ट्रंप का टैरिफ या ग्लोबल टेरर

ट्रंप
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पूरे विश्व के शेयर मार्केट में ट्रंप की 2 अप्रैल को घोषित किए जाने वाले टैरिफ को ले कर घबराहट सा वातावरण है।अमेरिकी सहित अन्य प्रमुख शेयर मार्केट में पिछले दो दिनों में तीव्र गिरावट रही है।भारत भी अछूता नहीं रहा है।सप्ताह के अंतिम व्यापारिक सत्र में निफ्टी तो 72 अंक ही गिर कर बंद हुआ परंतु सोमवार को गिफ्ट निफ्टी 250 अंक नीचे ट्रेड कर रहा था। यूरोप में भी प्रमुख शेयर मार्केट भी 1.5 से 2 प्रतिशत नीचे थे।कुल मिला कर चौतरफा मंदी थी। अब आगे बहुत कुछ ट्रंप टैरिफ पर निर्भर करता है।

यदि यह टैरिफ बहुत कड़े तथा व्यापक आते हैं तो एक बार तो और मंदी दिख सकती है। इसके बाद राष्ट्र, अर्थव्यवस्थाएं,शेयर मार्केट परिस्थितियों तथा प्रभाव का मूल्यांकन करेंगे एवं उसके अनुरूप शेयर मार्केट आचरण करेंगे।
भारतीय शेयर मार्केट सुधर रहे थे परंतु ट्रंप के ऑटो कंपनियों, वेनेजुएला से तेल क्रय करने वालों पर 25 प्रतिशत का भारीभरकम टैरिफ लगाने की बात ने मनोभाव बिगाड़ दिया।अन्यथा पिछले सप्ताह मार्केट का आरंभ निफ्टी में 308 अंकों की तेजी के साथ हुआ था।साप्ताहिक आधार पर निफ्टी में 170 अंकों की बढ़त अवश्य रही परंतु शुकवार को बढ़ने वाले शेयरों की संख्या 985 की तुलना में गिरने वाले शेयरों की संख्या 1627 रही जो मार्केट के खराब मनोभाव को दर्शाती है।

शेयर मार्केट
शेयर मार्केट

ट्रंप टैरिफ को ले कर इतने गंभीर है कि उन्होंने 2 अप्रैल के टैरिफ लगाने की घोषणा को स्वातंत्र्य दिवस का नाम दिया है।
यद्यपि यह टैरिफ संपूर्ण वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए हानिकारक ही है। वर्षों से अर्थव्यवस्थायें,कंपनियां परस्पर एक व्यवस्था ,समायोजन नियमों, करों के अंतर्गत कार्य , व्यापार कर रहीं थीं,इनके अनुरूप तथा आवश्यकताओं के आधार पर भविष्य की योजनाएं बना रही थी।ट्रंप टैरिफ जो अब ट्रंप टेरर बन चुका है,बनने की ओर है,इन सभी कार्य प्रणालियों को बदल सा सकता है, आमूल चूल परिवर्तन भी ला सकता है।यह परिवर्तन सहज सरल नहीं होंगे। अतः इन परिस्थितियों को देखते हुए विभिन्न परिसंपत्तियों में निवेश,विशेषकर शेयर में निवेश अत्यंत सावधानी तथा धैर्य के साथ करना होगा।

अर्थव्यवस्थाओं को यथासंभव स्वपोषित घरेलू खपत की अर्थव्यवस्था में परिवर्तित करना होगा,उस अनुरूप ढलना होगा तथा जो ऐसा कर पाएंगे ,वहीं अपेक्षाकृत सुदृढ़ रह पाएंगे। फिर भी यदि ट्रंप थोड़ा लचीलापन दिखाते हैं तो फिर वर्तमान घबराहटपूर्ण परिस्थितियां परिवर्तित भी हो सकती हैं। भारतीय शेयर मार्केट में विदेशी निवेशक पुनः लौटने लगे थे।पिछले सप्ताह के पांच व्यापारिक सत्रों में प्रथम चार में उन्होंने नकद संभाग में 22000 करोड़ रुपए का क्रय किया,शुक्रवार को 4352 करोड़ रुपए के शेयर बेचे।कुल मिला कर 17600 करोड़ रुपए की खरीद की।मार्च में वो 2014.18 करोड़ रुपए के क्रेता रहे जबकि उन्होंने जनवरी तथा फरवरी में बड़ी बिकवाली की थी परंतु ट्रंप टैरिफ यदि बहुत घातक आया तो वो पुनः विक्रेता होने को विवश हो सकते हैं।ऐसे में मार्केट पुनः मंदी की ओर अग्रसर हो सकते हैं।

वैसे भारत ने अमेरिका से टैरिफ को ले कर उच्चस्तरीय बातचीत आरंभ कर दी है तथा 100 से अधिक वस्तुओं पर टैरिफ को ले कर एक सहमति की बात कही जा रही है।मोदी सरकार प्रो एक्टिव रहती है,उसकी विशेषता है तथा उसकी व्यापारिक मेधा तीव्र है।इसलिए ये माना जा सकता है कि उन्होंने अमेरिका से टैरिफ को ले कर अच्छी बातचीत की होगी।
यह भी कहा जा रहा है कि भारत पर ट्रंप टैरिफ का बड़ा प्रभाव नहीं पड़ेगा पर इसका सही आकलन तो टैरिफ की घोषणा के बाद ही होगा। घरेलू संस्थागत निवेशक ने इस पूरे वित्तीय वर्ष में 606368 करोड़ रुपए की खरीद कर एफआईआई की 127401 करोड़ रुपए की बिकवाली का अच्छा प्रतिकार किया।

एफआईआई ने भारतीय मार्केट में बड़ा विक्रय अक्टूबर 24 से आरंभ किया तथा फरवरी 25 तक 323702 लाख करोड़ रुपए के शेयर बेच डाले।मार्च 25 में वो वापस लौटे तथा 2014 करोड़ रुपए का क्रय किया, इंडेक्स फ्यूचर में 14076 करोड़ रुपए एवं स्टॉक फ्यूचर में 16629 करोड़ रुपए की खरीद की।यह उनकी सभी संभागों ने लेवाली थी। बड़े विदेशी वित्तीय तथा ब्रोकरेज फर्मों का भारतीय शेयर मार्केट में अच्छी तेजी की भविष्यवाणी का क्रम बना हुआ है। सीएलएसए की ओर से दीर्घ अवधि में निफ्टी के 37000 से 42000 तक जाने का अनुमान बताया गया है। दीर्घ अवधि में भारतीय अर्थव्यवस्था का बड़ा विस्तार अवश्यंभावी है।अभी भी प्रति व्यक्ति खपत में वैश्विक स्तरों से हम बहुत नीचे हैं अर्थात् वृद्धि की बड़ी संभावना है। ईरान अमेरिका के मध्य तनाव एक तात्कालिक भूराजनीतिक चिंता है जो क्रूड का मूल्य बढ़ा सकता है यद्यपि भारत ने कम मूल्यों पर क्रूड खरीदने का विकल्प ढूंढ रखा है।

आकर्षक मूल्यांकन पर उपलब्ध शेयरों के थोड़ा थोड़ा निवेश करते रहिए।वो वित्त वर्ष 2025 -26 में बहुत अच्छा प्रतिफल दे सकते हैं क्योंकि इस बार की कुछ महीनों की मंदी में वो बहुत नीचे आ चुके हैं। आक्रामक क्रय के लिए 2 अप्रैल ट्रंप टैरिफ दिवस के परिणाम की प्रतीक्षा करना ही उचित है। अभी के भय भरे वातावरण में भारत की जीडीपी का आकार ही शेयर मार्केट में गिरावट से रक्षा करेगा क्योंकि मार्केट पूंजीकरण जीडीपी की तुलना में नीचे जाएगा तो भी टिकेगा नहीं,जीडीपी के बराबर होते रहेगा, साथ ही भारतीय जीडीपी वृद्धि दर तो अच्छी ही है।

अर्पित मोदी
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