राजस्थान में पर्यटन ने पकड़ी रफ्तार, 10.93 करोड़ से ज्यादा पर्यटक पहुंचे

राजस्थान में पर्यटन क्षेत्र को नई गति मिलती दिख रही है। जून 2026 तक प्रदेश में 10.85 करोड़ घरेलू और 8.45 लाख विदेशी पर्यटक पहुंचे। सरकार पर्यटन स्थलों के विकास पर 5 हजार करोड़ रुपये से अधिक खर्च करने की तैयारी में है। नई पर्यटन नीतियों, हेरिटेज संरक्षण, धार्मिक यात्राओं और सांस्कृतिक आयोजनों से रोजगार के अवसर भी बढ़ाने पर जोर है।

  • पर्यटन में राजस्थान की रफ्तार बढ़ी, 10.93 करोड़ से ज्यादा पर्यटक पहुंचे।
  • पर्यटन ढांचे पर 5 हजार करोड़ रुपये से अधिक खर्च का प्रावधान।
  • पर्यटन नीतियों से निवेश, रोजगार और स्थानीय स्वरोजगार को बढ़ावा।

Tourism in Rajasthan has gained momentum : राजस्थान में पर्यटन कारोबार को लेकर तस्वीर तेजी से बदलती नजर आ रही है। साल 2026 के जून तक प्रदेश में 10.85 करोड़ घरेलू और 8.45 लाख विदेशी पर्यटक पहुंच चुके हैं। घरेलू और विदेशी यात्राओं को मिलाकर यह संख्या 10.93 करोड़ से अधिक बैठती है। वहीं वर्ष 2024 में पर्यटकों की यात्राओं के मामले में राजस्थान देश में पांचवें स्थान पर रहा था।

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राज्य सरकार अब पर्यटन को केवल घूमने-फिरने तक सीमित रखने के बजाय इसे अर्थव्यवस्था, रोजगार और स्थानीय लोगों की आय से जोड़ने की दिशा में काम कर रही है। पर्यटन स्थलों पर सुविधाएं बढ़ाने और आधारभूत ढांचे को मजबूत करने के लिए 5 हजार करोड़ रुपये से अधिक के कार्य प्रस्तावित किए गए हैं।

आंकड़ों में भी दिखी बड़ी छलांग

राजस्थान में पर्यटकों की संख्या पिछले कुछ वर्षों में लगातार बढ़ी है। वर्ष 2023 में प्रदेश में करीब 17.90 करोड़ घरेलू और 17 लाख विदेशी पर्यटक आए थे। वर्ष 2025 में यह आंकड़ा बढ़कर 25.25 करोड़ घरेलू और 19.45 लाख विदेशी पर्यटकों तक पहुंच गया।

सरकार की योजना पर्यटन को धार्मिक, ग्रामीण, हेरिटेज, ईको और एडवेंचर पर्यटन से जोड़ने की है। इसके साथ ही राजस्थानी खान-पान, लोक कला, हस्तशिल्प और लोक संस्कृति को भी पर्यटन की ताकत बनाने पर जोर दिया जा रहा है।

नई नीतियों से निवेश को बढ़ावा

पर्यटन क्षेत्र में निजी निवेश और नई इकाइयों को प्रोत्साहित करने के लिए राजस्थान पर्यटन इकाई नीति-2024 लागू की गई। इसके बाद पर्यटन विकास को व्यापक स्तर पर आगे बढ़ाने के लिए राजस्थान पर्यटन नीति-2025 लाई गई।

फिल्म निर्माण को राजस्थान से जोड़ने के लिए राजस्थान फिल्म पर्यटन प्रोत्साहन नीति-2025 भी लागू की गई है। इसका उद्देश्य देश-विदेश के फिल्म निर्माताओं के लिए राज्य में शूटिंग की प्रक्रिया आसान करना और राजस्थान को फिल्म पर्यटन के प्रमुख केंद्र के रूप में स्थापित करना है।

जयपुर से हुई पर्यटन की ग्लोबल ब्रांडिंग

जयपुर में आईफा अवार्ड के 25वें समारोह ने राजस्थान की पर्यटन और सांस्कृतिक पहचान को अंतरराष्ट्रीय मंच पर मजबूती दी। इसके अलावा डेस्टिनेशन वेडिंग को बढ़ावा देने के लिए पहली बार जयपुर में ‘वेड इन इंडिया एक्सपो’ आयोजित किया गया।

घरेलू पर्यटन को बढ़ाने के लिए वर्ष 2024 और 2025 में जयपुर में राजस्थान डोमेस्टिक ट्रेवल मार्ट तथा इंडियन रेस्पॉन्सिबल टूरिज्म स्टेट समिट एंड अवार्ड का आयोजन भी किया गया।

पर्यटकों की सुरक्षा भी एजेंडे में

पर्यटन बढ़ने के साथ पर्यटकों की सुरक्षा को लेकर भी सरकार ने कदम उठाए हैं। खासतौर पर महिला पर्यटकों के लिए सुरक्षित और सम्मानजनक माहौल उपलब्ध कराने के उद्देश्य से पर्यटक सहायता बल ने 15 फरवरी 2024 से विशेष अभियान शुरू किया। इसके तहत करीब 1,583 लोगों के खिलाफ कार्रवाई की गई।

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प्रमुख पर्यटन स्थलों और राजकीय स्मारकों पर पर्यटकों की राय जानने के लिए ऑनलाइन फीडबैक व्यवस्था भी शुरू की गई है। इससे सुविधाओं और व्यवस्थाओं को लेकर आने वाली शिकायतों और सुझावों पर नजर रखने में मदद मिल रही है।

घूमर और राजस्थानी स्वाद से जुड़ रहा पर्यटन

राजस्थान की संस्कृति को पर्यटन से जोड़ने के लिए अलग-अलग स्तर पर आयोजन किए जा रहे हैं। मरु महोत्सव और राजस्थान दिवस समारोह के दौरान राजस्थानी फूड फेस्टिवल आयोजित किए गए। नई दिल्ली के सेंट्रल विस्टा में राजस्थानी भोजन का कियोस्क भी स्थापित किया गया है।

प्रदेश के सभी संभाग मुख्यालयों पर घूमर फेस्टिवल-2025 का बड़े स्तर पर आयोजन हुआ। यूनेस्को इंडिया के सहयोग से 214 कलाकारों और हस्तशिल्प कर्मियों को स्वरोजगार का प्रशिक्षण दिया गया। इसके अलावा 81 हेरिटेज होटल और संपत्तियों को हेरिटेज प्रमाण-पत्र जारी किए गए।

फिल्म पर्यटन को भी लगातार बढ़ावा दिया जा रहा है। प्रदेश में 108 फिल्मों, डॉक्यूमेंट्री और टीवी सीरियल की शूटिंग की अनुमति दी गई है।

1.12 लाख वरिष्ठ नागरिकों ने की तीर्थयात्रा

धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने के साथ वरिष्ठ नागरिकों की आस्था का भी ध्यान रखा गया है। देवस्थान विभाग की वरिष्ठ नागरिक तीर्थ यात्रा योजना के तहत करीब 1.12 लाख वरिष्ठ नागरिकों को तीर्थयात्रा कराई गई। इनमें 98,777 यात्रियों ने रेल और 12,963 ने हवाई यात्रा की।

राजकीय मंदिरों में धार्मिक उत्सव और आयोजनों के लिए पिछले दो वर्षों में 25 करोड़ रुपये से अधिक की स्वीकृतियां जारी की गई हैं। न्यास पंजीयन के लिए ऑनलाइन आवेदन की सुविधा भी शुरू की गई है।

पुरानी विरासत को संवारने पर जोर

राजस्थान की बावड़ियों, संग्रहालयों और ऐतिहासिक स्थलों को संरक्षित करने का काम भी आगे बढ़ाया जा रहा है। जयपुर की धूलारावजी बावड़ी और बोरा की बावड़ी तथा जमवारामगढ़ में जीर्णोद्धार कार्यों पर करीब 1.30 करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं।

अजमेर के राजकीय संग्रहालय और किले के संरक्षण, जीर्णोद्धार और उन्नयन के लिए 5 करोड़ रुपये के कार्य चल रहे हैं। जैसलमेर, जोधपुर, मंडोर, आहड़, भरतपुर, माउंट आबू, अलवर, चित्तौड़गढ़ और बीकानेर के 9 राजकीय संग्रहालयों के उन्नयन का काम भी प्रगति पर है।

इसके अलावा प्रदेश में सात पैनोरमा का निर्माण जारी है। इनमें श्री महावीर जी, जैन मुनि विद्यासागर जी महाराज, करमा बाई, भामाशाह, राव चन्द्रसेन, गोकुला जाट और जैसलमेर पैनोरमा शामिल हैं।

कला, साहित्य और वैदिक शिक्षा को भी साथ लेकर चलने की तैयारी

पर्यटन के साथ कला और संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए संबंधित संस्थाओं को एक करोड़ रुपये से अधिक का अनुदान स्वीकृत किया गया है। वेद विद्यालयों के अध्यापकों का मासिक मानदेय भी 8 हजार से बढ़ाकर 15 हजार रुपये किया गया है।

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जयपुर में ‘विजयदान देथा साहित्य उत्सव’ और बीकानेर में राजस्थान के इतिहास में महिलाओं की स्थिति एवं भूमिका पर सिम्पोजियम का आयोजन किया गया।

सरकार का फोकस अब राजस्थान की प्राकृतिक खूबसूरती के साथ उसकी हजारों साल पुरानी विरासत, धार्मिक स्थलों, लोक संस्कृति, खान-पान और कला को एक बड़े पर्यटन मॉडल से जोड़ने पर है। माना जा रहा है कि इससे पर्यटकों की संख्या बढ़ने के साथ स्थानीय कलाकारों, हस्तशिल्पियों, युवाओं और पर्यटन कारोबार से जुड़े लोगों के लिए रोजगार और स्वरोजगार के नए रास्ते खुल सकते हैं।

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