प्रजनन फैसलों पर महिलाओं का हक, विशेषज्ञों ने बताया जरूरी
जयपुर में फोगसी फर्टिलिटी रेगुलेशन कॉन्क्लेव-2026 के समापन पर विशेषज्ञों ने महिलाओं के प्रजनन स्वास्थ्य और अधिकारों पर चर्चा की। डॉ. अंजू सोनी ने कहा कि फर्टिलिटी रेगुलेशन को जनसंख्या नियंत्रण से आगे महिलाओं की पसंद, स्वास्थ्य और अधिकारों से जोड़कर देखना चाहिए। सम्मेलन में गर्भनिरोध, सुरक्षित मातृत्व, स्वास्थ्य सेवाओं और जागरूकता पर भी विशेष जोर दिया गया।
- फोगसी फर्टिलिटी रेगुलेशन कॉन्क्लेव-2026 में प्रजनन स्वास्थ और महिलाओं के अधिकारों पर मंथन।
- डॉ. अंजू सोनी ने कहा- हर महिला को मातृत्व और बच्चों के नियोजन का होना चाहिए पूर्ण अधिकार।
- प्रमुख स्वास्थ्य सचिव गायत्री राठौड़ ने 35 की उम्र के बाद महिला स्वास्थ्य और सरकारी पहलों पर की चर्चा।
Women’s right to reproductive decisions : राजस्थान इंटरनेशनल सेंटर में आयोजित तीन दिवसीय फोगसी फर्टिलिटी रेगुलेशन कॉन्क्लेव-2026 का रविवार को समापन हो गया। सम्मेलन में देशभर से आए स्त्री रोग विशेषज्ञों, चिकित्सा विशेषज्ञों, नर्सिंग और पैरामेडिकल प्रोफेशनल्स ने महिलाओं के प्रजनन स्वास्थ्य, फर्टिलिटी रेगुलेशन और प्रजनन अधिकारों से जुड़े कई अहम मुद्दों पर चर्चा की।
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कॉन्क्लेव की आयोजन अध्यक्ष और फोगसी की उपाध्यक्ष डॉ. अंजू सोनी ने कहा कि प्रजनन से जुड़े फैसलों को केवल जनसंख्या नियंत्रण के नजरिए से नहीं देखा जाना चाहिए। उनके मुताबिक महिलाओं के अधिकार, स्वास्थ्य और व्यक्तिगत पसंद को भी इन फैसलों के केंद्र में रखना जरूरी है।
डॉ. सोनी ने कहा कि हर महिला को यह तय करने का अधिकार होना चाहिए कि वह कब मां बनना चाहती है और परिवार में कितने बच्चों की योजना बनाना चाहती है। इसके लिए महिलाओं तक सही और भरोसेमंद जानकारी पहुंचाने के साथ उचित चिकित्सकीय परामर्श और सुरक्षित एवं प्रभावी विकल्प उपलब्ध कराना जरूरी है। उन्होंने कहा कि बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं और जागरूकता महिलाओं को अपने प्रजनन संबंधी निर्णय खुद लेने में सक्षम बना सकती हैं।
कॉन्क्लेव के दौरान राजस्थान सरकार की प्रमुख स्वास्थ्य सचिव गायत्री राठौड़ ने भी फायरसाइड चैट में हिस्सा लिया। डॉ. अंजू सोनी के संचालन में हुए इस संवाद में गर्भनिरोधक सेवाओं, गर्भावस्था के दौरान देखभाल और 35 वर्ष की उम्र के बाद महिलाओं की बदलती स्वास्थ्य जरूरतों पर चर्चा हुई।
गायत्री राठौड़ ने महिलाओं के स्वास्थ्य को बेहतर बनाने के लिए राज्य सरकार की ओर से संचालित विभिन्न पहलों की जानकारी साझा की। उन्होंने स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक प्रभावी बनाने के लिए सरकार, निजी चिकित्सा क्षेत्र और विशेषज्ञों के बीच बेहतर समन्वय की जरूरत पर जोर दिया।
तीन दिवसीय सम्मेलन में केवल चर्चा तक सीमित रहने के बजाय व्यावहारिक प्रशिक्षण पर भी फोकस किया गया। वैज्ञानिक सत्रों, कौशल आधारित कार्यशालाओं, नर्सिंग एवं पैरामेडिकल प्रशिक्षण और जनजागरूकता कार्यक्रमों के जरिए प्रजनन स्वास्थ्य से जुड़ी नई चिकित्सा जानकारी और कौशल पर विचार-विमर्श हुआ।
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‘लाइव बाय चॉइस–डिलीवर विद स्किल’ संदेश के साथ आयोजित इस कॉन्क्लेव में महिला-केंद्रित प्रजनन स्वास्थ्य सेवाओं को प्राथमिकता देने और महिलाओं को अपने स्वास्थ्य एवं प्रजनन से जुड़े फैसलों के लिए पर्याप्त जानकारी उपलब्ध कराने पर जोर दिया गया। विशेषज्ञों ने माना कि जागरूकता, परामर्श और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं का बेहतर तालमेल महिलाओं के लिए सुरक्षित और सूचित प्रजनन निर्णयों की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।



