
बांसवाड़ा। दिगंबर जैन समाज कुशलगढ़ की ओर से सोमवार को आचार्य सुनील सागरजी महाराज के सान्निध्य में प्राचीन श्री पार्श्वनाथ दिगंबर जैन जूना मंदिर की मूल वेदी का शिलान्यास किया गया। आचार्य के सान्निध्य में शोभायात्रा निकाली। प्रतिष्ठाचार्य विनोद पगारिया के तत्वावधान में शिलान्यास कार्यक्रम विधि विधान के साथ हुआ। वेदी निर्माण स्थल पर मुख्य कुर्म शिला, अरिहंत शिला, मंगल कलाश, नाभि दंड की स्थापना विजयलाल कोठारी परिवार ने की। आठ दिशा में अष्ट आयुध शिला, मंगल कलाश की स्थापना की गई।
आाचार्य के सान्निध्य में मूलनायक, आदिनाथ मंदिरजी पर मूलनायक भगवान व जूना मंदिर पारसनाथ भगवान का पंचामृत अभिषेक विधि विधान से हुआ। मुख्य शिला स्थापित करने का लाभ विजयलाल कोठारी परिवार कुशलगढ़ को प्राप्त हुआ। गुरुदेव के पाद प्रक्षालन का लाभ रजनीकांत खाबिया परिवार को मिला। गुरुदेव के सान्निध्य में दिगंबर जैन बीसपंथी पाठशाला व आर्यिका भवन का शिलान्यास भी हुआ। जहां मुख्य शिला का लाभ राजकुमार पत्नी प्रदीप, शांतिलाल सेठ परिवार कुशलगढ़ को प्राप्त हुआ।
इसके बाद आचार्य ने प्रवचन में कहा कि वस्त्रों से नहीं, अपने चरित्र से इंसान महान होता है। महावीर भगवान ने वस्त्रों का त्याग कर, चरित्र पर ध्यान दिया इसलिए आज उन्हें पूजा जाता है। वस्त्र आभूषण आदि का जीवन में महत्व बहुत ही सीमित है, परंतु अच्छा चरित्र, आचरण जीवन को महान बना देता है। इसके बाद आचार्य की आहारचर्या हुई। दोपहर 2 बजे आचार्य ससंघ का मंगलेश्वर की ओर विहार हुआ।
रात्रि विश्राम मंगलेश्वर में करने के बाद मंगलवार सुबह अंदेश्वर पहुुंचेंगे। महान होता है। महावीर भगवान ने वस्त्रों का त्याग कर, चरित्र पर ध्यान दिया इसलिए आज उन्हें पूजा जाता है। वस्त्र आभूषण आदि का जीवन में महत्व बहुत ही सीमित है, परंतु अच्छा चरित्र, आचरण जीवन को महान बना देता है। इसके बाद आचार्य की आहारचर्या हुई। दोपहर 2 बजे आचार्य ससंघ का मंगलेश्वर की ओर विहार हुआ। रात्रि विश्राम मंगलेश्वर में करने के बाद मंगलवार सुबह अंदेश्वर पहुुंचेंगे।
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