नासा की सफलता : शुद्ध सांस लेने योग्य 5 ग्राम ऑक्सीजन का निर्माण किया

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नासा के परसिवरेंस रोवर ने 63 दिन बाद अपने प्रमुख उद्देश्यों में से एक में सफलता हासिल कर ली है। रोवर ने मॉक्सी नाम के उपकरण से मंगल के वायुमंडल से कार्बन डाइऑक्साइड लेकर शुद्ध सांस लेने योग्य 5 ग्राम ऑक्सीजन का निर्माण किया है।

यह ऑक्सीजन एक अंतरिक्ष यात्री के 10 मिनट के सांस लेने के बराबर है। नासा के मुताबिक, दुनिया में यह पहली बार हुआ है, जब धरती के बाद किसी और ग्रह पर सांस लेने योग्य ऑक्सीजन बनाई गई है।

इसे लेकर नासा ने बुधवार को कहा कि प्रारंभिक उत्पादन मामूली था। लेकिन यह प्रयोग दिखाता है कि प्राकृतिक संसाधनों के इस्तेमाल से दूसरे ग्रह के वातावरण का इस्तेमाल मनुष्यों द्वारा सीधे सांस लेने के लिए किया जा सकता है।

नासा के अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी मिशन निदेशालय की निदेशक ट्रडी कोर्ट्स ने बताया कि नासा का उद्देश्य 2033 तक मंगल पर मानव पहुंचाने का है। वह इससे संबंधित आने वाली तमाम चुनौतियों से निपटने के लिए तैयारी कर रहा है।

इसमें से एक चुनौती मंगल पर ऑक्सीजन का निर्माण करना होगा, क्योंकि वहां इतनी ज्यादा तादात में ऑक्सीजन ले जाना संभव नहीं होगा। ऐसे में जरूरी है कि मंगल पर ही ऑक्सीजन बनाई जाए।

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