राष्ट्रीय टीबी उन्मूलन कार्यक्रम: टीबी हारेगा, राजस्थान जीतेगा राजस्थान को टीबी मुक्त प्रदेश बनाने के लिए उद्यमियों ने लिया संकल्प

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जयपुर,। राजस्थान को टीबी मुक्त प्रदेश बनाने के लिए उद्यमी, औद्योगिक एवं व्यापारिक संगठन अब कंधे से कंधा मिलाकर सरकार का सहयोग करेंगे। प्रदेश में टीबी उन्मूलन हेतु चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग, उद्योग विभाग एवं द यूनियन संस्था के संयुक्त तत्वावधान में शुक्रवार को आयोजित ‘‘राजस्थान प्रदेश में टीबी पर उद्यमियों की सहभागिता हेतु संवाद’’ कार्यक्रम मे विभिन्न व्यावसायिक संगठनों ने इस बात की शपथ ली कि वे अपने औद्योगिक संस्थानों में स्वस्थ वर्क कल्चर को बढ़ावा देंगे और वहां कार्यरत कार्मिकों की स्कि्रनिंग करवाकर चिन्हित टीबी रोगियों के इलाज में सहयोग हेतु उनका आर्थिक और मानसिक सहयोग करेंगे। 

प्रदेश में टीबी उन्मूलन के लिए अन्तरक्षेत्रीय जुडाव हेतु कॉरपोरेट्स के साथ संवाद कार्यक्रम को सम्बोधित करते हुए वाणिज्य एवं उद्योग विभाग की अतिरिक्त मुख्य सचिव श्रीमती वीनू गुप्ता ने कहा कि राजस्थान का कॉरपोरेट सेक्टर ने हर परिस्थति में सरकार का सहयोग किया है। टीबी उन्मूलन के लिए कॉरपोरेट्स यह सुनिश्चित करे कि उनके यहां काम करने वाला टीबी का मरीज कामगार टीबी की दवा नियमित लें। इसके लिए उस कामगार के साथ-साथ उसके परिवार को जागरूक किया जाए। उन्होंने कहा कि कार्यस्थल पर एक साथी को जिम्मेदारी दी जाए कि वह अपने साथी कामगार को रोज याद दिलाएगा कि उसे दवा लेनी है। 
चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग के शासन सचिव डॉ. पृथ्वी ने कहा कि नारू, चिकनपॉक्स, पोलियो जैसी बहुत सी बीमारियां थी, जिन पर हमने विजय प्राप्त की। इन बीमारियों पर जीत में सामुदायिक भागीदारी की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। टीबी जैसी समस्या को खत्म करने के लिए सामुदायिक भागीदारी आवश्यक है और कॉरपोरेट इसमें सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। 

उन्होंने कहा कि औद्योगिक संस्थान, औद्योगिक क्षेत्रवार वहां कार्यरत कार्मिकों में टीबी की स्कि्रनिंग करवायें और चिन्हित रोगियों के नियमित इलाज के लिए कॉरपोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व का निर्वाह करें। उन्होंने कहा कि राजस्थान सरकार प्रदेशवासियों के स्वास्थ्य को लेकर पूरी तरह प्रतिबद्ध है। मुख्यमंत्री निःशुल्क निरोगी राजस्थान योजना, मुख्यमंत्री चिरंजीवी स्वास्थ्य बीमा योजना एवं राजस्थान गर्वमेंट हैल्थ स्कीम जैसी जनकल्याणकारी योजनाओं का ही नतीजा है कि नेशनल फैमेली हैल्थ सर्वे-5 की रिपोर्ट के अनुसार राजस्थान के 88 प्रतिशत परिवार स्वास्थ्य बीमा योजना में कवर हैं। 

मिशन निदेशक राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन डॉ. जितेन्द्र कुमार सोनी ने कहा कि प्रदेश को टीबी मुक्त करने के लिए हम आज यहां से ऎसा संकल्प लें कि दूर-दराज के गांव में बैठे व्यक्ति को लगे कि हम उसके साथ खड़े हैं। उन्होंने कहा कि टीबी उन्मूलन के लिए हमें व्यक्तिगत, सामुदायिक और सरकारी स्तर के संयुक्त प्रयासों की आवश्यकता है। उन्होंने उद्यमियों से कहा कि यदि किसी कामगार में टीबी होने का पता चले तो उसे हटाये नहीं। जब कामगार को यह विश्वास हो जायेगा कि उसके टीबी होने के बावजूद उसका संस्थान उसे हटायेगा नहीं तो वह इलाज लेगा, सही होगा और हम वर्ष 2025 तक टीबी मुक्त होने के लक्ष्य को प्राप्त कर सकेंगे। जब लोगों को यह लगता है कि उसके टीबी होने की जानकारी बाहर आने से उसके रोजगार पर संकट आ सकता है तो वे इसे छुपाते हैं और यहीं से समस्या शुरू होती है। उन्होंने कहा कि सामुदायिक सहभागिता से हमें टीबी की बीमारी की झिझक तोड़ने की मुहिम शुरू करनी है। 

फिक्की राजस्थान के चेयरमैन श्री एम के जैन ने कहा कि चिकित्सा के क्षेत्र में सरकार अभूतपूर्व कार्य कर रही है। यह कॉन्फ्रेंस लोगों के जीवन में मंगल लाने का काम करेगी। उन्होंने कहा कि राजस्थान को टीबी मुक्त बनाने के लिए हमारे संगठन की ओर से हर तरह का सहयोग किया जाएगा। सीआईआई राजस्थान के वाइस चेयरमैन श्री अभिनव बातियां, एसौचेम राजस्थान के कॉ-चेयरमैन श्री तुषार सोगानी, पीएचडी चैम्बर ऑफ कॉमर्स एण्ड इंडस्ट्री के श्री सुमेर सिंह शेखावत, द यूनियन के श्री राणा जुगदीप सिंह सहित विभिन्न संस्थानों के प्रतिनिधियों ने टीबी मुक्त राजस्थान की सरकार की मुहिम को सफल बनाने में हर संभव सहयोग का आश्वासन दिया। इस अवसर पर विभिन्न उद्यमियों एवं संगठनों ने टीबी मरीजों के लिए निर्धारित न्यूट्रिशियन किट उपलब्ध करवाने अथवा उसकी राशि वहन करने की प्रतिबद्धता जाहिर की। 

इस अवसर पर निदेशक आरसीएच डॉ. के.एल. मीणा, राज्य टीबी अधिकारी डॉ. विनोद कुमार गर्ग सहित, फिक्की, सीआईआई, यूएसएआईडी, द यूनियन, एसौचेम सहित विभिन्न औद्योगिक संगठनों के प्रतिनिधी, उद्यमी एवं विभागीय अधिकारी उपस्थित रहे।