वस्त्र क्लस्टरों पर सख्ती, CETP सुधार को लेकर बड़ा फैसला
राजस्थान के प्रमुख वस्त्र क्लस्टरों में पर्यावरण नियमों की अनदेखी अब भारी पड़ सकती है। मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास ने CETP, ZLD और नदी प्रदूषण नियंत्रण की समीक्षा करते हुए सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का सख्ती से पालन करने के निर्देश दिए। बालोतरा, जसोल, पाली, सांगानेर और जोधपुर में उपचार संयंत्रों की क्षमता बढ़ाने, निगरानी मजबूत करने और डिफॉल्टरों पर समयबद्ध कार्रवाई पर जोर दिया गया।
- वस्त्र क्लस्टरों में पर्यावरण नियमों की पालना पर सख्ती बढ़ेगी।
- CETP और ZLD संयंत्रों को जल्द अपग्रेड करने पर जोर।
- नदी प्रदूषण रोकने के लिए निगरानी और कार्रवाई होगी।
Major decision regarding CETP upgrade : राजस्थान के प्रमुख वस्त्र औद्योगिक क्षेत्रों में प्रदूषण नियंत्रण को लेकर सरकार ने अब सख्त रुख अपनाने के संकेत दिए हैं। मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास ने शुक्रवार को शासन सचिवालय में बालोतरा, जसोल, पाली, सांगानेर और जोधपुर के टेक्सटाइल क्लस्टरों में पर्यावरणीय नियमों तथा कॉमन एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट (CETP) की स्थिति की समीक्षा की।

बैठक में साफ किया गया कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों की पालना में किसी तरह की ढिलाई नहीं बरती जाएगी। जोजरी, बांडी, लूनी और सांगानेर बेसिन में पर्यावरणीय नियमों को प्रभावी ढंग से लागू किया जा रहा है। नियमों के उल्लंघन पर अब केवल दीवानी कार्रवाई तक सीमित रहने के बजाय आपराधिक जिम्मेदारी भी तय की जा रही है। पिछले 35 दिनों में 2,000 से अधिक टेक्सटाइल MSME इकाइयों को सील किए जाने की जानकारी भी बैठक में दी गई।
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सरकार का फोकस केवल कार्रवाई तक सीमित नहीं है। नदियों में प्रदूषण कम करने के लिए रिवर बेल्ट के रेस्टोरेशन का ब्लूप्रिंट तैयार किया जाएगा। रिवर बेसिन अथॉरिटी के माध्यम से रेगुलेटरी जोन विकसित करने, ड्रेनेज व्यवस्था को दोबारा व्यवस्थित करने और नदियों से गाद हटाने जैसे काम प्रस्तावित हैं। इसके अलावा जल उपचार व्यवस्था को बेहतर बनाने में एआई आधारित टूल्स के इस्तेमाल पर भी विचार किया गया।
बैठक में केंद्रीय वस्त्र मंत्रालय की सचिव नीलम शमी राव वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए शामिल हुईं। उन्होंने भरोसा दिलाया कि प्रदूषण नियंत्रण से जुड़ी विभिन्न योजनाओं और परियोजनाओं में केंद्र सरकार की लंबित वित्तीय सहायता जल्द उपलब्ध कराने की कोशिश की जाएगी। उन्होंने राज्य को हर संभव सहयोग का आश्वासन भी दिया।
समीक्षा के दौरान प्रमुख टेक्सटाइल क्लस्टरों और CETP की मौजूदा स्थिति सामने रखी गई। बालोतरा में 18 MLD क्षमता वाला ZLD संयंत्र परियोजना 131.90 करोड़ रुपये की है, जिसमें केंद्र सरकार का 65.95 करोड़ रुपये का योगदान है। यह संयंत्र पिछले कुछ महीनों से RSPCB की ओर से बंद है।
जसोल में 2.5 MLD क्षमता के ZLD संयंत्र की परियोजना लागत 38.50 करोड़ रुपये है। इसमें केंद्र का हिस्सा 19.25 करोड़ रुपये है। फिलहाल प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने इसे 1.1 MLD क्षमता पर चलाने की अनुमति दी है।
पाली यूनिट-VI में 12 MLD क्षमता के ZLD संयंत्र की लागत 100 करोड़ रुपये है और केंद्र सरकार का योगदान 50 करोड़ रुपये है। वर्तमान में यह करीब 3 MLD क्षमता पर संचालित हो रहा है। वहीं नेक्स्टजेन टेक्सटाइल पार्क, पाली में 4 MLD की स्थापित क्षमता के मुकाबले संयंत्र 3 MLD पर चल रहा है। इसकी परियोजना लागत 129.42 करोड़ रुपये है, जिसमें केंद्र का अंशदान 64.71 करोड़ रुपये है।
सांगानेर, जयपुर में 12.3 MLD क्षमता वाले संयंत्र की परियोजना लागत 159 करोड़ रुपये है। इसमें केंद्र सरकार का योगदान 75 करोड़ रुपये है। फिलहाल यह संयंत्र केवल 1.5 MLD क्षमता पर आंशिक रूप से संचालित है।
जोधपुर में 306 टेक्सटाइल इकाइयों से वर्तमान में अपशिष्ट आवक शून्य बताई गई, क्योंकि उद्योग बंद हैं। यहां ZLD अपग्रेडेशन की समय-सीमा 31 दिसंबर 2027 निर्धारित की गई है। बैठक में नॉन-कम्प्लायंस की स्थिति में RIICO को CETP स्थापित करने की अनुमति देने के लिए केंद्र सरकार से आग्रह करने पर भी चर्चा हुई।
सरकार ने CETP को ZLD तकनीक में बदलने के लिए वित्तीय सहायता की योजनाएं भी लागू कर रखी हैं। CETP स्थापना या अपग्रेडेशन सहायता योजना के तहत प्रति MLD 18 करोड़ रुपये तक, अधिकतम 100 करोड़ रुपये की सीमा में, परियोजना लागत का 75 प्रतिशत तक सहयोग देने का प्रावधान है।
RIICO औद्योगिक क्षेत्रों में HAM मॉडल के तहत प्रति MLD 18 करोड़ रुपये तक, अधिकतम 150 करोड़ रुपये की सीमा में 80 प्रतिशत सहायता का प्रावधान है। शेष 20 प्रतिशत राशि संबंधित SPV द्वारा वहन की जाएगी। गैर-RIICO क्षेत्रों में भी HAM मॉडल के तहत 80 प्रतिशत तक वित्तीय सहायता का प्रावधान रखा गया है।
बैठक में आगे की रणनीति पर भी विस्तार से चर्चा हुई। केंद्र और राज्य के सहयोग से सभी CETP को जल्द से जल्द ZLD तकनीक में अपग्रेड करने, RIICO को अपने स्तर पर CETP स्थापित एवं संचालित करने के लिए नीतिगत दिशा-निर्देश तैयार करने और नियम तोड़ने वाले डिफॉल्टरों पर समयबद्ध कार्रवाई के साथ लगातार निगरानी रखने पर जोर दिया गया।
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मुख्य सचिव ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि पर्यावरण संरक्षण से जुड़े न्यायालय के आदेशों को कागजों तक सीमित न रखा जाए, बल्कि जमीन पर भी उनका प्रभाव दिखाई देना चाहिए। बैठक में खान एवं पेट्रोलियम विभाग की अतिरिक्त मुख्य सचिव एवं प्रदूषण नियंत्रण मंडल की अध्यक्ष अपर्णा अरोड़ा, उद्योग विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव एवं RIICO अध्यक्ष शिखर अग्रवाल, वन, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव आनंद कुमार, गृह विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव भास्कर आत्माराम सावंत सहित अन्य अधिकारी मौजूद रहे।



