
वात-वाद में वाद, वाद फैलाये वादियां।
करता फिरै फसाद, ऐ वादीला सेखर।।
जो झगडालू होते हैं, वे बात बात में झगड़ा करने लगते हैं। इस तरह के लोग जिददी होते हैं और इधर-उधर झगड़ा फसाद करते फिरते है।
एक गांव में एक गरीब व्यक्ति अपनी स्त्री के साथ रहता था। छोटा गांव होने के कारण मजदूरी का काम ज्यादा मिलता नहीं था। अत: घर में गरीबी का राज्य था। मुश्किल से दो जून की रूखी-सूखी रोटी खाकर गुजरान होता था। रोटियों के साथ दाल भी किसी दिन ही नसीब होती थी। जिस दिन घर में दाल नहीं होती थी, उस दिन नमक मिर्च पीसकर उसे चटनी का नाम देते थे, और उसी के साथ दोनों रोटियां गले उतारते थे। उन्हें घी दूध खाने की बड़ी लालसा थी, लेकिन तरस तरस कर ही रह जाते, क्योंकि जहां अनाज के ही लाले पड़े हों वहां घी दूध के दर्शन ही कहां। जब वे दूसरों को घी दूध खाते देखते तो उनका कलेजा बैठ जाता था।
एक दि घर में बैठे पति पत्नी दोनों बातें कर रहे थे। तभी गरीब ने अपनी स्त्री से कहा कि यदि अपन एक भैंस ले आएं तो फिर कैसा आनंद रहे। फिर तो रोज घी खाने को मिला करेगा। यह सुनकर उसकी स्त्री बड़ी उत्साहित हुई। वह यह भूल गई कि उनकी आर्थिक स्थिति बहुत ही कमजोर है, भैंस तो क्या वे बकरी तक खरीदने में असमर्थ थे। लेकिन उसकी स्त्री कहने लगी कि जब भैंस घर में आ जाएगी तो फिर अपने यहां घी दूध की कोई कमी नही रहेगी। फिर तो मैं रोज भैस दुहा करूंगी। दही जमाया करूंगी। दही बिलोया करूंगी। घी बनाया करूंगी। दूध, दही, घी छाछ किसी की कमी नहीं रहेगी। फिर तो मैं रोज आपको चुपड़ी हुई रोटियों के साथ मलाईदार दही परोसा करूंगी। और हां, थोड़ा बहुत दूध दही अपने पीहर भाई-भतीजों के लिए भी भेजा करूंगी।
यह सुनते ही पति को तैश आ गया। उसने पत्नी यह कहते हुए पीटना शुरू कर दिया कि घर खिलाऊ, तेरे पीहर तेरे भाई-भतीजों के लिए दूध दही भेजने के लिए भैंस थोड़े ही लाया हूं। पति की मार पडऩे पर पत्नी चिल्लाने लग गई। उसका जोरदार चिल्लाना सुनकर पड़ोस में रहने वाला जाट दौड़ा दौड़ा पहुंचा कि क्या हो गया? वहां उसने पहुंचकर देखा कि वह गरीब अपनी स्त्री को पीट रहा है और चिल्ला रहा है। उसकी बातें सुनकर वह समझ गया कि मामला क्या है।
फिर अचानक उस जाट ने उसे यह कहते हुए पीटना शुरू कर दिया कि दुष्ट, तेरी भैंस और तेरे पाडे ने मेरा खेत रौंद डाला। सारी फसल बरबाद करदी। जब उस गरीब पे बे भाव की पडऩे लगी तो वह बहुत चकराया। उसने जाट से कहा कि अरे, मुझे क्यों पीट रहे हो? मेरे यहां कौन सी भैंस बंधी है, जो तुम्हारा खेत चर जाती है? इस पर जाट बोला कि अरे नालायक, फिर इस बेचारी को तू नाहक क्यों पीट रहा है? इसने कौन सा दूध दही अपने पीहर भेज दिया है? अब उस गरीब व्यक्ति के समझ में आई और वह अपने किये पर पछताने लगा।