जनजातिय विधार्थियों के कौशल प्रशिक्षण हेतु टीएडी एवं सीपेट में करार

9

सीपेट 90 जनजातिय विधार्थियों को 3 माह का निःषुल्क आवासीय प्रषिक्षण देगा

जयपुर। जनजातिय युवाओं को नवीनतम तकनीकी से जोड़ने एवं उनके कौशल संवर्धन हेतु टीएडी एवं भारत सरकार के रसायन एवं उर्वरक मंत्रालय का जयपुर स्थित सीपेट संस्थान जनजातिय विधार्थियों को निःशुल्क प्रषिक्षण देने हेतु सहमत हो गये हैं ।

संयुक्त षासन सचिव, जनजाति क्षेत्रीय विकास विभाग, नेहा गिरी ने बताया कि जनजाति क्षेत्रीय विकास विभाग एवं सीपेट के बीच एक समझौता हुआ है जिसके तहत सीपेट जयपुर 90 जनजातिय विधार्थियों को प्लास्टिक प्रोसेसिंग और सीएनसी लेथ मषीन के तीन विभिन्न कार्यों के लिये 3 महीने का निः शुल्क आवासीय प्रषिक्षण देगा । समझौता पत्र पर टीएडी की ओर से आुयक्त जितेन्द्र कुमार उपाध्याय एवं सीपेट संस्था के निदेषक डॉ.सैय्यद अमानुल्ला ने हस्ताक्षर किये ।

गिरी ने बताया कि इस प्रषिक्षण पर टीएडी विभाग द्वारा 48 लाख रूपये खर्च किये जायेगें ।
उन्होंने बताया कि एमएसएमई टेक्नोलॉजी, भिवाड़ी और टीएडी के बीच एक ओर समझौता किया गया है जिसमें 60 विधार्थियों को 5 महीनों के लिए सीएनसी मषीन का निःषुल्क आवासीय प्रषिक्षण दिलाया जायेगा । इस पर टीएडी द्वारा 40 लाख रूपये व्यय किया जायेगा।

आयुक्त टीएडी जितेन्द्र कुमार उपाध्याय ने बताया कि भारत सरकार के ये दोनों ही प्रषिक्षण संस्थान उत्कृष्ट श्रेणी के हैं व इनके निदेशकों के अनुसार प्रषिक्षण के पष्चात्त प्रषिक्षित विधार्थियों को 90 प्रतिषत रोजगार मिलने की गारन्टी रहती है ।

उपाध्याय ने बताया कि प्लास्टिक प्रोसेसिगं प्रषिक्षण के लिये जनजातिय समुदाय का राजस्थान का मूल निवासी होना, 8 वीं कक्षा उतीर्ण व आयु 18 से 35 वर्ष के बीच होनी चाहिये । सीएनसी प्रषिक्षण के लिये अभ्यर्थी जनजातिय समुदाय का, राजस्थान का मूल निवासी, आयु 18 से 35 वर्ष के बीच व 10 वीं कक्षा उतीर्ण होना अनिवार्य है ।