वैक्सीन में देरी, खामियाजा भुगतना पड़ सकता है अर्थव्यवस्था को

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Demo Pic: vaccine
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भारतीय अर्थव्यवस्था को कोरोना वायरस वैक्सीन में देरी का खामियाजा भुगतना पड़ सकता है। सोमवार को एक ब्रोकरेज फर्म ने कहा कि कोविड-19 वैक्सीन में देरी का मतलब होगा कि वित्त वर्ष 2021 के दौरान देश का सकल घरेलू उत्पाद 7.5 फीसदी तक सिकुड़ सकता है। बैंक ऑफ अमेरिका के अर्थशास्त्रियों ने एक सप्ताह के अंदर ही वास्तिविक जीडीपी के आंकड़ों को रिवाइज कर दिया है।

वैक्सीन में देरी का मतलब होगा कि वित्त वर्ष 2021 के दौरान देश का सकल घरेलू उत्पाद 7.5 फीसदी तक सिकुड़ सकता है

अब इनका कहना है कि आर्थिक गतिविधियां कम होने की वजह से बेस केस में जीडीपी 4 फीसदी तक लुढक़ सकती है। कोरोना वायरस वैक्सीन तैयार करने के लिए वैश्विक व घरेलू स्तर पर लगातार प्रयास जारी हैं। लेकिन, अब तक ऐसे किसी टाइमलाइन के बारे में ऐलान नहीं हुआ है कि आखिर कब तक वैक्सीन तैयार कर ली जाएगी।

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कई एनालिस्ट्स ने अनुमान लगाया है वित्त वर्ष 2021 में भारतीय अर्थव्यवस्था में तकरीबन 5 फीसदी की गिरावट आएगी। इसका सबसे बड़ा कारण उन्होंने लॉकडाउन को बताया है। कुछ एनालिस्ट्स ने तो यह अनुमान 7.2 फीसदी तक बताया है।

अक्टूबर तक आर्थिक गतिविधियां पूरी तरह से शुरू होने का अनुमान
इन अर्थशास्त्रियों का कहना है कि अनलॉक फेज़ की शुरुआत के साथ ही देश में कोरोना वायरस संक्रमण के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। ऐसे में अब उम्मीद है कि जिन मौजूदा प्रतिबंध का अनुमान अगस्त मध्य तक लगाया जा रहा था, अब वो कम से कम सितंबर मध्य तक जारी रहेंगे।

उनका कहना है कि अ टूबर मध्य तक ही आर्थिक गतिविधियां पूरी तरह से चलना शुरू होंगी। इसके अलावा, कई राज्य अब एक बार फिर अपने स्तर पर लॉकडाउन लगाने लगे हैं। इसका नतीजा जीडीपी में अतिरिक्त से 1 से 4 फीसदी की गिरावट के रूप में देखने को मिल सकता है।

एक महीने के लॉकडाउन से जीडीपी में 1 प्रतिशत का नुकसान
जिन एनालिस्ट्स ने सबसे खराब परिदृश्य में भी 5 फीसदी की गिरावट का अनुमान लगाया था, अब उनका कहना है कि एक महीने का लॉकडाउन सालाना आर्थिक ग्रोथ के लिहाज से 1 फीसदी का नुकसान पहुंचा रहा है। उन्होंने कहा कि इसकी प्रतिक्रिया में भारतीय रिज़र्व बैंक वि ा वर्ष 2021 के दौरान नीतिगत ब्याज दरों अन्य 2 फीसदी की कटौती कर सकता है। आर्थिक गतिविधियों पर प्रॉपराइटरी इंडिकेटर्स यानी खरीदार व विक्रेता के विभिन्न नजरिये का संकेतक बताता है कि मई महीने के दौरान इसमें 20.6 फीसदी की गिरावट रही। अप्रैल में इसमें 29.7 फीसदी की गिरावट रही थी। मई में औद्योगिक उत्पादन 34.7 फीसदी लुढक़ा था जबकि अप्रैल के दौरान इसमें 57.6 फीसदी की गिरावट आई थी। ऐसे में उन्होंने अनुमान लगाया है कि पहली तिमाही के जीडीपी में 18 फीसदी की गिरावट आ सकती है।

वैक्सीन में 1 साल की देरी से 7.5 फीसदी लुढक़ेगी जीडीपी
बैंक ऑफ अमेरिका के एनालिस्ट्स का कहना है, अगर वैश्विक अर्थव्यवस्था के कोविड-19 वैक्सीन के लिए एक साल का इंतजार करना पड़ रहा है तो इससे भारतीय जीडीपी में 7.5 फीसदी की गिरावट आएगी। इन एनालिस्ट्स ने इसे बियर केस करार दिया है। बता दें कि बेस केस में संभावित अनुमान लगाया जाता है। लेकिन, बियर केस का मतलब आमतौर पर निराशाजनक ही माना जाता है।