बुल्गारिया की खूबसूरती ही नहीं यहां का आर्किटेक्चर भी है लाजवाब

32

तीन दशक पहले मुझे बचपन में बुल्गारिया जाने का मौका मिला था। एक चिल्ड्रेंस कैंप में। उसी की याद को ताजा करने जब मैं दोबारा बुल्गारिया गई, तो महसूस हुआ कि यह स्थान आपको अपनी ओर खींचता है। मुझे अपनी बुल्गारिया यात्रा के दौरान कभी भी सैलानी जैसा एहसास नहीं हुआ, बल्कि ऐसा लगा जैसे मैं कुछ दिनों के लिए वहां बस गई थी।

मुझे बुल्गारिया की राजधानी सोफिया और शहर वारना घूमने और रहने का अवसर मिला। बुल्गारिया पहुंचने के लिए हमने नई दिल्ली के इंदिरा गांधी इंटरनेशनल एयरपोर्ट से तुर्की में इस्तांबुल के लिए फ्लाइट पकड़ी। इस्तांबुल से हमें कनेक्टिंग फ्लाइट से बुल्गारियाई शहर वारना पहुंचना था। किन्हीं वजहों से हमारी वह फ्लाइट मिस हो गई और कुछ समय हमें इस्तांबुल एयरपोर्ट की एक लांउज में बिताना पड़ा। देर रात हमें वारना की फ्लाइट मिली और कुछ घंटों में हम वारना शहर में थे।

विहंगम है वारना का नजारा

मैदान, पहाड़, घाटी, संकरे रास्तों व नदियों का देश है बुल्गारिया। यहां की सबसे बड़ी नदी है इस्कर और सबसे बडी लेक बुर्गस है। आपको जानकर हैरानी भी होगी कि इस देश में करीब 540 नदियां बहती हैं। एक टैक्सी से हम वारना में होटल पैनोरमा पहुंचे। सुनने में अजीब लगता है, लेकिन सच में वहां तक की ड्राइव मन मोह लेने वाली थी।

हरे-भरे खेतों, साफ-सुथरी सड़कों और सुरजमूखी के हजारों फूलों के बीच स्टोन फॉरेस्ट तक जाने का रास्ता बेहद मनमोहक था। साथ ही, मन में उतावलापन था कि पत्थरों का जंगल कैसा होगा? स्टोन फॉरेस्ट पहुंचकर सदियों पुराने पत्थर और प्राकृतिक जमीनी सुंदरता और कलात्मकता को देखकर हैरान थे। पेड़, मिट्टी, जंगली पौधे और पत्थरों का यह जंगल पहले एक समुद्र था।

पत्थर के खंभों से पटा हुआ यह जंगल बड़े क्षेत्र में फैला हुआ है। यहां का वातावरण बहुत ही साफ और सुंदर है। खूबसूरत फूल-पौधे चारों तरह हरियाली बिखेरते बड़े मनोरम लगते हैं। वारना शहर में घूमते हुए हमारी नजर यहां बने घरों पर पड़ी। बहुत ही सुंदर अपार्टमेंट बने हैं। बुल्गारियाई आर्किटेक्चर बहुत सुंदर, आकर्षक और प्रभावी हैं।

बातों-बातों में हम कब वारना पार्क पहुंच गए पता ही नहीं चला। इस पार्क की खासियत है कि आप गार्डन के साथ-साथ बाजार भी घूम लेते हैं। यहां रेस्टोरेंट्स में तुर्की व बुल्गारियाई व्यंजन काफी पसंद किए जाते हैं। अगली सुबह हमें बल्चिक-कलियाकारा जाना है, जो वारना के पास ही बसा एक कस्बा है। यह ब्लैक सी के पास ही स्थित है।

कलियाकारा केप

कलियाकारा केप पहुंचने पर हमें यहां एक आर्कियोलॉजिकल साइट भी देखने को मिली, जो एक म्यूजियम की तरह है। यह एक तरह से यहां की सभ्यता का प्रतीक है। इस म्यूजियम में हजारों साल पुरानी सभ्यता की निशानियां रखी हैं। इनमें बर्तन, हथियार जैसी बहुत सारी चीजें देखने को मिलती हैं। ये सामान खुदाई के दौरान मिले थे। अब इस साइट को टूरिस्ट स्पॉट के रूप में विकसित किया गया है। यहां एक लंबी वॉक के बाद महसूस होता है कि जरूर जीवन यहां कई हजार साल पहले भी रहा होगा। इस तरह के चिन्ह इस वॉक के दौरान देखने को मिलते हैं।

बल्चिक बॉटेनिकल गार्डन

यह एक खूबसूरत बॉटेनिकल गार्डन है। इसे टूरिस्ट डेस्टिनेशन के रूप में विकसित किया गया है। फूलों से लदे पेड़ आपका स्वागत करते हैं। ढेरों फूल, पौधों, पेड़ों और जड़ी-बूटियों से हरे-भरे इस गार्डन में घूमने का एक अलग ही आनंद है। यहां बुल्गारियाई, जापानी गुलाब के साथ एक से बढ़कर एक कैक्ट्स भी देखने को मिलेंगे।