एसएचजी के माध्यम से महिलाओं की आर्थिक स्थिति में आ रहा है बदलाव : डॉ. सुभाष गर्ग

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डॉ. सुभाष गर्ग, Dr. Subhash Garg
डॉ. सुभाष गर्ग, Dr. Subhash Garg

भरतपुर। राजस्थान ग्रामीण आजीविका विकास परिषद द्वारा बुधवार को ऑडिटोरियम में जिले की स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं की आमुखीकरण कार्यशाला का आयोजन हुआ जिसमें मुख्य अतिथि के रूप में ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज मंत्री रमेश मीणा उपस्थित थे अध्यक्षता तकनीकी शिक्षा राज्य मंत्री डॉ. सुभाष गर्ग ने की। इस कार्यशाला में जिला कलक्टर आलोक रंजन, जिला परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी सुशील कुमार , अतिरिक्त जिला कलक्टर शहर रघुनाथ खटीक एवं संबंधित विभागों के अधिकारी उपस्थित थे।

कार्यशाला में ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज मंत्री समेश मीणा ने कहा कि स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से महिलाओं की आर्थिक एवं सामाजिक स्थिति में परिवर्तन आ रहा है लेकिन इस परिवर्तन को और तेज करने की आवश्यकता है जिसके लिये उनकी आय में और इजाफा करना होगा। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री अशोक गहलोत भी महिलाओं की आर्थिक एवं सामाजिक स्थिति में स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से बदलाव लाने के लिये निरन्तर प्रयास कर रहे हैं इसी वजह से राजीविका ने नवाचार शुरू किये हैं।

उन्होंने बताया कि आय बढाने के लिये स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं को आर्गेनिक खेती , उन्नत नस्ल के पशुओं पर आधारित डेयरी का कार्य, ग्रामीण आवश्यकता पर आधारित कुटिर उद्योगों का संचालन के अलावा शिक्षित महिलाओं को आईटीआई कराकर तकनीकी कार्य प्रारम्भ कराये जायेंगे। उन्होंने बताया कि सरकार ने निर्णय लिया है कि महात्मा गॉधी नरेगा योजना में समूह की महिलाओं को ही मेट बनाया जायेगा इसके अलावा कुछ स्वयं सहायता समूहों को फलदार पौधे लगाने का प्रशिक्षण देकर बाग लगवाये जायेंगे।

उन्होंने बताया कि विभाग प्रयास कर रहा है कि समूह की महिलाओं को अधिकाधिक एवं समय पर ऋण मिले लेकिन समूहों की महिलाओं को भी चाहिये कि वे इस ऋण को समय पर वापस भी करें। ग्रामीण विकास मंत्री ने कहा कि महिलाओं को अपने सभी बालक बालिकाओं को स्कूल भेजना होगा ताकि वे पढलिखकर परिवार व समाज के विकास में भागीदार बन सकें। विशेषरूप बालिकाओं को उच्च शिक्षा दिलानी होगी जिससे बालिकाऐं भी परिवार के विकास में शामिल हो सकें।

उन्होंने बताया कि पंचायती राज विभाग की योजनाओं का प्रचार प्रसार समूहों की महिलाओं से कराया जायेगा जिन्हें विभाग की ओर से मानदेय प्रदान किया जायेगा। आगे चलकर अन्य विभागों की योजनाओं का प्रचार प्रसार का जिम्मा भी समूहों की महिलाओं को दिया जा सकता है।

उन्होंने बताया कि आज समूहों की महिलाओं में इतनी जागृति आ गई है कि वे उन पर होने वाले अत्याचार के खिलाफ आवाज उठाने लगी हैं तथा स्वयं की रक्षा जैसा कार्य भी आसानी से कर सकती है। उन्होंने कहा कि आज समूह की महिलाओं की आय काफी कम है लेकिन इसे बढाने के लिये योजनाबद्व प्रयास किये जायेंगे। कार्यशाला में तकनीकी शिक्षा राज्य मंत्री डॉ. सुभाष गर्ग ने कहा कि महिलाऐं कर्मठता, प्रतिबद्वता एवं लगन के माध्यम से सामाजिक बदलाव ला सकती हैं।

विशेषरूप से जब महिलाऐं समूह के रूप में कार्य करती हैं तो उनमें आपसी प्रेम व भाईचारे की भावना अधिक बलवति हो जाती है और यह भावना आगे चलकर समाज को संगठित व विकसित करने में मददगार साबित होती है। उन्होंने प्रशंसा व्यक्त करते हुये कहा कि महिलाऐं ऐसे स्वरोजगार के कार्य कर रही हैं जिन पर अब तक पुरूषों का एकाधिकार था इसके अलावा कुछ महिलाओं ने तो ऐसे कार्य प्रारम्भ किये हैं जिनकी बाजार में भारी मांग है। उन्होंने बताया कि समूहों के माध्यम से महिलाओं को प्राप्त हो रही अतिरिक्त आय से उनका परिवार में सम्मान बढा है और उनकी परिवार पर निर्भरता भी कम हुई है। उन्होंने कहा कि अतिरिक्त आय से वे अब अपने बच्चों को उच्च शिक्षा भी दिला रही हैं। डॉ. गर्ग ने कहा कि आज समाज को बांटने का जो दौर चल रहा है उसे रोकने मेंमहिलाऐं अधिक कारगर सिद्व हो सकती हैं क्योंकि वे भ्रामक प्रचार में नहीं आती हैं।

उन्होंने कहा कि महिलाओं में आजीविका के माध्यम से तेजी बदलाव आ रहा है और विभाग भी नवाचार कर उनकी आय में वृद्वि का प्रयास कर रहा है। उन्होंने कहा कि जिला स्तर पर आयोजित होने वाली ऐसी कार्यशालाओं के माध्यम से महिलाओं को एकदूसरे के रोजगार की जानकारी तो प्राप्त होती ही है साथ ही सामाजिक एकता व भाईचारे की भावना भी बलवती होती है।

इस अवसर जिला कलक्टर आलोक रंजन ने कहा कि छोटे छोटे स्वरोजगारों के माध्यम से महिलाओं में आत्मविश्वास की भावना विकसित हो रही है आगे चलकर इस भावना से वे बडे स्वरोजगार के कार्य भी संचालित कर सकती हैं। उन्होंने कहा कि विभाग नवाचारों के माध्यम से उनकी आय बढाने का कार्य कर रहा है । प्रारम्भ में जिला परियोजना प्रबंधक के एम जाटव ने बताया कि जिले के 12 ब्लॉकों में करीब 7 हजार स्वयं सहायता समूह संचालित हैं जिनमें करीब 83 हजार महिलाऐं सदस्य हैं। उन्होंने बताया कि इन समूहों की महिलाऐं कोई न कोई स्वरोजगार का कार्य कर रही हैं। कार्यशाला स्थल पर ही स्वयं सहायता समूहों द्वारा उत्पादित सामग्री की प्रदर्शनी लगाई गई जिसका अतिथियों द्वारा अवलोकन किया गया। कार्यशाला में समूहों की महिलाओं ने भी अपने विचार व्यक्त किये।