मातृ मृत्यु पर सरकार सख्त, हाई रिस्क गर्भवतियों पर रहेगी खास नजर

राजस्थान सरकार ने मातृ मृत्यु के प्रत्येक मामले की गंभीर समीक्षा करने और हाई रिस्क गर्भवतियों की लगातार निगरानी सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। चिकित्सा एवं स्वास्थ्य मंत्री गजेंद्र सिंह खींवसर ने कहा कि मातृ मृत्यु दर घटाने, सुरक्षित प्रसव बढ़ाने, समयबद्ध उपचार, रेफरल व्यवस्था और स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत बनाने के लिए विभाग लगातार प्रभावी कदम उठा रहा है।

  • मातृ मृत्यु के हर मामले की विस्तृत समीक्षा और जवाबदेही तय होगी।
  • हाई रिस्क गर्भवतियों की पहचान, निगरानी और समय पर उपचार पर विशेष जोर।
  • मातृ मृत्यु दर घटाने के लिए अस्पतालों में प्रोटोकॉल की सख्ती से पालना कराई जाएगी।

Special attention will be paid to high-risk pregnant women : राजस्थान सरकार ने मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं को और अधिक मजबूत बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। चिकित्सा एवं स्वास्थ्य मंत्री गजेंद्र सिंह खींवसर ने स्पष्ट किया कि प्रदेश में होने वाली प्रत्येक मातृ मृत्यु को गंभीरता से लिया जाएगा और हर मामले की गहन समीक्षा कर आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।

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उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि हाई रिस्क गर्भवती महिलाओं की समय रहते पहचान की जाए, उनकी नियमित मॉनिटरिंग हो और जरूरत पड़ने पर बिना देरी के विशेषज्ञ अस्पतालों में रेफर किया जाए। विभाग को यह भी सुनिश्चित करने के लिए कहा गया है कि सभी स्वास्थ्य संस्थानों में तय चिकित्सा प्रोटोकॉल का पूरी तरह पालन हो।

स्वास्थ्य मंत्री ने बताया कि मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में मातृ मृत्यु दर कम करने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। सैंपल रजिस्ट्रेशन सिस्टम (एसआरएस) 2022-24 के अनुसार राजस्थान में मातृ मृत्यु दर घटकर प्रति एक लाख जीवित जन्म पर 87 रह गई है। वहीं संस्थागत प्रसव का प्रतिशत बढ़कर 94.1 प्रतिशत पहुंच चुका है, जो राष्ट्रीय औसत से अधिक माना जा रहा है।

हाल ही में भीलवाड़ा और बांसवाड़ा में प्रसूताओं की मृत्यु के मामलों की निर्धारित प्रक्रिया के तहत जांच जारी है। प्रारंभिक जांच में चिकित्सकीय लापरवाही के स्पष्ट प्रमाण नहीं मिले हैं, लेकिन यदि किसी स्तर पर नियमों की अनदेखी या प्रोटोकॉल का उल्लंघन सामने आता है तो संबंधित अधिकारी एवं कर्मचारियों के खिलाफ नियमानुसार कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

खींवसर ने बताया कि सरकारी अस्पतालों में बड़ी संख्या में ऐसे मरीज भी पहुंचते हैं, जिन्हें निजी अस्पतालों से गंभीर अवस्था में रेफर किया जाता है। हाई ब्लड प्रेशर, गंभीर एनीमिया, अत्यधिक रक्तस्राव, हृदय रोग और अन्य जटिल गर्भावस्था से जुड़े मामलों का उपचार विशेषज्ञ चिकित्सकों की देखरेख में किया जाता है। सिजेरियन सहित सभी जटिल प्रसव निर्धारित चिकित्सा मानकों के अनुरूप किए जाते हैं, ताकि मां और नवजात दोनों सुरक्षित रहें।

उन्होंने कहा कि विभाग पहले ही सभी चिकित्सा संस्थानों को हाई रिस्क प्रेग्नेंसी की ट्रैकिंग, नियमित जांच, प्रभावी रेफरल सिस्टम और विशेषज्ञ उपचार सुनिश्चित करने के निर्देश दे चुका है। मातृ स्वास्थ्य एवं शिशु पोषण दिवस तथा प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान के तहत भी गर्भवती महिलाओं की विशेष जांच और देखभाल की जा रही है।

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स्वास्थ्य मंत्री ने बताया कि चिकित्सा विभाग लगातार अस्पतालों की आधारभूत सुविधाओं, आधुनिक उपकरणों, विशेषज्ञ डॉक्टरों, आवश्यक दवाओं और आपातकालीन सेवाओं को मजबूत कर रहा है। उन्होंने गर्भवती महिलाओं से नियमित प्रसव पूर्व जांच कराने और किसी भी स्वास्थ्य संबंधी परेशानी होने पर तुरंत सरकारी स्वास्थ्य केंद्र या अस्पताल से संपर्क करने की अपील भी की।

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