13 एजुकेशन स्टार्टअप्स ने निवेशकों से 71000 करोड़ रुपये जुटाए

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कोरोना महामारी के कारण स्कूल और कॉलेज बंद हैं। इसी कारण ऑनलाइन एजुकेशन सेक्टर में काफी बूम देखने को मिल रहा है। भारत में एजुकेशन टेक स्टार्टअप्स इस बदलाव का लाभ उठा रहे हैं। सिर्फ चार माह में 13 एजुकेशन स्टार्टअप्स ने निवेशकों से 71000 करोड़ रुपये (954 मिलियन डॉलर) जुटाए हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि एजुकेशन स्टार्टअप में विलय और अधिग्रहण जारी रहने की उम्मीद है क्योंकि निवेशकों को उम्मीद है कि कोविद-19 संकट से लोगों की सोच में स्थायी बदलाव आएगा। इसका फायदा स्टार्टअप कंपनियों को निवेशकों को मिलेगा। इस उम्मीद में निवेशक तेजी से इन स्टार्टअप्स में पैसा लगा रहे हैं।

बड़ी कंपनियां कर रहीं हैं अधिग्रहण

कोरोना संकट ने ऑनलाइन शिक्षा जगत में बड़ा बदलाव ला दिया है। एजुकेशन स्टार्टअप्स अपने पोर्टफोलियो को विस्तार देने के लिए नए और छोटे शिक्षा क्षेत्र की स्टार्टअप कंपनियों का अधिग्रहण कर रहे हैं। बायजू, वेदांतु और अनएकेडमी ने हाल के दिनों में कई तरह के अधिग्रहण किए हैं। इस साल, बायजू ने 300 मिलियन डॉलर में कोड प्रशिक्षण ऐप व्हाइटहैट जूनियर का अधिग्रहण किया। यह पांचवा अधिग्रहण है। इसी तरह, अनएकेडमी ने जुलाई में 50 मिलियन डॉलर में मेडिकल प्रवेश परीक्षा तैयारी कराने वाले स्टार्टअप प्रेपलैड को खरीदा था।

ऐप से पढऩे वाले छात्र दोगुना हुए

मार्केट ट्रैकिंग फर्म रेडसीयर कंसल्टिंग के अनुसार, भारतीय ऑनलाइन शिक्षा बाजारा जिस रफ्तार से बढ़ रहा है वैसे में 2020 तक इस बाजार का आकार बढ़कर 3.5 अरब डॉलर होने की उम्मीद है। इसके साथ ही ऑनलाइन एप से पढ़ाई करने वाले छात्र एक साल में 4.5 करोड़ से बढ़कर नौ करोड़ पहुंच गए हैं। इसमें भुगतान और फ्री पढऩे वाले शामिल हैं। इसके साथ ही एजुकेशन एप पर समय बिताने की अवधि भी बढ़ी है। कोरोना से पहले 50 मिनट समय देने वाले छात्र अब 90 मिनट तक ऐप का इस्तेमाल कर रहे हैं।

युवाओं के लिए रोजगार के अवसर बढ़ें

देश में ई-एजुकेशन प्रोवाइड कराने वाली कंपनियां अपनी जरूरत के कंटेंट तैयार करने और ऑनलाइन विडिया के जरिये पढ़ाई करने के लिए बड़े पैमाने पर नौकरियां मुहैया करा रही हैं। कोरोना के बाद अधिकांश स्टार्टअप्स ने अपने ऑनलाइन कोर्सेज की संख्या को बढ़ाया है। इसक लिए उन्हें पढ़े-लिखे युवाओं की जरूरत हो रही है। ऐसे में बड़े से छोटे एजुकेशन स्टार्टअप्स बड़ी संख्या में भर्तियां कर रहे हैं। सिर्फ बायजू ने इस साल 4000 लोगों को हायर करने का फैसला किया है। वहीं, दूसरी ओर शिक्षा के प्रति रुझान वाले युवा उद्यमी भी इस क्षेत्र में अपना जोर लगा रहे हैं।

क्या है सीड फंडिंग?

किसी व्यवसाय को आरंभ करने के लिए आवश्यक आरंभिक पूंजी को सीड कैपिटल (पूंजी) अथवा सीड फंडिंग कहा जाता है। यह किसी आईडिया (व्यावसायिक विचार) को विकसित करने, उत्पाद को बाजार में लाने में मदद प्रदान करता है। इसे उच्च जोखिम वाला निवेश माना जाता है, लेकिन यह एक ऐसा निवेश है जिसके माध्यम से काफी लाभ भी प्राप्त होता है।