बीकानेर हाउस में तीजोत्सव का समापन, बिक्री ने बनाया नया रिकॉर्ड

नई दिल्ली के बीकानेर हाउस में दस दिनों तक चला तीजोत्सव-2026 सोमवार को उत्साह के साथ संपन्न हुआ। मेले में राजस्थान के दस्तकारों, हस्तशिल्प कलाकारों और महिला स्वयं सहायता समूहों के उत्पादों के साथ खानपान की भी खूब मांग रही। इस दौरान स्टॉल्स पर 1.30 करोड़ रुपये से अधिक की रिकॉर्ड बिक्री दर्ज हुई, जिससे कलाकारों और आयोजकों में खुशी की लहर दिखी।

  • तीजोत्सव 2026 में 1.30 करोड़ रुपये से अधिक की रिकॉर्ड बिक्री हुई।
  • बीकानेर हाउस में राजस्थान के हस्तशिल्प और खानपान ने लोगों का ध्यान खींचा।
  • तीजोत्सव में महिला स्वयं सहायता समूहों के उत्पाद भी खूब बिके।

Conclusion of Teejotsav at Bikaner House : नई दिल्ली स्थित बीकानेर हाउस में राजस्थान की कला, संस्कृति, हस्तशिल्प और खानपान का दस दिवसीय उत्सव सोमवार को संपन्न हो गया। तीजोत्सव-2026 के दौरान अलग-अलग क्षेत्रों से आए दस्तकारों और कलाकारों को लोगों का अच्छा रिस्पॉन्स मिला। मेले में हस्तशिल्प, परिधानों और खानपान से जुड़े स्टॉल्स पर 1 करोड़ 30 लाख रुपये से अधिक की रिकॉर्ड बिक्री हुई।

बीकानेर हाउस में तीजोत्सव का समापन, बिक्री ने बनाया नया रिकॉर्ड
Image Source : Via Dipr

मेले की शुरुआत 15 अगस्त को प्रमुख आवासीय आयुक्त रोहित कुमार ने दीप प्रज्वलित कर की थी। शुरुआत से ही यहां लोगों की अच्छी भीड़ देखने को मिली। तीज माता की सवारी, लोक कलाकारों की प्रस्तुतियां, पारंपरिक खेल और राजस्थानी संगीत कार्यक्रम के प्रमुख आकर्षण रहे। प्रसिद्ध लोक कलाकार कुतले खान ने सूफी और राजस्थानी लोकगीतों की प्रस्तुति देकर माहौल को खास बना दिया।

बीकानेर हाउस में तीजोत्सव का समापन, बिक्री ने बनाया नया रिकॉर्ड
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आयोजन के समापन पर प्रमुख आवासीय आयुक्त रोहित कुमार ने दस्तकारों और कलाकारों को रिकॉर्ड बिक्री के लिए बधाई दी। उन्होंने कहा कि इस तरह के आयोजन राजस्थान के हुनर को बड़े शहरों के बाजार और ग्राहकों से जोड़ने में अहम भूमिका निभाते हैं। मेले में लोगों ने खरीदारी के साथ राजस्थान की विविध लोक परंपराओं का भी आनंद लिया।

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रूडा के सलाहकार ओम प्रकाश के अनुसार, मेले में रूडा की ओर से लगाए गए 25 हस्तशिल्प और राजस्थानी परिधानों के स्टॉल्स पर लोगों ने जमकर खरीदारी की। उनके मुताबिक पिछले वर्षों की तुलना में इस बार बिक्री का आंकड़ा काफी बेहतर रहा।

महिला स्वयं सहायता समूहों के उत्पाद भी मेले में आकर्षण का केंद्र रहे। राजीविका की अनुपमा सक्सेना ने बताया कि दिल्ली आए समूहों से जुड़ी महिलाओं ने 15 स्टॉल्स लगाए थे। इनमें हैंडब्लॉक बेडशीट, सूट, साड़ियां, कंगन और ज्वैलरी, मोजड़ियां, लाख की वस्तुएं और चमड़े से बने सामान शामिल थे। इन उत्पादों के साथ राजस्थानी व्यंजनों को भी लोगों ने पसंद किया।

सरस के दुग्ध उत्पादों की भी मेले में अच्छी मांग रही। इनकी करीब 3 लाख रुपये से अधिक की बिक्री हुई। अलग-अलग जिला दुग्ध संघों से आई मिठाइयों और डेयरी उत्पादों में अलवर का कलाकंद, बीकानेर के रसगुल्ले, गुलाब जामुन, गाय का घी, छाछ, लस्सी, पनीर और श्रीखंड लोगों की पसंद बने।

तीजोत्सव में केंद्र और राज्य सरकार से जुड़े कई वरिष्ठ अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों ने भी पहुंचकर राजस्थान की कला एवं संस्कृति को देखा। संयुक्त आवासीय आयुक्त रिंकू मीना ने बताया कि केंद्रीय मंत्री अर्जुन राम मेघवाल, भागीरथ चौधरी, सांसदों तथा राजस्थान और केंद्र सरकार के कई वरिष्ठ अधिकारियों ने मेले का अवलोकन किया। सभी ने राजस्थान की पारंपरिक कला और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों की सराहना की।

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दस दिनों तक चले इस आयोजन ने एक बार फिर दिखाया कि राजस्थान की पारंपरिक कला और स्थानीय उत्पादों की मांग राजधानी जैसे बड़े बाजार में भी मजबूत है। रिकॉर्ड बिक्री ने जहां दस्तकारों का उत्साह बढ़ाया, वहीं ऐसे आयोजनों को आगे भी बढ़ाने की उम्मीदें मजबूत हुई हैं।

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