कैनवास पर उतरी नन्हीं कल्पनाएं, बच्चों की कला ने जीता जयपुर का दिल
जयपुर के जवाहर कला केंद्र में बाल चित्रकारों की प्रतिभा देखने को मिली, जहां राजा रामदेव पोद्दार राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय के विद्यार्थियों ने 100 से अधिक पेंटिंग्स प्रदर्शित कीं। प्रदर्शनी में करीब एक हजार दर्शक पहुंचे और युवा कलाकारों की खूब सराहना की। खास बात यह रही कि कलाप्रेमियों ने मौके पर ही लगभग 10 पेंटिंग्स खरीदकर बच्चों का उत्साह बढ़ाया।
- बाल चित्रकारों की 100 से अधिक पेंटिंग्स ने दर्शकों का ध्यान खींचा।
- जयपुर कला प्रदर्शनी में करीब एक हजार लोगों ने युवा कलाकारों को सराहा।
- जवाहर कला केंद्र में लगभग 10 पेंटिंग्स मौके पर ही खरीदी गईं।
Tiny imaginations brought to life on canvas : शहर के जवाहर कला केंद्र में मंगलवार को बाल प्रतिभाओं के रंग और कल्पना ने कला प्रेमियों का दिल जीत लिया। राजा रामदेव पोद्दार राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय, गांधीनगर के कला विभाग की ओर से आयोजित एक दिवसीय प्रदर्शनी में विद्यार्थियों की तैयार की गई 100 से अधिक पेंटिंग्स प्रदर्शित की गईं।

प्रदर्शनी का उद्घाटन नोएटिक कंपनी, नोएडा के प्रबंध निदेशक राजीव त्यागी ने किया। इस मौके पर वरिष्ठ साहित्यकार फ़ारूक़ आफ़रीदी समेत बड़ी संख्या में कला प्रेमी मौजूद रहे। प्रदर्शनी देखने पहुंचे लोगों ने बच्चों की कल्पनाशीलता, रंगों के प्रयोग और चित्रों में दिखाई गई विविधता की जमकर तारीफ की।

आयोजकों के मुताबिक प्रदर्शनी में करीब एक हजार दर्शकों ने हिस्सा लिया। युवा चित्रकारों मुस्कान, बादल, अरमान आफ़रीदी, प्रियांशी, मंशिका सहित अन्य विद्यार्थियों की कलाकृतियों ने विशेष रूप से लोगों का ध्यान खींचा। बच्चों के लिए यह अनुभव इसलिए भी खास रहा, क्योंकि उनकी मेहनत को दर्शकों से सीधे सराहना मिली।
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प्रदर्शनी की सबसे उत्साहजनक बात यह रही कि करीब 10 पेंटिंग्स मौके पर ही कलाप्रेमियों ने खरीद लीं। इससे युवा कलाकारों में खासा उत्साह देखने को मिला और उन्हें अपनी कला को आगे बढ़ाने का प्रोत्साहन मिला।
विद्यालय के प्रधानाचार्य लक्ष्मनारायण झा और चित्रकला व्याख्याता ज्योति जैन ने बताया कि बाल चित्रकला को बढ़ावा देने और विद्यार्थियों को अपनी प्रतिभा पहचानने का अवसर देने के उद्देश्य से यह पहला प्रयास किया गया है। उनका कहना था कि बच्चों को मंच मिलने से उनमें आत्मविश्वास बढ़ता है और वे अपनी रचनात्मक सोच को बेहतर तरीके से सामने ला पाते हैं।
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एक दिवसीय आयोजन ने यह भी दिखाया कि स्कूल स्तर पर बच्चों को यदि सही मंच और प्रोत्साहन मिले तो उनकी कला लोगों तक आसानी से पहुंच सकती है। प्रदर्शनी में मिली सकारात्मक प्रतिक्रिया ने विद्यार्थियों के साथ विद्यालय के शिक्षकों का भी उत्साह बढ़ाया।



