राजस्थान में एससी-एसटी सुरक्षा को लेकर बड़ा फैसला, नेशनल मॉडल बनी यह नई व्यवस्था
जयपुर में राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग के अध्यक्ष किशोर मकवाना ने मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास और डीजीपी राजीव कुमार शर्मा के साथ बैठक कर एससी-एसटी वर्ग के अधिकारों, सुरक्षा और कल्याण योजनाओं की समीक्षा की। आयोग ने राजस्थान की केस रिव्यू प्रणाली को नेशनल बेस्ट प्रैक्टिस बताया। बैठक में त्वरित न्याय, राहत, निष्पक्ष जांच और सामाजिक समरसता पर भी विशेष चर्चा हुई।
- केस रिव्यू प्रणाली को आयोग ने नेशनल बेस्ट प्रैक्टिस बताया।
- एससी-एसटी मामलों में कमी और त्वरित राहत पर जोर दिया गया।
- राजस्थान में निष्पक्ष जांच और सामाजिक समरसता के प्रयासों की सराहना हुई।
Major decision regarding SC/ST protection in Rajasthan : राजस्थान में अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति वर्ग से जुड़े मामलों की निगरानी और जांच व्यवस्था को राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग ने सराहा है। आयोग अध्यक्ष किशोर मकवाना ने शासन सचिवालय में मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास और पुलिस महानिदेशक राजीव कुमार शर्मा के साथ बैठक कर एससी-एसटी वर्ग के संवैधानिक अधिकारों, सुरक्षा, न्याय व्यवस्था और कल्याणकारी योजनाओं के क्रियान्वयन की समीक्षा की।

बैठक में राजस्थान की केस रिव्यू प्रणाली खास चर्चा में रही। आयोग अध्यक्ष ने इस व्यवस्था को ‘नेशनल बेस्ट प्रैक्टिस’ बताते हुए इसकी सराहना की और कहा कि पारदर्शी जांच तथा जवाबदेही सुनिश्चित करने वाला यह मॉडल दूसरे राज्यों के लिए भी उपयोगी हो सकता है।
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राज्य में बंद किए गए मामलों यानी क्लोज्ड या एफआर मामलों में से करीब 20 प्रतिशत मामलों की उच्च स्तर पर दोबारा जांच और समीक्षा की जाती है। इस प्रक्रिया में यदि जांच में किसी तरह की गंभीर कमी या लापरवाही सामने आती है तो मामले को फिर से खोला जा सकता है। साथ ही संबंधित अधिकारी के खिलाफ विजिलेंस जांच की कार्रवाई भी की जाती है। आयोग ने इसी व्यवस्था को निष्पक्षता और जवाबदेही की दिशा में अहम कदम माना।
एससी-एसटी अत्याचार के मामलों में कमी का दावा
मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास ने आयोग अध्यक्ष को बताया कि मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में राज्य सरकार एससी और एसटी वर्ग के हितों, सुरक्षा और त्वरित न्याय को लेकर संवेदनशीलता के साथ काम कर रही है। प्रशासन और पुलिस की नियमित मॉनिटरिंग के चलते अत्याचार से जुड़े मामलों में उल्लेखनीय गिरावट दर्ज होने की बात उन्होंने बैठक में रखी।
डीजीपी राजीव कुमार शर्मा ने बताया कि मामलों की प्रभावी निगरानी के साथ 60 दिन के भीतर चालान पेश करने की दर में भी सुधार हुआ है। उन्होंने कहा कि संवेदनशील घटनाओं को लेकर पुलिस लगातार निगरानी कर रही है। खास तौर पर बिंदोली और घोड़ी चढ़ने जैसे मामलों की मैपिंग की जा रही है, ताकि जरूरत पड़ने पर तत्काल कार्रवाई की जा सके।
पीड़ित परिवारों को एफआईआर और चालान के स्तर पर निर्धारित वित्तीय सहायता समय पर उपलब्ध कराने पर भी जोर दिया गया। अधिकारियों के अनुसार प्रवासी पीड़ितों को भी नियमों के तहत मुआवजा देने की प्रक्रिया को तेज किया गया है।
कल्याणकारी योजनाओं पर भी हुई चर्चा
विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव दिनेश कुमार ने आयोग को बताया कि अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति वर्ग के पात्र लोगों तक सरकारी योजनाओं का लाभ आसानी से पहुंचाने के प्रयास जारी हैं। उन्होंने कहा कि दोनों वर्गों के सामाजिक और आर्थिक विकास के लिए विभाग की ओर से विभिन्न प्रकार की सहायता उपलब्ध कराई जा रही है।
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बैठक के अंत में किशोर मकवाना ने एससी वर्ग के सशक्तीकरण, सुरक्षा और शिकायतों के तेजी से निस्तारण के लिए राजस्थान प्रशासन की ओर से किए जा रहे प्रयासों की सराहना की। उन्होंने राज्य में अपनाए जा रहे नवाचारों और केस रिव्यू व्यवस्था को महत्वपूर्ण बताया।
राजस्थान की इस पहल को आयोग की ओर से राष्ट्रीय स्तर पर उदाहरण के तौर पर रेखांकित किया जाना राज्य की प्रशासनिक और पुलिस व्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।



