RGHS में प्री-ऑथराइजेशन से क्लेम 47% घटे
राजस्थान गवर्नमेंट हेल्थ स्कीम (RGHS) में 15 जुलाई से लागू प्री-ऑथराइजेशन व्यवस्था के बाद 2,000 रुपये से अधिक की जांचों पर निगरानी बढ़ी है। विभाग के अनुसार इससे क्लेम में 47 प्रतिशत कमी आई है। डिजिटल मॉनिटरिंग में अनियमितताएं मिलने पर नौ अस्पतालों के TMS और तीन डॉक्टरों की आईडी ब्लॉक की गई हैं।
- RGHS में प्री-ऑथराइजेशन से क्लेम 47% घटे।
- प्री-ऑथराइजेशन से 2,000 रुपये से अधिक की जांचों पर निगरानी बढ़ी।
- अनियमितता मिलने पर 9 अस्पतालों और 3 डॉक्टरों पर कार्रवाई हुई।
RGHS Claims Drop 47% After Pre-Authorization : राजस्थान में मुख्यमंत्री आयुष्मान आरोग्य योजना (RGHS) के तहत अनावश्यक जांचों और संदिग्ध क्लेम पर शिकंजा कसने के लिए डिजिटल निगरानी बढ़ाई गई है। विभाग के अनुसार, 15 जुलाई से लागू प्री-ऑथराइजेशन व्यवस्था के बाद क्लेम में 47 प्रतिशत की कमी दर्ज हुई है।
नई व्यवस्था में 2,000 रुपये से अधिक लागत वाली जांचों के लिए पहले से अनुमति लेना जरूरी किया गया है। विभाग का कहना है कि इससे जांचों की जरूरत और उनके क्लिनिकल आधार की निगरानी करना आसान हुआ है।
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मॉनिटरिंग के दौरान ऐसे मामले भी सामने आए, जहां प्री-ऑथराइजेशन से बचने के लिए जांचें अलग-अलग दिनों में लिखी गईं। कुछ मरीजों को तीन दिन के भीतर बार-बार अस्पताल बुलाया गया। विभाग के अनुसार, इस तरह की गतिविधियों की डिजिटल सिस्टम के जरिए पहचान कर कार्रवाई की जा रही है।
जांच के बाद 9 अस्पतालों का TMS और 3 डॉक्टरों की डॉक्टर आईडी ब्लॉक की गई है। कोटा में दो अस्पतालों के मामलों में एक ही डॉक्टर के एक ही दिन दोनों जगह काम करने की जानकारी सामने आई। संबंधित डॉक्टर की आईडी भी ब्लॉक की गई।
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अलवर और जोधपुर में कुछ अस्पतालों के प्रिस्क्रिप्शन की जांच के दौरान अलग-अलग हैंडराइटिंग और सिग्नेचर पैटर्न मिलने की बात सामने आई। कुछ मामलों में डॉक्टर की सील और हस्ताक्षर के इस्तेमाल को लेकर भी विभाग ने अनियमितता दर्ज की।
दौसा में एक अस्पताल पर पर्याप्त क्लिनिकल आधार के बिना जांचें लिखने और जरूरत से अधिक जांच की सलाह देने का मामला सामने आया। एक अन्य मामले में डिजिटल और मैनुअल प्रिस्क्रिप्शन के सिग्नेचर में अंतर पाया गया।
विभाग के मुताबिक, अलवर में करीब 65 मामलों में पॉलीइथिलीन ग्लाइकोल लिखे जाने और कई मामलों में इसके लिए क्लिनिकल इंडिकेशन दर्ज नहीं होने की जानकारी मिली। इसी तरह कुछ मरीजों में स्पष्ट लक्षण या डायग्नोसिस के बिना सीरम आयरन जांच लिखे जाने की बात भी सामने आई।
बीकानेर में मरीजों की शिकायतों के बावजूद बार-बार समान जांचें लिखे जाने के मामले में संबंधित डॉक्टर की आईडी ब्लॉक की गई। जयपुर में अलग हैंडराइटिंग मिलने के बाद एक डॉक्टर की आईडी पर कार्रवाई हुई, जबकि उदयपुर के एक अस्पताल का TMS भी विभिन्न मामलों में ब्लॉक किया गया।
चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग की प्रमुख शासन सचिव गायत्री राठौड़ ने कहा कि RGHS में मरीजों को गुणवत्तापूर्ण उपचार देने के साथ योजना के नियमों का पालन सुनिश्चित करना भी जरूरी है। वहीं RGHS CEO हरजीलाल अटल के अनुसार, डिजिटल सिस्टम से अस्पतालों और डॉक्टरों की गतिविधियों की निगरानी की जा रही है।
RGHS प्रोजेक्ट अधिकारी डॉ. निधि पटेल ने बताया कि प्री-ऑथराइजेशन व्यवस्था के बाद क्लेम में 47 प्रतिशत की कमी दर्ज हुई है। विभाग के अनुसार, इस पूरी कार्रवाई का उद्देश्य योजना में पारदर्शिता बढ़ाना, अनावश्यक जांचों को रोकना और मरीजों के हितों की सुरक्षा करना है।



