वंदे मातरम् पर सियासी घमासान, कांग्रेस के बहिष्कार पर BJP का हमला

राजस्थान विधानसभा के मानसून सत्र के पहले दिन वंदे मातरम् के पूर्ण गायन के दौरान कांग्रेस विधायकों की गैरमौजूदगी को लेकर भाजपा नेताओं ने तीखी प्रतिक्रिया दी। मंत्रियों और मुख्य सचेतक ने इसे लोकतांत्रिक परंपराओं के खिलाफ बताया, जबकि कांग्रेस के सदन से बाहर रहने और प्रदर्शन करने पर भी सवाल उठाए। इसी दौरान खेजड़ी संरक्षण और यूसीसी जैसे मुद्दे भी चर्चा में रहे।

  • वंदे मातरम् के दौरान कांग्रेस की गैरमौजूदगी पर भाजपा का निशाना।
  • कांग्रेस से सदन में लौटकर मुद्दों पर चर्चा करने की अपील।
  • यूसीसी और खेजड़ी संरक्षण से जुड़े विधेयकों पर सरकार का फोकस।

BJP attacks Congress over boycott : राजस्थान विधानसभा के मानसून सत्र की शुरुआत ही राजनीतिक टकराव के साथ हुई। सदन की कार्यवाही के पहले दिन वंदे मातरम् के पूर्ण गायन के दौरान कांग्रेस विधायकों की गैरमौजूदगी को लेकर भाजपा ने कांग्रेस पर निशाना साधा। नगरीय विकास एवं स्वायत्त शासन मंत्री झाबर सिंह खर्रा, गृह राज्य मंत्री जवाहर सिंह बेढ़म और मुख्य सचेतक जोगेश्वर गर्ग ने कांग्रेस के रुख को लेकर अलग-अलग बयान दिए।

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भाजपा नेताओं का कहना है कि विपक्ष को सरकार की नीतियों से असहमति जताने का पूरा अधिकार है, लेकिन इसके लिए विधानसभा का मंच सबसे उचित स्थान है। उनका आरोप है कि कांग्रेस ने सदन के भीतर चर्चा करने के बजाय बाहर प्रदर्शन का रास्ता चुना।

झाबर सिंह खर्रा ने कहा कि लोकतंत्र में विपक्ष अपनी बात मजबूती से रख सकता है और सरकार की नीतियों पर सवाल भी उठा सकता है। उनके मुताबिक, यदि कांग्रेस के पास किसी मुद्दे पर तथ्य और तर्क हैं तो उसे सदन में आकर चर्चा करनी चाहिए। उन्होंने कांग्रेस के सदन से दूर रहने को उसके राजनीतिक रवैये से जोड़ते हुए कहा कि जनता विपक्ष को विधानसभा में अपनी आवाज उठाने के लिए चुनती है।

गृह राज्य मंत्री जवाहर सिंह बेढ़म ने वंदे मातरम् के दौरान कांग्रेस की अनुपस्थिति को लेकर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस ने एक वर्ग को खुश करने की राजनीति के चलते राष्ट्रीय गीत के पूर्ण गायन से दूरी बनाई। बेढ़म ने कहा कि सदन में जनहित के मुद्दों पर चर्चा और समाधान के लिए सभी दलों की भागीदारी जरूरी है।

उन्होंने राज्य सरकार के कामकाज का उल्लेख करते हुए कहा कि मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में कानून-व्यवस्था, बिजली, पानी, रोजगार, किसान कल्याण, महिला सशक्तीकरण और गरीबों से जुड़े विषयों पर काम किया जा रहा है। बेढ़म ने विपक्ष से विकास के मुद्दों पर सदन में चर्चा करने की बात कही।

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वहीं, मुख्य सचेतक जोगेश्वर गर्ग ने विधानसभा के प्रवेश द्वार को लेकर उठे विवाद पर सफाई दी। उन्होंने कहा कि विधानसभा के सभी गेट हर समय खुले रखना जरूरी नहीं होता और सुरक्षा व व्यवस्था के हिसाब से कुछ द्वार बंद या खुले रखे जाते हैं। उनके अनुसार, गेट नंबर 1 और 7 खुले थे, जहां से विधायक सदन में पहुंच सकते थे। इसके बावजूद एक विशेष गेट खोलने को लेकर विवाद खड़ा किया गया।

गर्ग ने कहा कि कांग्रेस को विधानसभा के भीतर आकर अपने मुद्दे रखने चाहिए थे। उनका आरोप है कि विपक्ष सदन में चर्चा के बजाय बाहर प्रदर्शन करने में लगा रहा। उन्होंने कहा कि सरकार तथ्यपूर्ण और उपयोगी सुझावों पर विचार करने के लिए तैयार है।

विधानसभा के मुख्य द्वार तक प्रदर्शनकारियों के पहुंचने को लेकर भी गर्ग ने आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि विधानसभा की कार्यवाही के दौरान प्रदर्शन की भी निर्धारित मर्यादा और नियम होते हैं। उनके मुताबिक, संवैधानिक संस्थाओं की गरिमा और कानून-व्यवस्था बनाए रखना सभी की जिम्मेदारी है।

सियासी बयानबाजी के बीच विधानसभा में पर्यावरण संरक्षण से जुड़े मुद्दे को भी महत्वपूर्ण बताया गया। गर्ग ने कहा कि खेजड़ी समेत अन्य वृक्षों को कानूनी संरक्षण देने की दिशा में सरकार कदम उठा रही है। राजस्थान की परंपरा में ओरण और पेड़-पौधों के संरक्षण का विशेष महत्व रहा है और सरकार इस परंपरा को कानूनी आधार देने का प्रयास कर रही है।

मुख्य सचेतक ने कहा कि खेजड़ी संरक्षण से जुड़ा विषय केवल पर्यावरण तक सीमित नहीं है, बल्कि राजस्थान की संस्कृति और आने वाली पीढ़ियों से भी जुड़ा है। उन्होंने विपक्ष से ऐसे विधेयकों पर सदन में मौजूद रहकर चर्चा और सुझाव देने की अपील की।

इसी सत्र में समान नागरिक संहिता यानी यूसीसी से जुड़े प्रस्ताव को आगे बढ़ाने के संकेत भी दिए गए हैं। गर्ग ने कहा कि संबंधित विधेयक विधानसभा में पेश किया जा सकता है और सरकार की कोशिश रहेगी कि इसी सत्र में इसे पारित कराने की दिशा में आगे बढ़ा जाए।

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इस तरह मानसून सत्र के पहले दिन ही वंदे मातरम्, विधानसभा में विपक्ष की मौजूदगी, प्रदर्शन और प्रवेश व्यवस्था जैसे मुद्दे राजनीतिक बहस के केंद्र में रहे। वहीं, खेजड़ी संरक्षण और यूसीसी जैसे प्रस्तावों ने आने वाले दिनों में सदन की कार्यवाही के महत्वपूर्ण मुद्दों की तस्वीर भी साफ कर दी है।

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