शोध को मिला सम्मान, वैज्ञानिकों की चमकी उपलब्धियां

महात्मा गांधी यूनिवर्सिटी ऑफ मेडिकल साइंसेज एंड टेक्नोलॉजी, जयपुर में पहले रिसर्च एप्रिसिएशन डे का आयोजन हुआ। कार्यक्रम में शोध एवं नवाचार के क्षेत्र में बेहतर काम करने वाले शिक्षकों, शोधार्थियों और नवप्रवर्तकों को सम्मानित किया गया। विश्वविद्यालय ने 2025-26 में 817 शोध प्रकाशन, 88 आईपीआर उपलब्धियां और 82 पुस्तक एवं अध्यायों में योगदान दर्ज किया।

  • रिसर्च एप्रिसिएशन डे: शोध एवं नवाचार में उत्कृष्ट योगदान देने वालों को सम्मान।
  • रिसर्च अनुदान: विश्वविद्यालय ने इस वर्ष शोध के लिए सवा करोड़ रुपये का बजट मंजूर किया।
  • अनुसंधान उपलब्धियां: 817 शोध प्रकाशन और 88 बौद्धिक संपदा अधिकार संबंधी उपलब्धियां दर्ज।

Research Appreciation Day Honors Scientific Excellence:  महात्मा गांधी यूनिवर्सिटी ऑफ मेडिकल साइंसेज एंड टेक्नोलॉजी, जयपुर में बुधवार को पहला रिसर्च एप्रिसिएशन डे आयोजित किया गया। कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के शोध कार्यों को नई दिशा देने वाले शिक्षकों, शोधार्थियों और नवप्रवर्तकों की उपलब्धियों को मंच पर पहचान मिली। इस दौरान वर्ष 2025-26 के अनुसंधान उत्कृष्टता पुरस्कार भी प्रदान किए गए।

शोध को मिला सम्मान, वैज्ञानिकों की चमकी उपलब्धियां
Image Source : Via dainik jaltedeep

कार्यक्रम में चेयरपर्सन डॉ. विकास चंद्र स्वर्णकार, कुलपति डॉ. अचल गुलाटी और प्रो-वाइस चांसलर डॉ. वीके कपूर के मार्गदर्शन में शोध को बढ़ावा देने पर जोर दिया गया। डॉ. विनय कपूर और डीन रिसर्च डॉ. निखिल मारवाह ने विश्वविद्यालय में अनुसंधान को प्रोत्साहित करने के लिए किए जा रहे प्रयासों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि इस वर्ष रिसर्च अनुदान के लिए सवा करोड़ रुपये का बजट स्वीकृत किया गया है और इस अवधि में कुल 918 अनुदान प्रदान किए गए।

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विश्वविद्यालय के अनुसार, वर्ष 2025-26 में शोध एवं अकादमिक गतिविधियों में उल्लेखनीय प्रगति हुई। इस दौरान 817 शोध प्रकाशन, 187 शोध प्रबंध प्रकल्प, 88 बौद्धिक संपदा अधिकार संबंधी उपलब्धियां तथा 82 पुस्तकों और पुस्तक अध्यायों में योगदान दर्ज किया गया। विश्वविद्यालय का कहना है कि लक्ष्य केवल शोध की संख्या बढ़ाना नहीं, बल्कि ऐसे अनुसंधान को आगे बढ़ाना है, जिसका सीधा लाभ चिकित्सा, समाज और आम लोगों तक पहुंच सके।

चेयरपर्सन डॉ. विकास स्वर्णकार ने कहा कि शोध वही है, जिसमें बदलाव लाने की संभावना दिखाई दे। उन्होंने शोधकर्ताओं को लगातार प्रोत्साहित करने की जरूरत बताते हुए विश्वविद्यालय में शोध उपलब्धियों को प्रदर्शित करने के लिए हॉल ऑफ फेम बनाने की घोषणा की। उन्होंने कहा कि शोध के लिए स्वीकृत सवा करोड़ रुपये की राशि इस दिशा में संस्थान की प्रतिबद्धता को दर्शाती है।

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कुलपति डॉ. अचल गुलाटी ने कहा कि विश्वविद्यालय में ऐसे शोध प्रयास होने चाहिए, जिनमें वैश्विक स्तर पर नई सोच और उपयोगिता दिखाई दे। उन्होंने शोध की गुणवत्ता बढ़ाने में फैकल्टी की भूमिका को महत्वपूर्ण बताया और वैज्ञानिकों को नए विचारों के साथ आगे आने के लिए प्रोत्साहित किया।

समारोह में अनुसंधान उत्कृष्टता पुरस्कारों के तहत करीब एक दर्जन श्रेणियों में वैज्ञानिकों और शोधकर्ताओं को सम्मानित किया गया। इनमें वर्ष के श्रेष्ठ शोधकर्ता, सह-शोधकर्ता, सर्वाधिक शोध प्रकाशन, उत्कृष्ट वैज्ञानिक प्रकाशन, पेटेंट, डिजाइन पेटेंट, कॉपीराइट, श्रेष्ठ पुस्तक लेखक एवं सह-पुस्तक लेखक जैसी श्रेणियां शामिल थीं। इसके अलावा श्रेष्ठ नवाचार एवं स्टार्टअप, श्रेष्ठ वैज्ञानिक प्रस्तुतकर्ता और श्रेष्ठ सहयोगी वर्ग में भी पुरस्कार दिए गए।

सम्मानित होने वालों में डॉ. नैमिष एन. मेहता, डॉ. हेमंत मल्होत्रा, डॉ. विवेक आनंद सारस्वत, डॉ. करन कुमार, डॉ. एकादशी रजनी, डॉ. निखिल मारवाह, डॉ. प्रगति कोरानी, डॉ. विधि गुप्ता, डॉ. स्नेहा नाथावत, डॉ. मधुसूदन तिवारी और डॉ. मनोज शर्मा सहित अन्य शोधकर्ता शामिल रहे।

कार्यक्रम का संदेश स्पष्ट रहा कि विश्वविद्यालय में शोध को केवल प्रकाशन तक सीमित रखने के बजाय उसे नवाचार, बौद्धिक संपदा और चिकित्सा क्षेत्र में व्यावहारिक उपयोग तक पहुंचाने पर जोर दिया जा रहा है।

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