राजीविका से महिलाओं की कमाई बढ़ाने की तैयारी

जयपुर में राजीविका से जुड़ी महिलाओं की आय बढ़ाने और उन्हें नए रोजगार अवसर देने को लेकर विभागों के बीच कन्वर्जेंस पर मंथन हुआ। बैठक में 25 लाख लखपति दीदी के लक्ष्य के तहत 6,78,461 स्वयं सहायता समूह सदस्यों को आगे बढ़ाने की योजना पर चर्चा हुई। कृषि, पशुपालन, पर्यटन, स्वास्थ्य, ऊर्जा और उद्योग से जोड़कर बाजार उपलब्ध कराने पर जोर दिया गया।

  • राजीविका महिलाओं को योजनाओं से जोड़कर आय बढ़ाने पर जोर।
  • लखपति दीदी के लक्ष्य के लिए 6.78 लाख महिलाओं का रोडमैप तैयार होगा।
  • स्वयं सहायता समूह उत्पादों के लिए बाजार और संस्थागत खरीद बढ़ेगी।

Plans to boost women’s earnings through Rajeevika : राजस्थान में स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने के लिए विभिन्न सरकारी योजनाओं को राजीविका से जोड़ने की तैयारी तेज कर दी गई है। मंगलवार को सचिवालय में ग्रामीण विकास विभाग के शासन सचिव कृष्ण कुणाल की अध्यक्षता में हुई कन्वर्जेंस बैठक में महिलाओं की आय बढ़ाने के लिए अलग-अलग विभागों के साथ समन्वय पर विस्तृत चर्चा हुई।

राजीविका से महिलाओं की कमाई बढ़ाने की तैयारी
Image Source : Via Dipr

बैठक का बड़ा फोकस प्रदेश में 25 लाख लखपति दीदी के लक्ष्य को हासिल करना रहा। इसके तहत 6,78,461 स्वयं सहायता समूह की महिलाओं को लखपति दीदी के रूप में विकसित करने के लिए रोडमैप पर विचार किया गया। कृष्ण कुणाल ने अधिकारियों से कहा कि विभागीय योजनाओं का लाभ राजीविका से जुड़ी महिलाओं तक समय पर और प्रभावी तरीके से पहुंचना चाहिए।

खेती से लेकर पशुपालन तक नए अवसर

कृषि क्षेत्र में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने के लिए नेशनल मिशन ऑन नेचुरल फार्मिंग में 2,666 कृषि सखियों को जोड़ने पर चर्चा हुई। नमो ड्रोन दीदी योजना के तहत 50 महिलाओं को ड्रोन संचालन का प्रशिक्षण देने, 10 एफपीओ के माध्यम से प्रमाणित बीज उत्पादन और मसाला व मिलेट आधारित उद्यमों को बढ़ावा देने के प्रस्ताव भी बैठक में रखे गए।

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राजीविका एफपीओ के माध्यम से बीज, खाद और कीटनाशकों की उपलब्धता तथा जैविक खेती के प्रमाणीकरण को बढ़ावा देने पर भी विचार हुआ। पशुपालन क्षेत्र में पशु सखियों को मंगल पशु बीमा योजना से जोड़ने, ए-हेल्प प्रशिक्षण बढ़ाने और स्वयं सहायता समूहों द्वारा संचालित मिल्क कलेक्शन सेंटर विकसित करने की दिशा में भी चर्चा की गई।

बकरी और ऊंट आधारित वैल्यू चेन तथा मत्स्य उत्पादक समूहों के विस्तार को भी आजीविका बढ़ाने के संभावित माध्यम के रूप में देखा गया। अधिकारियों को प्रशिक्षण के साथ तकनीकी सहयोग, प्रमाणन, खरीद और बाजार की व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए।

राजसखी उत्पादों को मिलेगा बड़ा बाजार

बैठक में यह भी चर्चा हुई कि राजीविका की महिलाओं द्वारा बनाए जा रहे उत्पादों के लिए केवल स्थानीय बिक्री पर निर्भरता कम कर स्थायी बाजार तैयार किया जाए। सहकारिता विभाग के उपहार स्टोर में स्वयं सहायता समूहों के उत्पाद बेचने और राजसखी की सहकारी विभाग व कॉनफेड के साथ को-ब्रांडिंग पर विचार हुआ।

राजफेड के माध्यम से मसाले, दाल, जीरा, धनिया, इसबगोल और मिलेट उत्पादों की खरीद की संभावनाएं भी तलाशने पर जोर दिया गया। देवस्थान विभाग के सहयोग से मंदिरों से निकलने वाले फूलों का उपयोग अगरबत्ती, गुलाल और अन्य पर्यावरण अनुकूल उत्पाद बनाने में करने का प्रस्ताव सामने आया।

मंदिरों में राजसखी आउटलेट और धर्मशालाओं में स्वयं सहायता समूहों के उत्पादों की संस्थागत खरीद की संभावनाओं पर भी चर्चा हुई। पर्यटन विभाग के साथ मिलकर पर्यटन स्थलों पर राजसखी स्टोर-कैफे, होटलों में उत्पादों की खरीद और पर्यटन सखियों की तैनाती जैसे कदमों पर विचार किया गया।

ब्लू पॉटरी, कशीदाकारी, टाई-डाई, ब्लॉक प्रिंटिंग और कोटा डोरिया जैसे पारंपरिक शिल्पों के क्लस्टर विकसित करने पर भी जोर रहा। इससे स्थानीय हुनर को बाजार मिलने के साथ महिलाओं की कमाई बढ़ाने का रास्ता खुल सकता है।

स्कूलों और सरकारी संस्थानों में भी भागीदारी

शिक्षा विभाग के स्कूलों, छात्रावासों और कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों में खाद्य सामग्री, लिनेन, साबुन और स्टेशनरी जैसी वस्तुओं की आपूर्ति में स्वयं सहायता समूहों की भागीदारी बढ़ाने पर चर्चा हुई।

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गृह विभाग के पुलिस अकादमी और प्रशिक्षण केंद्रों में राजीविका कैंटीन तथा समूहों के उत्पादों की आपूर्ति का प्रस्ताव रखा गया। जनजाति क्षेत्र विकास विभाग के 541 छात्रावासों में संस्थागत खरीद और 517 वन धन विकास केंद्रों को राजीविका के माध्यम से मार्गदर्शन देने पर भी मंथन हुआ।

पंचायती राज विभाग के तहत 623 अन्नपूर्णा रसोई, सोलर दीदी, स्वच्छता सखी और बर्तन बैंक जैसी गतिविधियों का विस्तार करने की संभावनाएं तलाशीं गईं। महिला एवं बाल सशक्तीकरण विभाग के माध्यम से स्वयं सहायता समूहों द्वारा बनाए गए सैनिटरी नैपकिन की आपूर्ति बढ़ाने पर भी चर्चा हुई।

रोजगार और कारोबार के लिए उद्योग विभाग से तालमेल

उद्योग विभाग के साथ RAMP प्रशिक्षण, उद्यम पंजीकरण, ऋण सुविधा और बाजार संपर्क मजबूत करने के मुद्दे पर भी विचार हुआ। मेले, प्रदर्शनियां और बायर-सेलर मीट आयोजित कर समूहों के उत्पादों को बड़े खरीदारों तक पहुंचाने की संभावनाओं पर जोर दिया गया।

अधिकारियों से कहा गया कि सरकारी योजनाओं में राजीविका समूहों की भागीदारी केवल कागजों तक सीमित न रहे, बल्कि महिलाओं को स्थायी रोजगार और नियमित आय के अवसर मिलें।

स्वास्थ्य, पानी और सौर ऊर्जा में भी नई भूमिका

जल जीवन मिशन के तहत स्वयं सहायता समूह की महिलाओं को जल सखी के रूप में जोड़ने का प्रस्ताव है। इसके तहत बिलिंग, मीटर रीडिंग, घरेलू सर्वे और पानी की गुणवत्ता की निगरानी जैसे कार्यों में उनकी भागीदारी हो सकती है।

स्वास्थ्य क्षेत्र में अस्पतालों में राजीविका कैंटीन, स्वास्थ्य सखी, लॉन्ड्री और जनरल स्टोर संचालन के साथ योग सत्र और प्रशिक्षित महिलाओं को अस्पताल आधारित बेबीसिटिंग सेवाओं से जोड़ने पर भी चर्चा हुई।

जल संसाधन विभाग के साथ 24 जिलों के 1,000 गांवों में 10 हजार स्वयं सहायता समूह की महिलाओं को लखपति दीदी के रूप में विकसित करने की योजना पर विचार किया गया। फल, सब्जी और मसाला फसलों के प्रदर्शन के जरिए आय के नए साधन तैयार करने की संभावना भी सामने आई।

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ऊर्जा क्षेत्र में 25 हजार सोलर दीदियों की पहचान कर उन्हें सोलर प्लेट और पैनल के रखरखाव तथा नियमित संचालन से जोड़ने पर भी मंथन हुआ। इससे ग्रामीण महिलाओं के लिए तकनीकी कौशल और कमाई के नए अवसर बनने की उम्मीद है।

बैठक में राजीविका की राज्य मिशन निदेशक प्रियंका गोस्वामी सहित विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। उन्होंने संबंधित विभागों को आपसी समन्वय के साथ आगे बढ़ने और योजनाओं का वास्तविक लाभ राजीविका की महिलाओं तथा उनके स्वयं सहायता समूहों तक समयबद्ध तरीके से पहुंचाने के निर्देश दिए।

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