राष्ट्रभक्ति को राष्ट्रशक्ति में परिणत करना समय की आवश्यकता : रामदत्त चक्रधर

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“स्वाधीनता संग्राम मे क्रांतिकारियों के अचिन्हित संस्मरण” पर आयोजित हुई कर्मयोगी भंवरलाल मल्लावत स्मृति व्याख्यान माला

कोलकाता । राष्ट्रभक्ति के ज्वार को अपने अंत:करण में भरकर इसको राष्ट्रशक्ति में परिणत करना आज की आवश्यकता है । ये बात बड़ाबाजार लाइब्रेरी के तत्वावधान में आयोजित ‘कर्मयोगी भंवरलाल मल्लावत व्याख्यानमाला’ में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सह-सरकार्यवाह रामदत्त चक्रधर ने समारोह की अध्यक्षता करते हुए कही ।

विगत 24 वर्षों से ज्वलंत विषयों पर आयोजित होते रहने वाली व्याख्यानमाला के अंतर्गत इस वर्ष “स्वाधीनता संग्राम मे क्रांतिकारियों के अचिन्हित संस्मरण” विषय पर यह व्याख्यान माला बड़ाबाजार लाइब्रेरी के आचार्य विष्णुकांत शास्त्री सभागार में आयोजित हुई थी।

सुप्रसिद्ध लेखक एव चिंतक अभय मराठे ( उज्जैन ) ने व्याख्यानमाला को संबोधित करते हुए कहा – ऐसे बहुत से क्रांतिकारी हैं जिन्होंने स्वतंत्रता संग्राम में मातृभूमि के लिए अपना सर्वस्व अर्पण कर दिया, परंतु इतिहास में उनका ज़िक्र नहीं है। अभय मराठे ने अपनी पुस्तक ‘ओ उठो क्रांतिवीर’ की चर्चा करते हुए बताया कि इस पुस्तक में 800 से ज्यादा अचिन्हित क्रांतिकारियों के बलिदान की गाथा लिखी गई है।

कार्यक्रम का प्रारंभ उद्बोधन गीत से हुआ, जिसे पुस्तकालय के उपाध्यक्ष जयगोपाल गुप्ता ने स्वर दिया । कर्मयोगी भंवरजी की सुपुत्री श्रीमती उर्मिला ध्यावाला ने अपने पिताश्री के प्रति स्वरचित काव्यांजलि प्रस्तुत की। संस्था के मंत्री अशोककुमार गुप्ता ने कार्यक्रम का संचालन किया।

कार्यक्रम के संयोजक अरुण प्रकाश मल्लावत ने धन्यवाद ज्ञापित किया । जयंत पाल, सुनील मोर, महावीर बजाज, अनिल मल्लावत, ओमप्रकाश बांगड़, मुरलीधर ध्यावाला, अंकित मल्लावत, रमाकांत सिन्हा, भागीरथ चांडक, गिरिधर राय, दुर्गेश त्रिपाठी, अंकुश ध्यावाला, विजय बगड़िया, पवन गुप्ता, नरेंद्र नाथ बेरा सहित अनेक गणमान्य लोग देश के विभिन्न हिस्सों से कार्यक्रम में आभासी माध्यम से जुड़े थे।

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