रीको ने आसान की औद्योगिक जमीन लौटाने की राह

राजस्थान में लंबे समय से खाली पड़े औद्योगिक भूखंडों को दोबारा उपयोग में लाने के लिए रीको ने अहम कदम उठाया है। सरकारी विभागों, निगमों, बोर्ड, सोसायटी और पीएसयू के लिए भूमि सरेंडर की प्रक्रिया आसान की गई है। संशोधित नियमों के तहत पात्र संस्थाओं को भूखंड लौटाने पर प्रचलित आवंटन दर की 50 प्रतिशत भूमि लागत भुगतान का प्रावधान किया गया है।

  • रीको ने औद्योगिक भूखंड सरेंडर की प्रक्रिया आसान की।
  • सरकारी विभागों और पीएसयू को भूमि लौटाने का मिलेगा अवसर।
  • औद्योगिक जमीन के दोबारा उपयोग से निवेश और रोजगार बढ़ने की उम्मीद।

RIICO paves the way for the return of industrial land : राजस्थान में लंबे समय से अनुपयोगी पड़े औद्योगिक भूखंडों को फिर से औद्योगिक गतिविधियों में लाने के लिए राजस्थान स्टेट इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट एंड इन्वेस्टमेंट कॉरपोरेशन (रीको) ने नई पहल की है। इसके तहत सरकारी विभागों और सार्वजनिक क्षेत्र से जुड़ी संस्थाओं के लिए आवंटित जमीन को सरेंडर करने की प्रक्रिया को आसान बनाया गया है।

रीको ने डिस्पोजल ऑफ लैंड रूल्स, 1979 के नियम 18(जी)(2) में आंशिक संशोधन किया है। इस बदलाव के बाद ऐसे संस्थानों के लिए लंबे समय से अनुपयोगी पड़े भूखंड वापस करने का रास्ता साफ हो गया है, जिन्हें पहले निर्धारित शर्तों के कारण जमीन का इस्तेमाल करने में परेशानी आ रही थी।

किन संस्थाओं को मिलेगा लाभ?

नए प्रावधान का लाभ सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों (PSU), निगमों, बोर्ड, सोसायटी तथा केंद्र और राज्य सरकार के विभागों को मिल सकेगा। इन संस्थाओं को कई मामलों में विशेष उद्देश्यों के लिए टोकन दर या रियायती दर पर औद्योगिक भूमि आवंटित की गई थी।

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लेकिन निर्धारित उपयोग की शर्तों के कारण कुछ भूखंडों का अपेक्षित इस्तेमाल नहीं हो पाया। वहीं, जमीन वापस करने के लिए स्पष्ट एग्जिट पॉलिसी नहीं होने से संबंधित संस्थाओं के सामने भी मुश्किल बनी हुई थी। अब संशोधित व्यवस्था से ऐसे भूखंडों को स्वेच्छा से रीको को वापस करने का विकल्प मिलेगा।

सरेंडर पर 50 प्रतिशत भूमि लागत का प्रावधान

नए नियमों के अनुसार, पात्र संस्था द्वारा भूखंड सरेंडर करने पर रीको की ओर से औद्योगिक क्षेत्र की मौजूदा भूमि आवंटन दर की 50 प्रतिशत राशि के बराबर भूमि लागत का भुगतान किया जाएगा।

इसके अलावा सर्विस चार्ज, इकोनॉमिक रेंट और लैंड प्रीमियम पर रिबेट से संबंधित ब्याज सहित बकाया या अवैतनिक राशि में भी राहत का प्रावधान किया गया है। यानी जमीन लौटाने की प्रक्रिया को संस्थाओं के लिए पहले की तुलना में अधिक व्यावहारिक बनाया गया है।

कब्जा सौंपने के बाद होगा भुगतान

संशोधित प्रावधानों में यह भी स्पष्ट किया गया है कि भूखंड रीको को वापस करने पर देय राशि का भुगतान भूमि का वास्तविक कब्जा सुपुर्द करने के बाद किया जाएगा। इससे सरेंडर प्रक्रिया में जमीन की वापसी और भुगतान के बीच की प्रक्रिया भी स्पष्ट होगी।

रीको की इस पहल का एक अहम उद्देश्य ऐसे औद्योगिक भूखंडों को वापस हासिल करना है, जो लंबे समय से उपयोग में नहीं आ रहे हैं। जमीन रीको के पास लौटने के बाद उसे नए उद्यमियों और निवेशकों को आवंटित किए जाने की संभावना रहेगी।

नए निवेश और रोजगार को मिल सकती है गति

अनुपयोगी जमीन को दोबारा औद्योगिक गतिविधियों में लाने से औद्योगिक क्षेत्रों में उपलब्ध भूमि का बेहतर इस्तेमाल हो सकेगा। इसके साथ ही नए निवेशकों को जमीन उपलब्ध कराने, औद्योगिक गतिविधियों को बढ़ाने और राज्य में आर्थिक गतिविधियों को गति देने में मदद मिलने की उम्मीद है।

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रीको के इस कदम से एक ओर सरकारी और सार्वजनिक क्षेत्र की संस्थाओं के लिए जमीन सरेंडर करना आसान होगा, वहीं दूसरी ओर लंबे समय से खाली पड़े औद्योगिक भूखंड नए उद्योगों के लिए उपलब्ध हो सकेंगे। इससे भविष्य में निवेश और रोजगार के नए अवसर पैदा होने की संभावना है।

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