कौन होता है सॉलिसिटर जनरल, क्या होती है भूमिका

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Solicitor General of india
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क्या आपको पता है कि सॉलिसिटर जनरल कौन होता है और उनका काम क्या होता है। चलिए हम आपको बताते हैं कि सॉलिसिटर जनरल प्रधान पब्लिक प्रोसेक्यूटर होता है। सॉलिसिटर जनरल केंद्र सरकार का दूसरा सबसे बड़ा विधि अधिकारी होता है। वह विभिन्न मामलों में अदालत में केंद्र सरकार का पक्ष रखता है। साधारण भाषा में कहें तो सॉलिसिटर जनरल कानूनी नुमाइंदा होता है जो अदालत और कानूनी मामलों में सरकार की तरफ से पेश होता है और सरकार का पक्ष रखता है। 

अब आप सोच रहे होंगे सॉलिसिटर जनरल जब केंद्र सरकार का दूसरा सबसे बड़ा विधि अधिकारी होता है तो सबसे बड़ा विधि अधिकारी कौन होता है। केंद्र सरकार का सबसे बड़ा विधि अधिकारी अटॉर्नी जनरल यानि महान्यायवादी होता है। अटॉर्नी जनरल केंद्र सरकार का मुख्य विधि अधिकारी होता है जो केंद्र सरकार को कानूनी मामलों की राय देता है। अटॉर्नी जनरल की नियुक्ति का अधिकार राष्ट्रपति के पास होता है।

सॉलिसिटर जनरल जब केंद्र सरकार का दूसरा सबसे बड़ा विधि अधिकारी होता है

राष्ट्रपति ऐसे कानूनविद को अटॉर्नी जनरल यानि महान्यायवाद चुनते हैं जो उच्चतम न्यायालय यानि सुप्रीम कोर्ट के जज बनने की काबिलयत रखते हों। अटॉर्नी जनरल दोनों सदनों (लोकसभा, राज्यसभा) की कार्यवाही में भाग ले सकता है। लकिन, वोट देने का अधिकार उनके पास नहीं होता है। क्योंकि उनकी सीधी नियुक्ति होती है, जबकि सदन के सदस्य चुनाव प्रक्रिया के तहत यानि चुनकर आते हैं।

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राष्ट्रपति जब तक चाहें सॉलिस्टर जनरल को अपने पद पर रख सकते हैं। यह अधिकार पूर्ण रूप से महामहिम के पास होता है। लेकिन अटॉर्नी जनरल की निुयक्ति में केंद्र सरकार की सलाह जरूर ली जाती है। अटॉर्नी जनरल के लिए सॉलिसिटर जनरल सहायक की भूमिका निभाते हैं।

विधि से जुड़े कागज या कोई कार्यवाही में सॉलिसिटर जनरल, अटॉनी  जनरल की पूरी मदद करते हैं। इसक अलावा सॉलिसिटर जनरल किसी भी अदालत में सरकार की तरफ से पेश हो सकता है और सरकार का पक्ष रख सकता है। देश के पहले अटॉर्नी जनरल एमसी सीतलवाड़ थे। जबकि देश के पहले सॉलिसिटर जनरल सीके दफ्तरी थे।