“ग्लोबल रिसर्च इनिशिएटिव फॉर सस्टेनेबल एग्रीकल्चर एंड अलाइड साइनसेस”-

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बीकानेर में अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन – जीआरआईएसएएएस-2021

बीकानेर। स्वामी केशवानंद राजस्थान कृषि विश्वविद्यालय, बीकानेर द्वारा “ग्लोबल रिसर्च इनिशिएटिव फॉर सस्टेनेबल एग्रीकल्चर एंड अलाईड साइनसेस”- (GRISAAS-2021) जीआरआईएसएएएस-2021, छठा अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन आयोजित किया जा रहा है। इस सम्मेलन के सफल आयोजन हेतु समन्वय समितियों का गठन कर आज कुलपति की अध्यक्षता में बैठक आयोजित की गई जिसमे आस्था फाउंडेशन के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ एस पी सिंह, डॉ पी बी सिंह एवं विश्वविद्यालय के समस्त डीन डायरेक्टर्स, ओसड़ी इंजी. विपिन लदढ़ा, ने भाग लिया।

कार्यक्रम की विस्तृत जानकारी देते हुए कुलपति प्रो.आर.पी. सिंह ने बताया की यह सम्मेलन विश्वविद्यालय में हाइब्रिड मोड पर 13-15 दिसंबर तक आस्था फाउंडेशन मेरठ द्वारा सीएसएयूएटी कानपुर एसएसडीएटी मेरठ बीएयू, रांची, आईजीकेवी, रायपुर, यूएएचएस, शिवमोग्गा कर्नाटक के सहयोग से आयोजित किया जा रहा है। आज की बैठक अंतर्गत देश विदेश से आने वाले मेहमानों और प्रतिभागियों के पंजीकरण, रुकने, आवागमन और भोजन आदि की व्यवस्था पर विचार विमर्श हुआ।

कुलपति प्रो आर पी सिंह ने बताया की GRISAAS-2021, वैज्ञानिकों, उत्पादकों, उत्पाद निर्माताओं, छात्रों और मार्केटिंग के लोगों के लिए बुनियादी अध्ययनों, तकनीकों और विविध अनुभवों को अपनाने के लिए एक बहु-विषयक अंतर्राष्ट्रीय मंच प्रदान करेगा। अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में प्रख्यात वक्ताओं द्वारा व्यखान व विचार-विमर्श फसल उत्पादन के लिए सतत दृष्टिकोण प्रदान करेगा।

सम्मेलन के दौरान कई विषयों पर व्याख्यान, वार्ता और समानांतर मौखिक / पोस्टर प्रस्तुतियों के देखने व सुनने का अवसर मिलेगा जैसे की फसल सुधार, जैव प्रौद्योगिकी और आनुवंशिक इंजीनियरिंग के लिए नवीन प्रौद्योगिकी , जैव विविधता, खाद्य सुरक्षा और आईपीआर मुद्दों पर जलवायु परिवर्तन का प्रभाव, थीम , किसान की आय बढ़ाने के लिए सटीक बागवानी, रोग और कीट प्रबंधन में नई सीमाएं, खाद्य प्रसंस्करण, मूल्य संवर्धन और कटाई के बाद की प्रौद्योगिकी, कृषि वानिकी, आजीविका और टिकाऊ प्रबंधन प्रथाएं, फसल प्रणाली स्वदेशी तकनीकी ज्ञान: लाभदायक कृषि की नीतियां और अर्थशास्त्र,भौतिक, रासायनिक और जैविक विज्ञान में एकीकृत दृष्टिकोण, मिट्टी स्वास्थ्य प्रबंधन और प्रथाएं: फसल उत्पादकता के लिए प्रमुख कारक, पशु स्वास्थ्य, पशुपालन और डेयरी प्रौद्योगिकी,सामाजिक विज्ञान, पुस्तकालय, सूचना विज्ञान और मानविकी।

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