युवाओं के कौशल पर राजस्थान-यूनिसेफ का बड़ा फोकस
‘विकसित राजस्थान@2047’ के लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए राजस्थान सरकार और यूनिसेफ ने युवाओं की शिक्षा, कौशल और रोजगार के बीच बेहतर तालमेल बनाने पर जोर दिया है। बैठक में प्रशिक्षण को मजबूत करने, रोजगार के अवसर बढ़ाने, उद्यमिता को प्रोत्साहित करने और योजनाओं का विस्तार करने पर चर्चा हुई। डिजिटल गर्ल्स हब समेत कई पहलों के असर की समीक्षा भी की गई।
- राजस्थान-यूनिसेफ सहयोग से युवाओं के कौशल विकास पर जोर।
- कौशल और रोजगार के अवसरों को एकीकृत करने की तैयारी।
- डिजिटल गर्ल्स हब से 9,300 युवतियां रोजगार से जुड़ीं।
Major focus by Rajasthan and UNICEF on youth skills : राजस्थान में युवाओं को शिक्षा से रोजगार तक बेहतर अवसर उपलब्ध कराने की दिशा में सरकार और यूनिसेफ के बीच सहयोग को और मजबूत करने की तैयारी है। शासन सचिवालय में मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास और यूनिसेफ के जनरेशन अनलिमिटेड की सीईओ डॉ. नादी अल्बिनो के बीच हुई बैठक में युवाओं के कौशल, रोजगार और उद्यमिता से जुड़े कार्यक्रमों के विस्तार पर चर्चा हुई।

बैठक में मुख्य सचिव ने कहा कि ‘विकसित राजस्थान@2047’ के लक्ष्य को हासिल करने में युवा शक्ति की अहम भूमिका है। ऐसे में यूनिसेफ के साथ चल रहे कार्यक्रमों को केवल प्रशिक्षण तक सीमित रखने के बजाय उन्हें रोजगार और उद्यमिता से सीधे जोड़ने की जरूरत है। उन्होंने योजनाओं को ज्यादा परिणामोन्मुखी बनाने के साथ उनकी पहुंच बढ़ाने पर भी जोर दिया।
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वी. श्रीनिवास ने युवाओं के लिए एक ऐसी विस्तार रणनीति तैयार करने की बात कही, जिसमें अलग-अलग वर्गों की जरूरत के मुताबिक कार्यक्रम तैयार किए जा सकें। रोजगार के उपलब्ध अवसरों को एक मंच से जोड़ने, लक्षित समूहों के लिए कस्टमाइज्ड कार्यक्रम बनाने और योजनाओं के लिए उपयुक्त वित्तीय पैकेज तैयार करने पर भी चर्चा हुई।
मुख्य सचिव ने राजस्थान में राजीविका मिशन के कामकाज का उदाहरण देते हुए कहा कि महिला सशक्तीकरण और आजीविका के क्षेत्र में मिशन ने उल्लेखनीय परिणाम दिए हैं। इसी तरह यूनिसेफ के युवा केंद्रित कार्यक्रमों में भी ठोस वैल्यू एडिशन और व्यापक प्रभाव दिखाई देना चाहिए।
बैठक में यूनिसेफ के जनरेशन अनलिमिटेड की सीईओ डॉ. नादी अल्बिनो ने यूथहब, डिजिटल गर्ल्स हब, ‘आओ बनो फ्यूचर रेडी’, ‘दीदी की दुकान’ और ‘कम्प्यूटर दीदी सेंटर’ जैसी पहलों की जानकारी साझा की। उन्होंने बताया कि राजस्थान में डिजिटल गर्ल्स हब के जरिए करीब 9,300 युवा महिलाओं को रोजगार से जोड़ा गया है। इनमें लगभग 6,200 महिलाओं को पिछले छह महीनों के दौरान रोजगार मिला है।
कौशल, रोजगार एवं उद्यमिता विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव संदीप वर्मा ने बताया कि विभाग का यूनिसेफ के साथ वर्ष 2025 में एमओयू हुआ था। इसके तहत रणनीति निर्माण और प्रशिक्षण कार्यक्रमों को अधिक प्रभावी बनाने के लिए लगातार काम किया जा रहा है। यूनिसेफ की ओर से उपलब्ध कराए गए प्रशिक्षण सहयोगियों के माध्यम से युवाओं के लिए विभिन्न प्रशिक्षण कार्यक्रम भी संचालित किए जा रहे हैं।
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युवा मामले एवं खेल विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव प्रवीण गुप्ता ने ‘युवा साथी’ योजना के तहत यूनिसेफ के साथ किए जा रहे काम की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि माय भारत पोर्टल पर राजस्थान के करीब 21 लाख युवा पंजीकृत हैं। इस मामले में राज्य देश में दूसरे स्थान पर है। युवाओं को बेहतर मंच उपलब्ध कराने के लिए विवेकानंद पोर्टल और माय भारत पोर्टल के बीच मजबूत लिंकेज विकसित करने पर भी काम चल रहा है।
बैठक में कौशल, रोजगार एवं उद्यमिता, उच्च एवं तकनीकी शिक्षा, युवा मामले एवं खेल, स्कूल शिक्षा, आयोजना एवं सांख्यिकी, पंचायती राज और महिला एवं बाल विकास विभाग के अधिकारियों ने अपने-अपने क्षेत्रों में यूनिसेफ के सहयोग से चल रहे कार्यों की जानकारी दी। अधिकारियों ने योजनाओं को अधिक प्रभावी बनाने के लिए सुझाव भी साझा किए।
सरकार का जोर अब इन पहलों को व्यापक स्तर तक पहुंचाने और युवाओं के लिए प्रशिक्षण के बाद वास्तविक रोजगार व उद्यमिता के अवसर तैयार करने पर है। इससे शिक्षा, कौशल और रोजगार के बीच की दूरी कम करने की दिशा में राजस्थान को नई गति मिलने की उम्मीद है।



