टीबी मुक्त भारत की मुहिम में युवाओं की बड़ी भूमिका, ‘जोश’ टीमों की शुरुआत

टीबी के खिलाफ जागरूकता और जनभागीदारी बढ़ाने के लिए देशभर में युवाओं को अभियान से जोड़ा जा रहा है। ‘जोश’ टीमों के जरिए युवाओं को टीबी के लक्षण, समय पर जांच, पूरा इलाज और बचाव की जानकारी घर-घर पहुंचाने की जिम्मेदारी दी जाएगी। राजस्थान में पहले चरण में सात जिलों में इन टीमों का पायलट शुरू किया गया है।

  • टीबी मुक्त भारत: युवाओं की भागीदारी से जागरूकता अभियान को मिलेगी रफ्तार।
  • जोश टीम: माय भारत वॉलंटियर्स और NCC कैडेट्स समुदाय तक पहुंचाएंगे टीबी का संदेश।
  • राजस्थान: जयपुर समेत 7 जिलों में जोश टीमों का पायलट शुभारंभ।

Youth Join India’s TB-Free Mission : केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री जगत प्रकाश नड्डा ने कहा है कि टीबी मुक्त भारत का लक्ष्य केवल सरकारी प्रयासों से हासिल नहीं किया जा सकता। इसके लिए समाज और खासकर युवाओं की सक्रिय भागीदारी जरूरी है। उन्होंने कहा कि युवाओं में लोगों तक तेजी से पहुंचने और सामाजिक बदलाव लाने की क्षमता है, जिसका इस्तेमाल टीबी के खिलाफ अभियान में किया जाना चाहिए।

नई दिल्ली के भारत मंडपम में गुरुवार को ‘जोश’ यानी जाइंट स्क्वायड फॉर हेल्थ टीमों के राष्ट्रीय शुभारंभ के दौरान नड्डा ने कहा कि युवा टीबी के लक्षणों, जांच, बचाव और उपचार की जानकारी समुदाय तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभा सकते हैं। साथ ही वे बीमारी को लेकर फैली गलत धारणाओं और सामाजिक भेदभाव को कम करने में भी मददगार होंगे।

राष्ट्रीय स्तर पर पहले चरण में 11 राज्यों के 55 जिलों में जोश टीमों की शुरुआत की गई है। कार्यक्रम में केंद्रीय युवा कार्यक्रम एवं खेल तथा श्रम एवं रोजगार मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया, केंद्रीय रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ, दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता और केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव पुण्य सलिला श्रीवास्तव समेत कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।

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भारत सरकार के दिशा-निर्देशों के अनुसार प्रत्येक ब्लॉक स्तर पर जोश टीम में पांच माय भारत वॉलंटियर्स और पांच NCC कैडेट्स शामिल होंगे। इन टीमों का नेतृत्व नामित क्लास-1 अधिकारी करेंगे।

टीम के सदस्य स्थानीय लोगों से संपर्क कर टीबी के प्रमुख लक्षणों और जांच की प्रक्रिया के बारे में जानकारी देंगे। लोगों को बीमारी की आशंका होने पर समय पर जांच कराने और उपचार शुरू होने के बाद उसे पूरा करने के लिए भी प्रेरित किया जाएगा।

अभियान का एक अहम हिस्सा टीबी से जुड़े भ्रम और सामाजिक भेदभाव को दूर करना भी है। युवाओं के माध्यम से यह संदेश देने की कोशिश होगी कि बीमारी की पहचान और समय पर उपचार से इससे निपटा जा सकता है और मरीजों के साथ किसी तरह का भेदभाव नहीं होना चाहिए।

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राष्ट्रीय कार्यक्रम के साथ राजस्थान में भी जोश टीमों की गतिविधियां शुरू की गईं। राज्य में पहले चरण में अलवर, बारां, बांसवाड़ा, जयपुर, जोधपुर, उदयपुर और राजसमंद जिलों को पायलट के लिए चुना गया है।

इसके अलावा प्रदेश के अन्य जिलों में जिला स्तर पर लॉन्च और ओरिएंटेशन कार्यक्रम आयोजित किए गए। इन कार्यक्रमों में माय भारत वॉलंटियर्स और NCC कैडेट्स सहित अन्य प्रतिभागियों ने टीबी मुक्त भारत की शपथ ली।

जयपुर स्थित स्वास्थ्य भवन में चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग की प्रमुख शासन सचिव गायत्री राठौड़ की अध्यक्षता में अधिकारियों और चिकित्सकों ने राष्ट्रीय कार्यक्रम में वर्चुअल माध्यम से हिस्सा लिया। पायलट जिलों में गठित टीमों को उनकी जिम्मेदारियों और फील्ड गतिविधियों के बारे में जानकारी दी गई।

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