसेगा शिकंजा
Image Source : Via Dipr

मुख्य सचिव ने कहा कि साइबर फ्रॉड के मामलों में पुलिस और बैंकों के बीच बेहतर तालमेल जरूरी है, ताकि पीड़ितों की रोकी गई राशि जल्द वापस कराई जा सके। उन्होंने मनी रेस्टोरेशन मॉड्यूल का प्रभावी इस्तेमाल करने और ग्रिवांस रिड्रेसल मॉड्यूल पर आने वाली शिकायतों का तय समय में निस्तारण करने के निर्देश दिए।

यह भी पढ़ें ; मणिपाल यूनिवर्सिटी में इंटरनेशनल इनोवेशन चैलेंज शुरू, मुकाबले में इटली की टीम भी दिखा रही दम

साइबर अपराध के संवेदनशील क्षेत्रों पर विशेष ध्यान देने के निर्देश भी दिए गए। मुख्य सचिव ने साइबर क्राइम हॉटस्पॉट को चिन्हित कर फोकस्ड कार्रवाई करने को कहा। इसके लिए पुलिस, बैंक और संबंधित हितधारकों के साथ जल्द अलग समीक्षा बैठक आयोजित करने के निर्देश दिए गए। उन्होंने सहयोग पोर्टल और समन्वय पोर्टल के बेहतर उपयोग के साथ कानून प्रवर्तन एजेंसियों की साइबर क्षमता बढ़ाने पर भी जोर दिया।

बैठक में आपराधिक न्याय प्रणाली से जुड़े डिजिटल प्लेटफॉर्म को आपस में और बेहतर तरीके से जोड़ने पर चर्चा हुई। मुख्य सचिव ने ई-समन की इलेक्ट्रॉनिक तामील को प्रभावी बनाने तथा फॉरेंसिक, जेल, अभियोजन और मेडिको-लीगल व्यवस्थाओं के डिजिटल इंटीग्रेशन को मजबूत करने के निर्देश दिए।

राजस्थान को नए आपराधिक कानूनों से जुड़े राष्ट्रीय डैशबोर्ड पर ICJS इंटीग्रेशन के मामले में 10 में से 10 अंक मिले हैं। प्रदेश के सभी 1,040 पुलिस थानों में राजनेट कनेक्टिविटी भी उपलब्ध कराई जा चुकी है। मुख्य सचिव ने चिकित्सा, पुलिस और अभियोजन विभागों में डिजिटल प्रणालियों के अधिक प्रभावी इस्तेमाल की जरूरत बताई।

अतिरिक्त मुख्य सचिव गृह भास्कर आत्माराम सावंत ने बताया कि प्रदेश में मेडलीपीआर (मेडिको-लीगल एग्जामिनेशन एंड पोस्ट-मॉर्टम रिपोर्टिंग) को सीसीटीएनएस से जोड़ा जा चुका है। इसके अलावा सभी जिलों को ई-प्रॉसिक्यूशन व्यवस्था पर ऑनबोर्ड किया गया है।

यह भी पढ़ें ; जोजरी नदी प्रदूषण पर प्रशासन सख्त : सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों पर एक्शन प्लान तैयार करने के कड़े निर्देश

नए आपराधिक कानूनों की समीक्षा करते हुए मुख्य सचिव ने कहा कि राजस्थान में इस दिशा में प्रगति हुई है, लेकिन प्रदर्शन को और बेहतर बनाने की गुंजाइश बनी हुई है। उन्होंने संबंधित विभागों और संस्थाओं को मिलकर काम करने तथा कानूनों की मूल भावना और उद्देश्य के अनुरूप प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित करने को कहा।

ई-साक्ष्य और फॉरेंसिक जांच को लेकर भी बैठक में खास निर्देश दिए गए। गंभीर अपराधों की जांच में वैज्ञानिक और फॉरेंसिक साक्ष्यों के अधिकतम उपयोग पर जोर दिया गया। पुलिस महानिदेशक राजीव शर्मा ने बताया कि एफएसएल निरीक्षण की दर में सुधार हुआ है। जांच अधिकारियों का ई-साक्ष्य ऐप पर शत-प्रतिशत पंजीकरण और प्रशिक्षण पूरा हो चुका है तथा इसके लिए 8,500 डिवाइस उपलब्ध कराए गए हैं।

पुलिस के अनुसार, 31 अगस्त तक 4 लाख 57 हजार से अधिक एफआईआर में ई-साक्ष्य तैयार किए जा चुके हैं। वहीं 7 लाख 39 हजार से अधिक साक्ष्य आईडी बनाई और अपलोड की गई हैं। 1 जुलाई 2024 से 31 अगस्त 2026 तक नए आपराधिक कानूनों के तहत प्रदेश में 4,12,203 मामले दर्ज हुए। इनमें से 3,71,244 मामलों का चालान या अंतिम रिपोर्ट के जरिए निस्तारण हो चुका है, जो कुल मामलों का 90.10 प्रतिशत है।

यह भी पढ़ें ; महिलाओं के लिए सुनहरा मौका : पॉलिटेक्निक और डिग्री कोर्सेज में डायरेक्ट एडमिशन पाने का आखिरी चांस

बैठक में प्रमुख शासन सचिव विधि एवं विधिक कार्य राघवेन्द्र कछवाल, संयुक्त शासन सचिव गृह अंजलि राजोरिया सहित कारागार, चिकित्सा एवं स्वास्थ्य, अभियोजन, पुलिस अपराध शाखा, राजस्थान उच्च न्यायालय, सूचना प्रौद्योगिकी, एससीआरबी, राज्य विधि विज्ञान प्रयोगशाला, एनआईसी और अन्य संबंधित विभागों के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।

Related Articles

Back to top button