75 साल की विरासत : विधानसभा में गूंजे ऐतिहासिक कानूनों के किस्से

राजस्थान विधानसभा के अमृत महोत्सव के दूसरे सत्र में पूर्व और वर्तमान जनप्रतिनिधियों ने राज्य के महत्वपूर्ण कानूनों, लोकतांत्रिक परंपराओं और संसदीय गरिमा पर अपने अनुभव साझा किए। वरिष्ठ नेताओं ने नए विधायकों को अध्ययनशील बनने, सदन की मर्यादा बनाए रखने और जनहित से जुड़े कानूनों की गहराई को समझकर प्रभावी भूमिका निभाने का संदेश दिया।

  • 75 साल की विरासत पर वरिष्ठ विधायकों ने ऐतिहासिक संस्मरण साझा किए।
  • ऐतिहासिक कानूनों के सामाजिक और जनहितकारी प्रभावों पर विस्तृत चर्चा हुई।
  • विधानसभा में नए सदस्यों को अध्ययन और संसदीय मर्यादा का संदेश दिया गया।

Tales of historic laws echoed in the Legislative Assembly : राजस्थान विधानसभा के 75 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में आयोजित अमृत महोत्सव के दूसरे सत्र में लोकतांत्रिक परंपराओं, संसदीय मूल्यों और राज्य के ऐतिहासिक कानूनों पर व्यापक चर्चा हुई। इस विशेष सत्र में वर्तमान और पूर्व जनप्रतिनिधियों ने अपने विधायी अनुभव साझा करते हुए बताया कि समय-समय पर बने कानूनों ने प्रदेश के सामाजिक, आर्थिक और प्रशासनिक ढांचे को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

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सत्र का संचालन विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी, पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे और राष्ट्रमंडल संसदीय संघ के सचिव संदीप शर्मा ने किया। कार्यक्रम में विभिन्न कालखंडों में पारित जनहितकारी अधिनियमों के व्यावहारिक पक्षों पर विचार-विमर्श हुआ और उनकी वर्तमान समय में प्रासंगिकता पर भी प्रकाश डाला गया।

पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने विधानसभा की लोकतांत्रिक परंपरा को याद करते हुए कहा कि सदन की गरिमा केवल बहस से नहीं, बल्कि गंभीर अध्ययन और सकारात्मक सोच से मजबूत होती है। उन्होंने नए विधायकों से पुस्तकालय का अधिक उपयोग करने और विषयों की गहराई से तैयारी कर सदन में भागीदारी निभाने का आग्रह किया। उन्होंने यह भी कहा कि विचारों में मतभेद लोकतंत्र का हिस्सा हैं, लेकिन व्यक्तिगत संबंधों में सम्मान और मानवीयता हमेशा सर्वोपरि रहनी चाहिए।

पूर्व विधायक राजेंद्र राठौड़ ने राजस्थान कोचिंग सेंटर (नियंत्रण एवं विनियमन) अधिनियम, 2025 का उल्लेख करते हुए कहा कि यह कानून विद्यार्थियों को सुरक्षित और बेहतर शैक्षणिक वातावरण उपलब्ध कराने की दिशा में अहम कदम है। उन्होंने बताया कि इसके जरिए कोचिंग संस्थानों की जवाबदेही तय करने, भ्रामक विज्ञापनों पर रोक लगाने और सुरक्षा मानकों को अनिवार्य बनाने का प्रयास किया गया है।

जयपुर ग्रामीण से सांसद राव राजेंद्र सिंह ने राजस्थान टेनेंसी अधिनियम, 1955 को राज्य के इतिहास का महत्वपूर्ण कानून बताते हुए कहा कि इसने जमींदारी व्यवस्था समाप्त होने के बाद किसानों और काश्तकारों के अधिकारों को मजबूत आधार दिया। उन्होंने विशेष रूप से अनुसूचित जाति और जनजाति की भूमि को कानूनी संरक्षण मिलने को इस अधिनियम की बड़ी उपलब्धि बताया।

पूर्व विधानसभा अध्यक्ष दीपेंद्र सिंह शेखावत ने राजस्थान प्लेटफॉर्म आधारित गिग कर्मकार (रजिस्ट्रीकरण एवं कल्याण) अधिनियम, 2023 को देश में एक अग्रणी पहल बताया। उन्होंने कहा कि इस कानून के माध्यम से डिजिटल प्लेटफॉर्म से जुड़े लाखों गिग वर्कर्स को सामाजिक सुरक्षा और कल्याण योजनाओं से जोड़ने का रास्ता खुला है।

पूर्व मंत्री कालीचरण सराफ ने राजस्थान विधि विरुद्ध धर्म-संपरिवर्तन प्रतिषेध अधिनियम, 2025 की भावना पर अपने विचार रखते हुए इसे सामाजिक सद्भाव और धार्मिक स्वतंत्रता की सुरक्षा से जुड़ा महत्वपूर्ण कानून बताया। वहीं पूर्व विधायक तारा भंडारी ने राजस्थान सती (निवारण) अधिनियम, 1987 को महिला अधिकारों और सामाजिक सुधार की दिशा में ऐतिहासिक कदम बताया।

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कार्यक्रम के दौरान पूर्व मंत्री डॉ. बी.डी. कल्ला ने राजस्थान प्राथमिक शिक्षा अधिनियम, 1964 की चर्चा करते हुए कहा कि इस कानून ने प्राथमिक शिक्षा के विस्तार और आत्मनिर्भर शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इसके अलावा राजस्थान पंचायत समिति एवं जिला परिषद अधिनियम, सहकारी समितियां अधिनियम और लैंड रिवेन्यू एक्ट जैसे महत्वपूर्ण कानूनों पर भी वरिष्ठ जनप्रतिनिधियों ने अपने अनुभव साझा किए और उनके दीर्घकालिक प्रभावों पर प्रकाश डाला।

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