डीजलगेट कांड: फॉक्सवैगन को देना पड़ेगा मुआवज़ा, अदालत ने सुनाया फैसला

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फॉक्सवैगन, Volkswagen
फॉक्सवैगन, Volkswagen

डीजलगेट कांड में अदालत ने फॉक्सवैगन को मोटर चालकों को मुआवजा देने का फैसला सुनाया, जिन्होंने खराब डीजल इंजनों वाले वाहन खरीदे हैं। फॉक्सवैगन अपने घरेलू बाजार के लिए यह एक बड़ा झटका है क्योंकि, वह अभी भी डीजल वाहन उत्सर्जन घोटाले से उबरने की कोशिश में है।

एजेंसी, नई दिल्ली

फॉक्सवैगन को अदालत ने सोमवार को फैसला सुनाया कि मोटर चालकों को मुआवजा देना होगा जिन्होंने खराब डीजल इंजनों वाले वाहन खरीदे हैं। अपने घरेलू बाजार में कार निर्माता के लिए यह एक बड़ा झटका है क्योंकि, वह अभी भी डीजल वाहन उत्सर्जन घोटाले से उबरने की कोशिश में है। अदालत ने इस केस में की सुनवाई फॉक्सवैगन ने लाखों डीजल इंजन कारों में उत्सर्जन परीक्षण में धोखा देना स्वीकार किया था जिसके लगभग पांच साल बाद अदालत का यह फैसला आया है।

डीजलगेट कांड: फॉक्सवैगन की लाखों गाडिय़ों में अवैध एग्जॉस्ट टेक्नोलॉजी घोटाले का पर्दाफाश 2015 में हुआ था।

सोमवार को हुई सुनवाई विशेष रूप से 65 वर्षीय हर्बर्ट गिल्बर्ट के मामले में हुई। उन्होंने 2014 में डीजल-इंजन वाली फॉक्सवैगन शरण मिनीवैन खरीदी थी। यह गाड़ी उन 1 करोड़ 10 लाख कारों में से एक थी जिनमें फॉक्सवैगन के खराब इंजन लगे हुए थे। इस वाहन की कीमत 31,500 यूरो (26 लाख रुपए) है। इस गाड़ी में ईए189 डीजल इंजन लगा हुआ था। यह वही इंजन है जो घोटाले के केंद्र में था। फॉक्सवैगन की लाखों गाडिय़ों में अवैध एग्जॉस्ट टेक्नोलॉजी घोटाले का पर्दाफाश 2015 में हुआ था।

डीजलगेट कांड में सुनवाई विशेष रूप से 65 वर्षीय हर्बर्ट गिल्बर्ट के मामले में हुई। उन्होंने 2014 में डीजल-इंजन वाली फॉक्सवैगन शरण मिनीवैन खरीदी थी। यह गाड़ी उन 1 करोड़ 10 लाख कारों में से एक थी जिनमें फॉक्सवैगन के खराब इंजन लगे हुए थे।

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मलेशिया, इंडानेशिया के साथ खाद्य तेल समझौता समाप्त, बढ़ाना चाहिए आयात शुल्क: एसईए
नई दिल्ली। सॉल्वेंट एक्सट्रैक्टर्स एसोसिएशन (एसईए) ने सोमवार को कहा कि भारत का मलेशिया और इंडोनेशिया के साथ 2010 से जारी खाद्य तेल समझौता समाप्त हो गया है, ऐसे में सरकार को सोया, सूरजमुखी और कच्चे पाम तेल पर सीमा शुल्क बढ़ाना चाहिए और घरेलू उत्पादन को बढ़ावा देना चाहिए।

साथ ही एसईए ने सरकार से घरेलू उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए रिफाइंड पाम तेल या पामोलीन के आयात पर पाबंदी लगाने का आग्रह किया है। उद्योग संगठन ने देश को खाद्य तेलों के मामले में आत्मनिर्भर बनाने के लिए ये कुछ अल्पकालीन सुझाव सरकार को दिए हैं।

एसईए के अध्यक्ष अतुल चतुर्वेदी ने एक बयान में कहा, कोई भी देश अपनी सालाना खपत के करीब 70 प्रतिशत के बराबर आयात कर अपनी खाद्य तेल सुरक्षा से समझौता करने का जोखिम नहीं उठा सकता। यह स्थिति प्राथमिक आधार पर सुधारात्मक कदम उठाने की जरूरत को रेखांकित करता है।

उन्होंने कहा कि पिछले कई साल से खाद्य तेलों पर कम आयात शुल्क से हमारे किसानों की तिलहन की खेती में रुचि कम हुई है। इसमें कोई अचंभा नहीं होगा कि देश का तिलहन उत्पादन स्थिर रहे लेकिन समृद्धि के साथ खाद्य तेल की खपत में तीव्र वृद्धि हो और इसमें सालाना तीन से चार प्रतिशत की दर से वृद्धि हो रही है।

हालांकि उन्होंने कहा कि पिछले कुछ साल से इस विसंगति को दूर करने का प्रयास हो रहा है। चतुर्वेदी ने कहा कि भारत ने इंडोनेशिया और मलयेशिया के साथ 2010 में जो समझौता किया था, उससे हमारी सरकार को शुल्क बढ़ाने की अनुमति नहीं थी लेकिन अच्छी खबर यह है कि समझौते की अवधि अब समाप्त होने वाली है और भारत शुल्क दरें बढ़ाने को स्वतंत्र है