गणेश चतुर्थी :3 फीट से ज्यादा बड़ी मूर्ति नहीं बना सकते मूर्तिकार

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गणेश चतुर्थी

मूर्ति बनाने वालों को नोटिस पुलिस का निर्देश

जल प्रदूषित होने का दिया हवाला

कोटा। गणेश चतुर्थी के लिए मूर्ति बनाकर रोजी-रोटी की तैयारी कर रहे मूर्तिकारों को कोटा पुलिस ने जोरदार झटका दिया है। पुलिस ने उन्हें तीन फीट से ज्यादा ऊंची मूर्ति नहीं बनाने के निर्देश जारी किए हैं। गुरुवार को जारी किए गए इस नोटिस में बड़ी मूर्ति से जल के दूषित होने का हवाला दिया गया है। साथ ही नियमों का उल्लंघन करने वालों पर कार्रवाई की बात लिखी गई है। पुलिस का ये नोटिस शहर में चर्चा बना हुआ है। वहीं, मूर्तिकार का कहना है कि मिट्टी की मूर्ति भी 3 फीट से छोटी नहीं बन सकती।

ये लिखा नोटिस में

जवाहर नगर थाना पुलिस द्वारा मूर्ति कारों को भेजे गए नोटिस में लिखा- आगामी गणेश चतुर्थी, दुर्गा पूजा ,अनंत चतुर्दशी पर्वो पर गणेश, दुर्गा की प्रतिमा/मूर्तियां बनाई जाएगी। उक्त प्रतिमाओं, मूर्तियों का विसर्जन चंबल नदी और किशोर सागर तालाब में किया जाता है। जिससे जल प्रदूषित होता है, तथा जलीय जीव-जंतुओं पर प्रभाव पड़ता है। आप प्लास्टर ऑफ पेरिस (पीओपी) की मूर्तियां नहीं बनाएं। यदि आप द्वारा प्लास्टर ऑफ पेरिस की मूर्तियां बनाता हुआ पाया जाता है ,तो मूर्तियां जब्त कर नियम अनुसार विधिक कार्रवाई अमल में लाई जाएगी। मिट्टी की मूर्तियों की ऊंचाई 3 फीट से अधिक नहीं होगी।

आगामी दिनों में गणेश चतुर्थी, दुर्गा पूजा, अंनत चतुर्दशी पर्व है। त्योहार से कई दिन पहले अलग अलग जगहों गणपति, दुर्गा की प्रतिमाएं बनाना शुरू कर देते है। कलाकार छोटी से लेकर 10 से 12 फीट की प्रतिमाएं बनाने के काम में जुट जाते हैं। ऐसे में 3 फीट से अधिक ऊंचाई नहीं रखने के आदेश ने उन्हें चिंता में डाल दिया है। कलाकारों का कहना है कि मिट्टी की प्रतिमा 3 फीट से नीचे नहीं बन सकती।

आगे क्या

3 फीट से अधिक ऊंचाई नहीं रखने के मामले में मूर्तिकार विरोध जता सकते है। क्योंकि कलाकारों द्वारा कई मूर्तियां बनाई जा चुकी है। उनका रंग रोगन बाकी है। मूर्ति कार पंकज ने बताया कि मुंबई सहित देश अन्य शहरों में ऊंची ऊंची प्रतिमाएं बनाई जाती है। पांडालों में ऊंची प्रतिमाएं ही स्थापित की जाती है। ऐसे में उन्हें छूट मिलनी चाहिए। मूर्तिकार हिंदू संगठनों से सम्पर्क कर विरोध की तैयारी में लगे है।

गणेश चतुर्थी

कोटा में पहले भी हो चुका विवाद

दरअसल, करीब चार महीने पहले कोटा में धारा 144 लागू करते हुए बताया गया था कि यह कदम जिले में फिल्म द कश्मीर फाइल्स की स्क्रीनिंग के मद्देनजर कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए उठाया गया था। इस पर विवाद हुआ। बाद में आदेश बदले गए।

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