रामजल सेतु परियोजना से बदलेगी पूर्वी राजस्थान की तस्वीर
मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने रामजल सेतु लिंक परियोजना की समीक्षा करते हुए अधिकारियों को सभी निर्माण कार्य तय समय से पहले और उच्च गुणवत्ता के साथ पूरा करने के निर्देश दिए। करीब 90 हजार करोड़ रुपये की इस महत्वाकांक्षी परियोजना से पूर्वी राजस्थान के 17 जिलों में पेयजल, सिंचाई और औद्योगिक विकास को नई गति मिलने की उम्मीद है।
- रामजल सेतु परियोजना को समय से पहले पूरा करने के निर्देश।
- पूर्वी राजस्थान के 17 जिलों को मिलेगा जल संकट से राहत।
- रामजल सेतु परियोजना में गुणवत्ता और समय-सीमा पर विशेष जोर।
The Ramjal Setu Project will transform the face of Eastern Rajasthan : पूर्वी राजस्थान की जल आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए राज्य सरकार की महत्वाकांक्षी रामजल सेतु लिंक परियोजना तेजी से आगे बढ़ रही है। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने परियोजना की उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक में अधिकारियों को निर्देश दिए कि सभी निर्माण कार्य निर्धारित समय-सीमा से पहले पूरे किए जाएं, ताकि प्रदेश की जनता को जल्द से जल्द इसका लाभ मिल सके।

मुख्यमंत्री ने कहा कि यह परियोजना केवल पेयजल उपलब्ध कराने तक सीमित नहीं है, बल्कि किसानों, उद्योगों और क्षेत्रीय विकास के लिए भी नई संभावनाओं का द्वार खोलेगी। उन्होंने निर्माण कार्यों की गुणवत्ता से किसी भी प्रकार का समझौता नहीं करने और प्रत्येक चरण की नियमित निगरानी सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

बैठक में परियोजना के विभिन्न हिस्सों की प्रगति की समीक्षा की गई। बीसलपुर से मोर सागर, ईसरदा से बंध बरेठा, ईसरदा से रामगढ़, खुरा-चैनपुरा से जयसमंद और ब्राह्मणी बैराज सहित कई प्रमुख घटकों पर चल रहे कार्यों की जानकारी मुख्यमंत्री को दी गई। उन्होंने मासिक प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत करने और सभी विभागों के बीच बेहतर समन्वय बनाए रखने पर जोर दिया।
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मुख्यमंत्री ने परियोजना से प्रभावित परिवारों के पुनर्वास और मुआवजा प्रक्रिया को पूरी पारदर्शिता और संवेदनशीलता के साथ समयबद्ध तरीके से पूरा करने के निर्देश भी दिए। उन्होंने कहा कि किसी भी प्रभावित परिवार को अनावश्यक परेशानी नहीं होनी चाहिए।
बैठक में अतिरिक्त मुख्य सचिव (जल संसाधन) अभय कुमार ने बताया कि परियोजना के तहत 24 हजार करोड़ रुपये से अधिक के निर्माण कार्य प्रगति पर हैं। नवनेरा बैराज और ईसरदा बांध का निर्माण पूरा हो चुका है, जबकि रामगढ़ और महलपुर बैराज सहित कई अन्य संरचनाओं पर तेजी से काम जारी है।
उन्होंने बताया कि चंबल एक्वाडक्ट, फीडर नहरों, पंप हाउस और जल अपवर्तन प्रणाली से जुड़े कई महत्वपूर्ण कार्य विभिन्न चरणों में हैं। लगभग 2,330 करोड़ रुपये की लागत से बन रहा चंबल एक्वाडक्ट परियोजना का प्रमुख हिस्सा है, जिसके माध्यम से पानी को विभिन्न जलाशयों तक पहुंचाया जाएगा। इससे क्षेत्र में जल आपूर्ति के साथ-साथ आवागमन की सुविधा भी बेहतर होगी।
राज्य सरकार ने इस परियोजना को संशोधित स्वरूप देते हुए लगभग 90 हजार करोड़ रुपये की लागत वाली व्यापक जल योजना के रूप में विकसित किया है। प्रथम चरण में प्रदेश के 17 जिलों की करीब 3 करोड़ 25 लाख आबादी को पेयजल उपलब्ध कराने का लक्ष्य रखा गया है। साथ ही सिंचाई और औद्योगिक उपयोग के लिए भी पर्याप्त जल उपलब्ध होने से पूर्वी राजस्थान के आर्थिक और सामाजिक विकास को नई दिशा मिलेगी।
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सरकार के अनुसार यह परियोजना अंतरराज्यीय समन्वय और दीर्घकालिक जल प्रबंधन का महत्वपूर्ण उदाहरण है। मध्यप्रदेश और केंद्र सरकार के सहयोग से आगे बढ़ रही यह योजना भविष्य में राजस्थान की जल सुरक्षा को मजबूत आधार प्रदान करेगी।



