
राजस्थान की धरती पर इस बार स्थापना दिवस का सूरज एक नई रोशनी के साथ उगा, जब मुख्यमंत्री ने घोषणा की कि अब से राजस्थान दिवस अंग्रेजी कैलेंडर नहीं, बल्कि भारतीय पंचांग के अनुसार मनाया जाएगा। यह केवल एक तिथि परिवर्तन नहीं, बल्कि प्रदेश की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत को सम्मान देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण निर्णय है। मुख्यमंत्री ने बाड़मेर में राजस्थान दिवस समारोह के दौरान कहा कि 75 वर्ष पहले, सरदार पटेल ने चैत्र शुक्ल प्रतिपदा के शुभ दिन राजस्थान की स्थापना की थी। इस वर्ष भी प्रतिपदा तिथि के साथ रेवती नक्षत्र और इंद्र योग का संयोग बन रहा है, जो इसे और भी शुभ बनाता है। यह निर्णय राजस्थान की मिट्टी से जुड़ाव और हमारी परंपराओं के सम्मान का प्रतीक है।

राजस्थान विधानसभा में मुख्य सचेतक जोगेश्वर गर्ग ने इस पहल का समर्थन करते हुए कहा, “राजस्थान की समृद्ध सांस्कृतिक, ऐतिहासिक एवं गौरवशाली परंपरा को सम्मान देते हुए, यह आवश्यक था कि स्थापना दिवस को हमारे पवित्र संवत्सर के अनुसार मनाया जाए। हमारे पूर्वजों ने विक्रम संवत के नववर्ष के शुभारंभ पर चैत्र शुक्ल प्रतिपदा को राजस्थान दिवस के रूप में मान्यता दी थी।” यह बदलाव सिर्फ कैलेंडर की तारीख बदलने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह राजस्थान की आत्मा को उसकी जड़ों से जोड़ने का प्रयास है।
यह निर्णय न केवल इतिहास को पुनर्स्थापित कर रहा है, बल्कि भविष्य की पीढ़ियों को भी अपनी परंपराओं और संस्कृति का महत्व सिखाने का कार्य करेगा। मुख्यमंत्री द्वारा लिया गया यह कदम एक दूरदर्शी सोच और सांस्कृतिक पुनर्जागरण का प्रतीक है, जो राजस्थान की पहचान को और मजबूत करेगा। अब राजस्थान दिवस केवल उत्सव नहीं, बल्कि हमारी विरासत और गौरव की पुनर्स्थापना का दिन बनेगा – जहां पंचांग की पालकी में हमारा इतिहास सवार होकर हमें अपने मूल अस्तित्व की याद दिलाएगा।
