राजस्थान बनाएगा नया ‘नारकोटिक्स कंट्रोल विजन’
राजस्थान में मादक पदार्थों की तस्करी और दुरुपयोग पर लगाम कसने के लिए सरकार ‘नारकोटिक्स कंट्रोल विजन 2026-29’ तैयार करेगी। मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास ने गुरुवार को इसकी तैयारियों की समीक्षा की। विजन में ड्रग तस्करी पर कार्रवाई, खुफिया तंत्र, सिंथेटिक ड्रग नियंत्रण, नशा मुक्ति, नुकसान कम करने और विभागीय समन्वय जैसे पहलुओं को शामिल किया जाएगा।
- नारकोटिक्स कंट्रोल विजन 2026-29 के लिए तैयारियां तेज।
- राजस्थान अफीम, डोडा-पोस्त और एमडी जब्ती में देश में पहले स्थान पर।
- ड्रग मामलों में अब तक 5,626 प्रकरण दर्ज किए गए।
Rajasthan to formulate a new ‘Narcotics Control Vision’ : राजस्थान सरकार ने मादक पदार्थों की तस्करी और नशे के बढ़ते खतरे से निपटने के लिए अगले तीन वर्षों की रणनीति तैयार करने की दिशा में कदम बढ़ा दिया है। इसके तहत प्रदेश में ‘नारकोटिक्स कंट्रोल विजन 2026-29’ तैयार किया जाएगा। मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास की अध्यक्षता में गुरुवार को सचिवालय में हुई बैठक में विजन की रूपरेखा और अब तक की कार्रवाई की समीक्षा की गई।

बैठक में मुख्य सचिव ने संबंधित विभागों को मिलकर काम करने और मादक पदार्थों के खिलाफ कार्रवाई को और प्रभावी बनाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि तस्करी रोकने के साथ-साथ खुफिया सूचनाओं को मजबूत करना, वैज्ञानिक जांच, नशे की मांग कम करना और प्रभावित लोगों के पुनर्वास जैसे पहलुओं पर भी समान रूप से ध्यान देना जरूरी है।
चार प्रमुख स्तंभों पर केंद्रित होगा विजन
‘नारकोटिक्स कंट्रोल विजन 2026-29’ को चार प्रमुख स्तंभों के आधार पर तैयार किया जाएगा। इसमें प्रवर्तन, आसूचना एवं अभियान; प्रिकर्सर और सिंथेटिक ड्रग नियंत्रण; मांग एवं हानि न्यूनीकरण तथा क्षमता निर्माण, समन्वय एवं निगरानी को प्रमुखता दी जाएगी।
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मुख्य सचिव ने मादक पदार्थों से जुड़े मामलों में फॉरेंसिक जांच को अधिक वैज्ञानिक और प्रभावी बनाने पर जोर दिया। इसके साथ ही जिलों में एनकॉर्ड (NCORD) की बैठकें नियमित कराने और पुलिस सहित सभी संबंधित विभागों के बीच सूचना साझा करने की व्यवस्था को मजबूत करने के निर्देश दिए गए।
ड्रग जब्ती में राजस्थान देश में आगे
बैठक में सामने आया कि अफीम, डोडा-पोस्त और एमडी जैसे मादक पदार्थों की जब्ती के मामले में राजस्थान वर्तमान में देश में पहले स्थान पर है। एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स की कार्रवाई में अब तक करीब 730 करोड़ रुपये मूल्य के मादक पदार्थ जब्त किए जा चुके हैं। इस दौरान 93 ड्रग किंगपिन को गिरफ्तार करने के साथ ही एमडी निर्माण से जुड़ी 34 फैक्ट्रियों का भी भंडाफोड़ किया गया है।
प्रदेश में मादक पदार्थों के खिलाफ कार्रवाई को लगातार आगे बढ़ाया जा रहा है। राज्य और जिला स्तर पर एनकॉर्ड की बैठकें आयोजित की जा रही हैं। वहीं 12 सबसे संवेदनशील जिलों पर विशेष निगरानी रखते हुए नशा मुक्ति शिविर लगाए जा रहे हैं। ड्रग हॉटस्पॉट माने जाने वाले क्षेत्रों में निगरानी तंत्र को और मजबूत करने पर भी जोर दिया गया है।
NDPS एक्ट के तहत 5,626 मामले दर्ज
ड्रग तस्करी और बिक्री में शामिल लोगों के खिलाफ NDPS एक्ट के तहत कार्रवाई जारी है। बैठक में बताया गया कि अब तक 5,626 मामले दर्ज किए जा चुके हैं। बार-बार अपराध करने वाले आरोपियों की पहचान कर उनके खिलाफ स्वापक औषधियों और मन:प्रभावी पदार्थों के अवैध व्यापार की रोकथाम अधिनियम, 1988 के तहत भी कार्रवाई की जा रही है।
सरकार की ओर से नशे के खिलाफ केवल कार्रवाई ही नहीं, बल्कि जागरूकता पर भी जोर दिया जा रहा है। नशामुक्त भारत अभियान के तहत विभिन्न विभाग मिलकर युवाओं और आमजन को नशीले पदार्थों के दुष्परिणामों के बारे में जागरूक कर रहे हैं। शैक्षणिक संस्थानों के आसपास 500 मीटर के दायरे को ड्रग-फ्री बनाने के उद्देश्य से विशेष अभियान भी चलाया गया है।
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बैठक में गृह विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव भास्कर ए. सावंत, खेल एवं युवा मामले विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव प्रवीण गुप्ता, उद्योग एवं वाणिज्य विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव शिखर अग्रवाल और एटीएस, एजीटीएफ एवं एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स के अतिरिक्त महानिदेशक पुलिस दिनेश एम.एन. सहित वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।
राष्ट्रीय नारकोटिक्स ब्यूरो और सीमा सुरक्षा बल (BSF) के अधिकारियों ने वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से बैठक में हिस्सा लिया। पुलिस महानिरीक्षक विकास कुमार ने प्रस्तुतीकरण के जरिए एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स की कार्रवाई और उपलब्धियों की जानकारी दी।
इस दौरान पुलिस, शिक्षा, उद्योग और स्वास्थ्य समेत विभिन्न विभागों ने नशे के दुष्प्रभावों को रोकने और मादक पदार्थों के अवैध कारोबार पर अंकुश लगाने के लिए किए जा रहे प्रयासों की जानकारी साझा की। सरकार का फोकस अब कार्रवाई के साथ समन्वित रणनीति तैयार कर नशे के खिलाफ अभियान को और मजबूत करने पर है।



