एक और साधु ने की आत्महत्या

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भीनमाल
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भाजपा विधायक सहित तीन के खिलाफ केस, रिसोर्ट बनाने को लेकर विवाद

जालोर। भीनमाल भाजपा विधायक से परेशान साधु ने अपने आश्रम में ही पेड़ पर फंदा लगाकर जान दे दी। करीब 28 घंटे बाद पुलिस-प्रशासन से सहमति बनने के बाद संत की बॉडी का शनिवार को उतारा गया। इससे पहले आश्रम के दूसरे साधुओं व ग्रामीणों ने सुसाइड नोट को सार्वजनिक करने की मांग करते हुए बॉडी को नीचे नहीं उतारने दिया था। मामला, जालोर जिले के राजपुरा गांव का है। यहां हनुमान आश्रम के साधु रविनाथ महाराज (60) ने गुरुवार देर रात आश्रम में सुसाइड कर लिया था। शव शनिवार सुबह करीब 10.30 बजे उतारा गया। इससे पहले शुक्रवार रात को करीब आठ बजे विधायक पूराराम चौधरी सहित तीन लोगों के खिलाफ जातिसूचक शब्द कहने व धमकाने का मामला दर्ज किया गया।

यह है पूरा विवाद

आश्रम और सुंधा माता सड़क के बीच भीनमाल विधायक पूराराम चौधरी की 20 बीघा जमीन है। इस जगह विधायक चौधरी का रिजोर्ट प्रस्तावित है। जमीन करोड़ों की बताई जा रही है। यदि जमीन की चारदीवारी बनाई जाती है तो सड़क से आश्रम जाने का रास्ता बंद हो जाता है। पिछले दो दिनों से इस जमीन की पैमाइश करवाई जा रही थी। बताया जा रहा है रास्ता बंद होने व विधायक की दादागिरी से परेशान संत रविनाथ ने सुसाइड कर लिया।

रास्ता दिया जाएगा

जसवंतपुरा एसडीएम राजेंद्र सिंह ने बताया कि हमने आश्रम तक रास्ता देने की बात मान ली है। प्रशासन और साधु-संतों के बीच बनी सहमति के बाद श्री बाला हनुमान जी आश्रम तक जाने के लिए प्रशासन आधिकारिक तौर पर रास्ता देगा। आश्रम व सड़क के बीच विधायक की ओर से खुदवाई गई खाई को रेती से भरा जाएगा। जसवंतपुरा थानाधिकारी मनीष सोनी ने बताया कि संत के भतीजे बाबूराम ने विधायक पूराराम चौधरी, ड्राइवर धनसिंह व बीजनाथ उर्फ छोगाराम के खिलाफ साधु को धमकाने, जातिसूचक शब्दों से प्रताडि़त करने और मारपीट करने का मामला दर्ज कराया है।मामले में अभी तक कोई गिरफ्तारी नहीं हुई है।

20 साल पहले लिया था संन्यास

दिवंगत संत रविनाथ महाराज का वास्तविक नाम वगताराम मेघवाल निवासी पंसेरी (जालोर) है। उनकी पत्नी का नाम काली बाई है। बच्चे नहीं होने पर 20 साल पहले दोनों ने संन्यास ले लिया। पिछले साल कोरोना संक्रमण के कारण पत्नी काली बाई का देहांत हो गया था।

संत विजयदास ने किया था आत्मदाह

करीब 17 दिन पहले भरतपुर के पसोपा गांव में संत बाबा विजय दास ने अवैध खनन के विरोध में खुद को आग लगा ली। वे साधु-संतों के साथ पिछले 551 दिन से आंदोलन कर रहे थे।

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