आईआईएचएमआर यूनिवर्सिटी में बढ़ीं महिला रिसर्चर्स, पीएचडी बैच में बना नया रिकॉर्ड

आईआईएचएमआर यूनिवर्सिटी के 2026 के पीएचडी बैच में इस बार महिलाओं की भागीदारी उल्लेखनीय रूप से बढ़ी है। नए बैच में 50 प्रतिशत महिला रिसर्च स्कॉलर्स शामिल हैं। संस्थान का कहना है कि स्वास्थ्य क्षेत्र में शोध और नीति निर्माण में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी बेहतर और साक्ष्य-आधारित समाधान तैयार करने की दिशा में सकारात्मक संकेत है।

  • आईआईएचएमआर यूनिवर्सिटी के नए पीएचडी प्रोग्राम में 50% महिला रिसर्च स्कॉलर्स शामिल।
  • पिछले बैच की तुलना में महिलाओं की भागीदारी में उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज की गई।
  • हेल्थ रिसर्च से जुड़े राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय संस्थानों के प्रोफेशनल्स ने लिया प्रवेश।

Women Researchers Rise at IIHMR PhD Program: जयपुर स्थित आईआईएचएमआर यूनिवर्सिटी के 13वें पीएचडी बैच (2026) में इस बार महिला शोधार्थियों की भागीदारी ने नया मुकाम हासिल किया है। संस्थान के अनुसार, नए बैच में कुल 20 रिसर्च स्कॉलर्स ने प्रवेश लिया है, जिनमें आधी संख्या महिलाओं की है। पिछले बैच की तुलना में यह वृद्धि उल्लेखनीय मानी जा रही है।

इस वर्ष पीएचडी कार्यक्रम के लिए देश और विदेश से 120 से अधिक आवेदन प्राप्त हुए। चयनित शोधार्थियों में विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO), स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (ICMR), नीति आयोग, एम्स जम्मू, फोर्टिस हेल्थकेयर, नारायणा हेल्थ, एस्टर मेडसिटी और अन्य प्रतिष्ठित संस्थानों से जुड़े पेशेवर शामिल हैं।

आईआईएचएमआर यूनिवर्सिटी के प्रेसिडेंट डॉ. पी. आर. सोडानी ने कहा कि शोध के क्षेत्र में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी संस्थान के लिए उत्साहजनक है। उन्होंने बताया कि स्वास्थ्य क्षेत्र की जटिल चुनौतियों का समाधान साक्ष्य-आधारित शोध के माध्यम से ही संभव है और विविध अनुभव रखने वाले शोधार्थी इसमें महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

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उन्होंने जानकारी दी कि विश्वविद्यालय का पीएचडी कार्यक्रम पब्लिक हेल्थ, हॉस्पिटल एवं हेल्थ मैनेजमेंट, डेवलपमेंट मैनेजमेंट, डिजिटल हेल्थ और फार्मास्युटिकल मैनेजमेंट जैसे प्रमुख विषयों में शोध को बढ़ावा देता है। अब तक विश्वविद्यालय 52 शोधार्थियों को पीएचडी की उपाधि प्रदान कर चुका है, जबकि उनके कई शोध पत्र राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय जर्नल्स में प्रकाशित हो चुके हैं।

ओरिएंटेशन कार्यक्रम के दौरान पीएचडी प्रोग्राम की कोऑर्डिनेटर डॉ. काजल सितलानी ने नए शोधार्थियों का स्वागत करते हुए उन्हें समाजहित में उपयोगी और गुणवत्तापूर्ण शोध करने के लिए प्रेरित किया। वहीं, प्रोवोस्ट डॉ. हिमाद्रि सिन्हा ने विश्वविद्यालय के शोध ढांचे, अकादमिक नियमों और उपलब्ध शोध सुविधाओं की विस्तृत जानकारी साझा की।

कार्यक्रम का समापन रजिस्ट्रार सुरेश चंद ठाकुर के धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ। विश्वविद्यालय ने उम्मीद जताई कि नया बैच स्वास्थ्य क्षेत्र में शोध और नीति निर्माण से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों पर प्रभावी योगदान देगा।

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