डब्ल्यूएचओ का सुझाव, ओमिक्रोन से निपटने के लिए वैक्सीन पर बढ़े शोध

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जेनेवा। पूरी दुनिया में बढ़ते कोरोना के खतरे के बीच विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने कोरोना के ओमिक्रोन वेरियंट पर नियंत्रण न पाने को लेकर चिंता जताई है। डब्ल्यूएचओ की एक तकनीकी टीम ने ओमिक्रोन से निपटने के लिए मौजूदा वैक्सीन को अपर्याप्त करार देते हुए उस पर शोध बढ़ाने का सुझाव दिया है। दुनिया भर में ओमिक्रोन के बढ़ते प्रभाव को लेकर डब्ल्यूएचओ की चिंता बार बार सामने आ रही है। हाल ही में डब्ल्यूएचओ में यूरोप के क्षेत्रीय निदेशक डॉ. हेन्स हेनरी पी क्लग ने कहा था कि मार्च तक आधा यूरोप ओमिक्रोन का शिकार होगा। अब डब्ल्यूएचओ की एक प्रभावी तकनीकी टीम ने कोरोना की मौजूदा वैक्सीन पर अधिक शोध व उसके नए वेरियंट पर काम करने की जरूरत बताई है।

सबसे ताकतवर है जापान और सिंगापुर का पासपोर्ट, भारत की स्थिति भी सुधरी

लंदन (एजेंसी)। किसी देश के पासपोर्ट की ताकत का आंकलन अन्य देशों से उसके रिश्तों के आधार पर होता है। इस बाबत जारी 2022 की पहली रिपोर्ट में जापान व सिंगापुर का पासपोर्ट सबसे ताकतवर माना गया है। इस रिपोर्ट में भारत की स्थिति भी कुछ सुधरी है। इंटरनेशनल एयर ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन (आईएटीए) से मिले आंकड़ों के आधार पर हेनले पासपोर्ट इंडेक्स ने वर्ष 2022 की पहली तिमाही के लिए नई रैंकिंग जारी की है। इसके मुताबिक 192 देशों को बिना वीजा यात्रा अनुमति दिलाने वाला जापान व सिंगापुर का पासपोर्ट पहले स्थान पर है। 190 देशों की वीजाविहीन यात्रा सुविधा वाला जर्मनी व दक्षिण कोरिया का पासपोर्ट दूसरे स्थान पर रखा गया है। फिनलैंड, इटली, लक्जमबर्ग और स्पेन के पासपोर्टधारकों को 189 देशों की यात्रा के लिए वीजा की जरूरत नहीं है, इसलिए इन देशों के पासपोर्ट ताकत के मामले में तीसरे स्थान पर हैं। ताकत के मामले में चौथे स्थान पर ऑस्ट्रिया, डेनमार्क, फ्रांस, नीदरलैंड व स्वीडन और पांचवें स्थान पर आयरलैंड व पुर्तगाल के पासपोर्ट हैं। सबसे खराब स्थिति में 111वें स्थान के साथ अफगानिस्तान का पासपोर्ट है। रैकिंग सूची में नीचे से पांच देश अफगानिस्तान, ईराक, सीरिया, पाकिस्तान और यमन हैं।