बीकानेर हाउस में सजी लाख की रंगीन विरासत

नई दिल्ली के बीकानेर हाउस में चल रहे दस दिवसीय तीजोत्सव-2026 में राजस्थान की पारंपरिक लाख कला लोगों का ध्यान खींच रही है। रंग-बिरंगी चूड़ियों और आभूषणों के जरिए पांचवीं पीढ़ी के शिल्पकार इफ्तेखार अहमद अपनी पुश्तैनी कला को नई पहचान दे रहे हैं। तीजोत्सव में देशी-विदेशी दर्शक राजस्थानी हस्तशिल्प की खूबसूरती करीब से देख रहे हैं।

  • बीकानेर हाउस में तीजोत्सव-2026 का आयोजन।
  • लाख की चूड़ियां बनीं आगंतुकों के आकर्षण का केंद्र।
  • पांचवीं पीढ़ी के शिल्पकार इफ्तेखार अहमद कला को आगे बढ़ा रहे हैं।

The colorful heritage of lac on display at Bikaner House : नई दिल्ली स्थित बीकानेर हाउस इन दिनों राजस्थान की लोक संस्कृति और पारंपरिक हुनर के रंगों से सजा हुआ है। दस दिवसीय ‘तीजोत्सव-2026’ में 24 अगस्त तक लोक कला, खान-पान और हस्तशिल्प की झलक देखने को मिल रही है। इसी बीच राजस्थान की सदियों पुरानी लाख कला ने भी लोगों का खास ध्यान खींचा है।

बीकानेर हाउस में सजी लाख की रंगीन विरासत
Image Source : Via Dipr

मेले में लगी लाख की चूड़ियों और आभूषणों की दुकान पर महिलाओं के साथ दूसरे आगंतुक भी बड़ी दिलचस्पी दिखा रहे हैं। चमकीले रंग, पारंपरिक डिजाइन और हाथों से की गई बारीक कारीगरी इन चूड़ियों को खास बनाती है। कई लोगों के लिए यह केवल खरीदारी नहीं, बल्कि राजस्थान की सांस्कृतिक विरासत को करीब से देखने का मौका भी है।

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इस पारंपरिक कला को तीजोत्सव में लेकर पहुंचे इफ्तेखार अहमद के परिवार की पांच पीढ़ियां लाख शिल्प को संजोने में जुटी हैं। अहमद बताते हैं कि उनके परिवार में पीढ़ियों से लाख की चूड़ियां और अलग-अलग तरह के आभूषण तैयार किए जाते रहे हैं। राजस्थान में लाख की चूड़ियां महिलाओं के पारंपरिक श्रृंगार और पहनावे का अहम हिस्सा रही हैं।

इफ्तेखार अहमद के लिए यह काम केवल रोजी-रोटी का जरिया नहीं, बल्कि परिवार से मिली एक विरासत है। उनका कहना है कि रंगों और डिजाइन के साथ तैयार की जाने वाली लाख की चूड़ियों में राजस्थान की अपनी अलग पहचान दिखाई देती है। इसी पहचान को वे आज के दौर में नए ग्राहकों तक पहुंचाने की कोशिश कर रहे हैं।

उनकी कला को राजस्थान ही नहीं, बल्कि विदेशों में भी सराहना मिल चुकी है। अहमद को अलग-अलग देशों में आयोजित प्रदर्शनियों में अपनी कला प्रदर्शित करने के अवसर मिले हैं। विदेशी दर्शकों की ओर से लाख के आभूषणों में दिखाई गई रुचि उन्हें अपनी पुश्तैनी कला को आगे बढ़ाने का उत्साह देती है।

बीकानेर हाउस का तीजोत्सव उनके लिए खास इसलिए भी है क्योंकि वे पहली बार इस आयोजन का हिस्सा बने हैं। यहां आने वाले लोगों की प्रतिक्रिया और लाख की कला के प्रति उनकी जिज्ञासा से वह उत्साहित हैं। उनका मानना है कि ऐसे आयोजनों से शिल्पकारों को सीधे लोगों से जुड़ने और अपनी कला को बाजार तक पहुंचाने का बेहतर अवसर मिलता है।

‘लाक्षागृह से लाख तक’ की कहानी

लाख के इतिहास को लेकर इफ्तेखार अहमद लोक परंपराओं में प्रचलित महाभारत काल के लाक्षागृह प्रसंग का भी उल्लेख करते हैं। उनका कहना है कि इस कला से जुड़ी विरासत को आगे बढ़ाना उनके लिए गर्व की बात है। साथ ही, उनकी कोशिश है कि बदलते समय के बीच लाख शिल्प की पहचान कमजोर न पड़े और यह हुनर अगली पीढ़ियों तक पहुंचता रहे।

आज जब पारंपरिक हस्तशिल्प को नए बाजार और आधुनिक ग्राहकों से जोड़ने की चुनौती है, ऐसे आयोजन शिल्पकारों के लिए महत्वपूर्ण मंच बनते हैं। तीजोत्सव जैसे मेलों में कलाकार अपने उत्पाद सीधे उपभोक्ताओं तक पहुंचा सकते हैं और लोगों को उनके पीछे छिपी मेहनत और परंपरा से भी परिचित करा सकते हैं।

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लाख की चूड़ियों में दिखाई दे रहे पारंपरिक रंग संयोजन, आकर्षक आकृतियां और हाथ की कारीगरी राजस्थान की सांस्कृतिक पहचान को सामने लाती है। बीकानेर हाउस में इन चूड़ियों को मिल रही प्रतिक्रिया यह बताती है कि आधुनिक दौर में भी पारंपरिक शिल्प के लिए लोगों के मन में खास जगह बनी हुई है।

इस तरह तीजोत्सव-2026 में लाख की चूड़ियां महज सजावटी सामान नहीं रह गई हैं। वे राजस्थान की उस पीढ़ियों पुरानी कहानी को भी सामने ला रही हैं, जिसे शिल्पकार अपने हाथों और हुनर से आज तक जीवित रखे हुए हैं।

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